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July 1, 2026 Blog

Indira Ekadashi 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पितरों के मोक्ष की पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

इंदिरा एकादशी 2026: एक व्रत जो आपके पितरों को मोक्ष दिला सकता है (Indira Ekadashi 2026: A fast that can grant salvation to your ancestors.)

क्या आपने कभी सोचा है कि जब हमारे पूर्वज इस दुनिया से चले जाते हैं, तो वे परलोक में किस हाल में होंगे? हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता और बुजुर्गों का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है। जीते जी तो हम उनकी सेवा करते ही हैं, लेकिन उनके जाने के बाद भी उनकी आत्मा की शांति के लिए व्याकुल रहना हमारी रगों में बसा है। इसी व्याकुलता और अगाध प्रेम का जवाब है पितृ पक्ष। और इसी पितृ पक्ष के बीच आती है एक ऐसी चमत्कारी तिथि, जो यमलोक के कष्टों को भी काटकर मोक्ष का रास्ता खोल देती है—उसे हम कहते हैं इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) ।

इंदिरा एकादशी क्या है? (What is Indira Ekadashi?)

इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी है। चूंकि यह तिथि पितृ पक्ष के दौरान आती है, इसलिए इसे 'पितृ एकादशी' भी कहते हैं। सनातन परंपरा में माना जाता है कि इस दिन किया गया व्रत, दान और तर्पण सीधे यमराज के दरबार में तड़प रहे पूर्वजों तक अमृत की तरह पहुँचता है और उन्हें सीधे श्री हरि विष्णु के धाम, बैकुंठ भेज देता है।

इंदिरा एकादशी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय (Date and time)

साल में इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) का व्रत बहुत ही दुर्लभ और कल्याणकारी संयोगों के साथ आ रहा है। इस दिन सिद्ध और साध्य योग का निर्माण हो रहा है, जिससे इस व्रत का प्रभाव कई गुना बढ़ गया है। पंचांग के अनुसार व्रत की सटीक जानकारी इस प्रकार है:

व्रत कब है: 06 अक्टूबर 2026, दिन मंगलवार
एकादशी तिथि का प्रारंभ: 06 अक्टूबर 2026 को देर रात 02:07 AM
एकादशी तिथि का समापन: 07 अक्टूबर 2026 को मध्यरात्रि 12:34 AM तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:39 AM से 05:28 AM तक
इंदिरा एकादशी पारण मुहूर्त (व्रत खोलने का समय): 07 अक्टूबर 2026 को सुबह 06:17 AM से 08:38 AM के बीच

इंदिरा एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) का महत्व असाधारण है। सामान्य एकादशियां इंसान को खुद के पापों से मुक्ति दिलाती हैं, लेकिन इंदिरा एकादशी राजा से लेकर रंक तक सबको अपने पूर्वजों का उद्धार करने का माध्यम देती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई जातक इस दिन पूरी निष्ठा से उपवास रखता है, तो उसके सात पीढ़ियों के पितर तृप्त हो जाते हैं।

भगवान शालिग्राम और विष्णु जी की पूजा विधि (Pooja rituals)

यदि आप अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए इस वर्ष यह व्रत करने जा रहे हैं, तो दशमी तिथि से ही इसकी पूजा विधि शुरू हो जाती है:

  • दशमी की तैयारी: 5 अक्टूबर (दशमी) की दोपहर को नदी में स्नान करके पितरों का श्राद्ध या तर्पण करें।
  • प्रात: काल संकल्प: 6 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल मिले पानी से स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर हाथ में जल लें और संकल्प करें—"हे प्रभु विष्णु, मैं अपने पितरों के मोक्ष के लिए आज इंदिरा एकादशी का व्रत रख रहा हूँ, इसे स्वीकार करें।"
  • विष्णु स्थापना: पूजा घर में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु या शालिग्राम जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • पंचोपचार पूजा: भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत (एकादशी में अक्षत के रूप में तिल का प्रयोग करें, चावल वर्जित है) और सबसे जरूरी तुलसी दल अर्पित करें। धूप और गाय के घी का दीपक जलाएं।
  • पितृ तर्पण: दोपहर के समय किसी योग्य ब्राह्मण की मदद से या स्वयं घर पर ही दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके काले तिल और जल से पितरों का तर्पण करें।
  • आरती और कीर्तन: शाम को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें, व्रत कथा सुनें और आरती करें। रात्रि में सोएं नहीं, बल्कि हरि नाम का संकीर्तन करें।

इंदिरा एकादशी व्रत के नियम (Rules)

इस पावन व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब कुछ विशेष व्रत के नियम का पालन पूरी ईमानदारी से किया जाए:

  • चावल का पूर्ण त्याग: एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित है।
  • ब्रह्मचर्य का पालन: दशमी की रात से लेकर द्वादशी की सुबह तक पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है।
  • दातुन और नाखून काटना वर्जित: इस दिन बाल, दाढ़ी या नाखून न काटें और न ही किसी जीवित वृक्ष की पत्ती या दातुन तोड़ें।

इंदिरा एकादशी के लाभ (Benefits)

शास्त्रों के अनुसार, इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) का व्रत रखने से जातक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • पितृदोष से मुक्ति: यदि आपकी कुंडली में भयंकर पितृदोष है जिसके कारण तरक्की रुकी हुई है, तो इस व्रत से वह दोष समाप्त हो जाता है।
  • वंश वृद्धि: पितरों के आशीर्वाद से घर में किलकारियां गूँजती हैं और योग्य संतान की प्राप्ति होती है।
  • सुख और ऐश्वर्य: इस लोक में सभी प्रकार के भौतिक सुख भोगकर अंत में जातक विष्णु लोक को प्राप्त होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • पूरे दिन शांत रहें, मन में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का मानसिक जाप करते रहें।
  • ब्राह्मणों, गरीबों या बेसहारा पशुओं (जैसे गाय और कौए) को भोजन और पानी का दान अवश्य करें।
  • द्वादशी के दिन पारण करने से पहले दान-दक्षिणा जरूर निकालें।

क्या न करें:

  • किसी भी व्यक्ति पर क्रोध न करें, न ही किसी की पीठ पीछे निंदा (चुगली) करें।
  • घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा जैसी तामसिक चीजों को बिल्कुल न आने दें।
  • किसी भी बुजुर्ग या याचक (भिखारी) का अपमान करके उसे दरवाजे से खाली हाथ न लौटाएं।

पौराणिक व्रत कथा (Story)

सतयुग में महिष्मती नाम की नगरी में 'इंद्रसेन' नाम के एक प्रतापी और परम विष्णु भक्त राजा राज करते थे। एक दिन देवर्षि नारद उनकी सभा में पधारे। नारद जी ने कहा, “हे राजन! मैं यमलोक गया था, वहां यमराज की सभा में मैंने तुम्हारे पिता को देखा। वे अपने पूर्व जन्म के किसी अधर्म के कारण यमलोक के कष्ट भोग रहे हैं। उन्होंने तुम्हारे लिए संदेश भेजा है कि यदि मेरा पुत्र अश्विन कृष्ण पक्ष की 'इंदिरा एकादशी' का व्रत रखकर उसका पुण्य मुझे दान कर दे, तो मुझे मोक्ष मिल जाएगा।"

पिता का कष्ट सुनकर राजा इंद्रसेन की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने नारद जी से विधि पूछी और पूरे विधि-विधान से इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) का व्रत किया। जैसे ही राजा ने व्रत का पुण्य अपने पिता को अर्पित किया, आकाश से फूलों की वर्षा होने लगी और राजा के पिता यमलोक के कष्टों से मुक्त होकर गरुड़ पर सवार होकर वैकुंठ धाम चले गए।

निष्कर्ष (Conclusion)

इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) केवल भूखे रहने का नाम नहीं है। यह अपने अतीत, अपनी जड़ों और उन पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का जरिया है जिन्होंने हमें यह जीवन दिया। जब आप 06 अक्टूबर 2026 को यह व्रत रखें, तो मन में यह अटूट विश्वास रखें कि आपकी श्रद्धा आपके पितरों के आंसुओं को पोंछकर उनके चेहरे पर मुस्कान ले आएगी। भगवान विष्णु और आपके पितरों का आशीर्वाद आपके घर को हमेशा खुशियों से हरा-भरा रखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


  1. साल में इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) कब है?
    साल में इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) का व्रत 06 अक्टूबर, मंगलवार को रखा जाएगा।

  1. इंदिरा एकादशी 2026 (Indira Ekadashi 2026) के दिन किसका पूजन किया जाता है?
    इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की पूजा की जाती है और दोपहर में पितरों का तर्पण किया जाता है।

  1. क्या इंदिरा एकादशी के व्रत में फल खा सकते हैं?
    जी हाँ, यदि आप निराहार (बिना पानी या बिना भोजन के) व्रत नहीं रख सकते, तो एक समय फलाहार (दूध, फल, कुट्टू का आटा) ग्रहण कर सकते हैं।

  1. एकादशी का पारण कब और कैसे करना चाहिए?
    07 अक्टूबर को सुबह 06:17 AM से 08:38 AM के बीच किसी ब्राह्मण को दान देने के बाद जल या तुलसी दल लेकर व्रत खोलना चाहिए।

  1. क्या महिलाएं भी इंदिरा एकादशी का व्रत रख सकती हैं?
    बिल्कुल, महिलाएं अपने मायके या ससुराल दोनों पक्षों के पितरों की मुक्ति के लिए यह पावन व्रत रख सकती हैं।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.