Desktop Special Offer Mobile Special Offer
July 8, 2026 Blog

Kapardisha Chaturthi 2026: 14 अक्टूबर को है कपर्दीशा चतुर्थी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक महत्व

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

कपर्दीशा चतुर्थी 2026: विघ्नहर्ता की कृपा से जीवन के हर संकट का अंत (Kapardisha Chaturthi 2026: Ending every crisis in life through the grace of the Remover of Obstacles.)

क्या आपने कभी महसूस किया है कि जीवन में सब कुछ अच्छा चल रहा है, लेकिन अचानक से सब कुछ रुक जाता है? मेहनत और नीयत दोनों साफ होती हैं, फिर भी काम बिगड़ जाता है। हमारे सनातन धर्म में माना जाता है कि जब जीवन में ऐसी रुकावटें आती हैं, तो हमें विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को याद करना चाहिए। गणेश जी न केवल देवताओं में प्रथम पूज्य हैं, बल्कि वे हर माँ के लिए उनके बच्चों की सुरक्षा के लिए व्याकुल रहने वाले बेटे हैं।

हर महीने की चतुर्थी गणेश जी को समर्पित होती है, लेकिन अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का हमारे शास्त्रों में विशेष महत्व है, जिसे हम कपर्दीशा चतुर्थी 2026 (Kapardisha Chaturthi 2026) कहते हैं। यह दिन भगवान शिव की जटाओं की दिव्य शक्ति और गणेश जी के आशीर्वाद के मेल से बना है। इस साल कपर्दीशा चतुर्थी 14 अक्टूबर 2026 को आ रही है, जो एक व्रत नहीं, बल्कि घर की दहलीज से दुखों को दूर करने और रिद्धि-सिद्धि का स्वागत करने का महापर्व है।

यह भी पढ़ें - Ganesh Ji Ka Bhajan : Teri jai ho Ganesh (तेरी जय हो गणेश) lyrics in Hindi

कपर्दीशा चतुर्थी क्या है? (What is Kapardisha Chaturthi?)

कपर्दीशा चतुर्थी 2026 (Kapardisha Chaturthi 2026) अश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली विनायक चतुर्थी है। 'कपर्दी' भगवान शिव का एक नाम है, जिनकी जटाएं पवित्र हैं। चूंकि गणेश जी शिव-पुत्र हैं, इसलिए इस चतुर्थी पर गणेश जी के 'कपर्दीशा' स्वरूप की पूजा की जाती है। यह व्रत सुख, समृद्धि और बुद्धि का विकास करने वाला माना गया है। इस दिन व्रत रखने से जीवन में आने वाले सभी मानसिक और सांसारिक संकट दूर हो जाते हैं।

कपर्दीशा चतुर्थी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय (Date and time)

साल 2026 में यह चतुर्थी शुभ संयोगों के साथ आ रही है। पंचांग के अनुसार व्रत की जानकारी इस प्रकार है:

व्रत कब है: 14 अक्टूबर 2026, दिन बुधवार
चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: 14 अक्टूबर 2026 को सुबह 04:12 AM से
चतुर्थी तिथि का समापन: 15 अक्टूबर 2026 को सुबह 02:45 AM तक
गणेश पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 10:52 AM से दोपहर 01:15 PM तक
चंद्रोदय का समय: रात 08:32 PM (स्थान के अनुसार बदल सकता है)

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

सनातन परंपरा में विनायक चतुर्थी का महत्व आत्मिक बल को बढ़ाना है। कपर्दीशा चतुर्थी 2026 (Kapardisha Chaturthi 2026) का महत्व इसलिए और गहरा हो जाता है क्योंकि यह अश्विन मास में आती है, जब प्रकृति और ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह चरम पर होता है। आध्यात्मिक रूप से, बप्पा का यह स्वरूप हमें सिखाता है कि विचार जितने ऊंचे और उलझनों से मुक्त होंगे, सफलता उतनी ही स्थायी होगी। इस दिन व्रत रखने से बुद्धि प्रखर होती है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

बप्पा की सरल और संपूर्ण पूजा विधि (Pooja rituals)

kapardisha chaturthi 2026 festival


यह भी पढ़ें -  108 Names Of Lord Ganesha: गणेश जी के 108 नाम जपने से पूरी होती है सब मनोकामनाएं

इस पावन दिन पर अपने घर में बप्पा का आशीर्वाद स्थापित करने के लिए इस प्रकार पूजा विधि का पालन करें:

  • प्रातः काल का संकल्प: 14 अक्टूबर की सुबह सूर्योदय से पहले उठें। स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएं। साफ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
  • व्रत का संकल्प: पूजा घर में बप्पा के सामने हाथ में जल और दूर्वा लेकर संकल्प करें—"हे कपर्दीशा गणेश, मैं आज आपके निमित्त व्रत रख रहा/रही हूँ, मेरी पूजा स्वीकार करें।"
  • स्थापना और श्रृंगार: गणेश जी की मूर्ति को चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं, चंदन लगाएं और अक्षत अर्पित करें।
  • दूर्वा और मोदक अर्पण: बप्पा को 21 दूर्वा की गांठें 'ॐ गं गणपतये नमः' कहते हुए अर्पित करें। भोग के रूप में उन्हें बूंदी के लड्डू या मोदक चढ़ाएं।
  • कथा और आरती: मध्याह्न मुहूर्त में कपर्दीशा चतुर्थी 2026 (Kapardisha Chaturthi 2026) की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर गणेश जी की आरती गाएं।
  • शाम का अर्घ्य: रात्रि में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करें (कुछ क्षेत्रों में यह व्रत फलाहारी रहकर अगले दिन खोला जाता है)।

चतुर्थी व्रत के कड़े नियम (Rules)

इस पावन व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इन नियमों का पालन किया जाए:

  • तुलसी दल वर्जित: गणेश जी की पूजा में तुलसी की पत्ती न चढ़ाएं।
  • सात्विकता का ध्यान: घर में प्याज, लहसुन या तामसिक भोजन न बनाएं।
  • क्रोध और चुगली से बचें: इस दिन किसी पर गुस्सा न करें, वाणी को मधुर रखें।

कपर्दीशा चतुर्थी व्रत के महालाभ (Benefits)

जो श्रद्धालु पूरी निष्ठा से यह व्रत रखते हैं, उन्हें निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • बुद्धि और करियर में उन्नति: विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह व्रत वरदान समान है, इससे एकाग्रता बढ़ती है।
  • संकटों से रक्षा: घर में आने वाली अचानक बीमारियां या अदालती चक्कर शांत होते हैं।
  • रिद्धि-सिद्धि का वास: घर में कभी धन-धान्य और खुशियों की कमी नहीं होती।

क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)

क्या करें:

  • पूजा के समय बप्पा को लाल रंग का फूल चढ़ाएं।
  • इस दिन गाय को हरी घास या मोदक का अंश जरूर खिलाएं।

क्या न करें:

  • भगवान गणेश की पीठ के दर्शन न करें, माना जाता है कि बप्पा की पीठ में दरिद्रता का वास होता है।
  • इस दिन किसी जीव या पशु को कष्ट न पहुंचाएं।

पौराणिक व्रत कथा: शिवपुत्र का तेज और चंद्रमा का घमंड (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने गणेश जी को गज का मुख लगाया, तब सभी देवताओं ने उनकी वंदना की। लेकिन चंद्र देव गणेश जी के इस स्वरूप को देखकर मंद-मंद मुस्कुराने लगे। बप्पा ने उनके अहंकार को भांप लिया और श्राप दिया कि आज से जो भी तुम्हें चतुर्थी के दिन देखेगा, उस पर कलंक लगेगा।

चंद्रमा को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने शिव जी की जटाओं की शरण ली। तब भगवान शिव के मध्यस्थ बनने पर गणेश जी ने कहा कि अश्विन शुक्ल चतुर्थी (कपर्दीशा चतुर्थी) के दिन जो मेरा व्रत रखकर तुम्हारी पूजा करेगा, वह कलंक से मुक्त हो जाएगा। यह कथा हमें सिखाती है कि अहंकार का अंत हमेशा बुरा होता है और बप्पा की शरण में आने वाले का कल्याण निश्चित है।

निष्कर्ष: बप्पा का साथ ही हमारा विश्वास है (Conclusion)

कपर्दीशा चतुर्थी 2026 (Kapardisha Chaturthi 2026) केवल एक उपवास का दिन नहीं, यह हमारे भीतर के विश्वास को जगाने का माध्यम है। जब आप 14 अक्टूबर 2026 को बप्पा के सामने हाथ जोड़कर बैठेंगे, तो अपनी सारी परेशानियां उनके चरणों में छोड़ दीजिएगा। विश्वास रखिए, जिनके साथ स्वयं कपर्दीशा गणेश हों, उनके जीवन में कभी कोई विघ्न टिक नहीं सकता। बप्पा की कृपा आपके घर-परिवार पर हमेशा बरसती रहे!

यह भी पढ़ें - Ganesh Temples In India: भारत के 10 प्रमुख मनोकामना पूर्ति गणेश मंदिर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. वर्ष में कपर्दीशा चतुर्थी (Kapardisha Chaturthi 2026) कब है?
    साल में कपर्दीशा चतुर्थी (Kapardisha Chaturthi 2026) का व्रत 14 अक्टूबर, बुधवार को रखा जाएगा।
  1. इस चतुर्थी को 'कपर्दीशा' क्यों कहा जाता है?
    भगवान शिव (कपर्दी) के आशीर्वाद और उनके अंश स्वरूप होने के कारण अश्विन शुक्ल चतुर्थी के गणेश स्वरूप को कपर्दीशा कहा जाता है।
  1. क्या गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ा सकते हैं?
    नहीं, गणेश जी की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना पूरी तरह वर्जित माना गया है।
  1. इस व्रत में बप्पा को क्या भोग लगाना चाहिए?
    बप्पा को प्रसन्न करने के लिए मोदक, बूंदी के लड्डू या शुद्ध घी से बना हलवा अर्पित करना सबसे उत्तम है।
  1. क्या यह व्रत निर्जला रखा जाता है?
    यह आपकी श्रद्धा पर निर्भर करता है। आप इसे निराहार, जल पीकर या एक समय फलाहार खाकर भी रख सकते हैं।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.