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June 25, 2026 Blog

Varaha Jayanti 2026 : कब है व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, नियम और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

वराह जयंती 2026जब डूबती हुई धरती को बचाने आए नारायण (Varaha Jayanti 2026: When Narayana Came to Save the Sinking Earth)

कल्पना कीजिए, चारों तरफ पानी ही पानी हो, घने अंधेरे ने पूरी सृष्टि को जकड़ रखा हो और हमारी जीवनदायिनी धरती माँ गहरे समुद्र में डूब रही हो। ऐसे में कौन हमारी रक्षा करेगा? सनातन संस्कृति में भगवान सिर्फ स्वर्ग में बैठकर तमाशा नहीं देखते, जब-जब उनकी सृष्टि और संतानों पर संकट आता है, वे खुद दौड़कर आते हैं - कभी आंसू पोंछने के लिए, तो कभी दुष्टों का संहार करने के लिए। भगवान विष्णु का एक ऐसा ही अलौकिक रूप है 'श्री वराह अवतार'। इस साल 13 सितंबर  को वराह जयंती 2026 (Varaha Jayanti 2026) का पावन पर्व पूरे देश में भावुक और भक्तिमय तरीके से मनाया जाएगा।

वराह जयंती 2026 (Varaha Jayanti 2026) हमें याद दिलाती है कि जब संकट बड़ा हो, तो ईश्वर हमारे रक्षक बनकर किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। एक जंगली वराह के रूप में आकर नारायण ने जिस तरह धरती माँ को अपने दांतों पर उठाकर बचाया, वह दृश्य हर सनातनी के मन में कृतज्ञता और श्रद्धा जगा देता है। 

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वराह जयंती व्रत क्या है? (What is the Varaha Jayanti fast?)

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के तीसरे अवतार 'श्री वराह देव' के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे हम वराह जयंती कहते हैं। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, सतयुग में हिरण्याक्ष नाम के राक्षस ने धरती को ले जाकर पाताल लोक के गंदे समुद्र में छिपा दिया था, तब विष्णु जी ने यह अनोखा रूप धारण किया था। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, श्री हरि की विशेष पूजा करते हैं और पर्यावरण व पृथ्वी की रक्षा का संकल्प लेते हैं।

वराह जयंती 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

साल में वराह जयंती 2026 (Varaha Jayanti 2026) का यह पावन व्रत 13 सितंबर, रविवार को रखा जाएगा। इस दिन सुबह से ही भगवान विष्णु के मंदिरों में विशेष कीर्तन और अभिषेक शुरू हो जाएंगे। पंचांग गणना के अनुसार मुख्य समय कुछ इस प्रकार हैं:

वराह जयंती व्रत तारीख: 13 सितंबर 2026, दिन रविवार
भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि प्रारंभ: 12 सितंबर 2026 को रात 09:30 बजे से
भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त: 13 सितंबर 2026 को रात 11:15 बजे तक
पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त: 13 सितंबर को सुबह 06:08 AM से सुबह 11:45 AM तक।

इस पावन व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

सनातन परंपरा में वराह जयंती 2026 (Varaha Jayanti 2026) व्रत का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। भगवान विष्णु का यह अवतार यह संदेश देता है कि कोई भी जीव छोटा या अशुद्ध नहीं होता, जब बात धर्म की रक्षा की हो। वराह देव को वेदों का प्रतीक माना गया है, जिनके अंगों में यज्ञ और मंत्र निवास करते हैं।

आध्यात्मिक रूप से यह पर्व हमें सिखाता है कि जिस तरह भगवान ने धरती को पाताल के अंधकार से निकालकर सूर्य के प्रकाश में स्थापित किया था, ठीक उसी तरह यदि हम सच्चे मन से इस दिन उनका व्रत रखें, तो वे हमारे जीवन को भी दुखों के दलदल से बाहर निकाल देते हैं। जिन जातकों के जीवन में जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद चल रहे हैं या जो अपने करियर में स्थिरता चाहते हैं, उनके लिए इस दिन की गई पूजा महाकल्याणकारी साबित होती है।

भगवान वराह की चरणबद्ध पूजा विधि (Pooja ritual)

Varaha Jayanti 2026

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वराह जयंती 2026 (Varaha Jayanti 2026) के दिन घर के मंदिर में ही पूरी पवित्रता के साथ पूजा संपन्न की जा सकती है। आइए जानते हैं इसकी प्रामाणिक पूजा विधि:

  1. स्नान और सात्विक संकल्प: 13 सितंबर की सुबह 05:30 बजे।
    सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ पीले वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की सफाई करें। भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने हाथ में जल और पीले फूल लेकर वराह जयंती व्रत का संकल्प लें।
  1. कलश स्थापना और देव आह्वान: सुबह 06:30 बजे।
    एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु या उनके वराह रूप की मूर्ति स्थापित करें। यदि मूर्ति न हो, तो नारायण की सामान्य तस्वीर के सामने पूजा कर सकते हैं। पास में एक जल का कलश (तांबे का लोटा) स्थापित करें।
  1. अभिषेक और पीला श्रृंगार: सुबह 07:15 बजे।
    प्रभु को गंगाजल और पंचामृत से प्रतीकात्मक स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें पीले चंदन, कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं। भगवान को पीले रंग के फूल, गेंदे की माला और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अर्पित करें।
  1. महाभोग और महाआरती: सुबह 08:00 बजे।
    भगवान वराह को मिश्री, माखन, पीले फल या सूजी के हलवे का भोग लगाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाकर वराह अवतार की पावन पौराणिक कथा सुनें। अंत में विष्णु जी की आरती गाएं और दंडवत प्रणाम करके आशीर्वाद लें।

वराह जयंती व्रत के जरूरी नियम (Rules)

इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन पारंपरिक नियमों का पालन अवश्य करें:

  • तुलसी दल का ध्यान: भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी अनिवार्य है, लेकिन तृतीया तिथि और रविवार के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते। इसलिए एक दिन पहले (शनिवार को) ही तुलसी दल तोड़कर रख लें।
  • फलाहारी उपवास: इस व्रत में अन्न का सेवन वर्जित होता है। आप दिनभर में दूध, फल, जल या साबूदाने की खिचड़ी का सेवन कर सकते हैं। शाम की पूजा के बाद या अगले दिन सुबह पारण करें।
  • सात्विक आचरण: व्रत के दिन किसी की बुराई न करें, झूठ न बोलें और अपने मन में केवल परोपकार के विचार रखें।

इस व्रत को करने के अद्भुत लाभ (Benefits)

पूरी निष्ठा से वराह जयंती 2026 (Varaha Jayanti 2026) का पूजन करने पर भक्तों को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

  • भूमि और संपत्ति का लाभ: जिन लोगों का अपना मकान नहीं बन पा रहा है या जमीन-जायदाद का कोई कोर्ट केस अटका है, उन्हें भगवान वराह की कृपा से सफलता मिलती है।
  • अकाल मृत्यु से रक्षा: जीवन में आने वाले बड़े संकट, गंभीर बीमारियां और अकाल मृत्यु का भय हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
  • मानसिक शक्ति और साहस: भयभीत मन में नया साहस और आत्मविश्वास जागृत होता है, जिससे इंसान हर कठिनाई का सामना कर लेता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Dont's)

व्रत की मर्यादा बनाए रखने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

क्या करें:

  • इस दिन पृथ्वी माता को प्रणाम करें और उनके प्रति आभार व्यक्त करें, क्योंकि भगवान वराह ने स्वयं धरती की रक्षा की थी।
  • पूजा के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पीले फल, चना दाल या वस्त्र का दान अवश्य करें।
  • भगवान विष्णु के महामंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का मानसिक जाप करते रहें।

क्या न करें:

  • तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित: इस पावन दिन पर पूरे घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का प्रयोग पूरी तरह बंद रखें।
  • प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं: इस दिन पेड़-पौधों को काटना, जमीन को बेवजह खोदना या पर्यावरण को दूषित करना वर्जित माना जाता है।
  • रविवार को तुलसी में जल न चढ़ाएं: 13 सितंबर को रविवार होने के कारण तुलसी के पौधे को स्पर्श करने या जल चढ़ाने से बचें (केवल दीपक जला सकते हैं)।

भगवान वराह की अलौकिक पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी दुनिया बना रहे थे, उसी समय ऋषि कश्यप और दिति के घर दो शक्तिशाली राक्षसों का जन्म हुआ - हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु। हिरण्याक्ष ने अपनी कठिन तपस्या से ब्रह्मा जी को खुश कर लिया और वरदान मांगा कि कोई भी देवता, राक्षस या इंसान उसे युद्ध में हरा नहीं सकता। वरदान पाकर हिरण्याक्ष अहंकारी हो गया। उसने तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया और देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। उसके अपराधों के कारण धरती माता को बलपूर्वक बांध दिया गया और पाताल लोक के एक बड़े और गंदे समुद्र में छिपा दिया गया। धरती के गायब होते ही दुनिया का संतुलन बिगड़ने लगा। सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए।

तभी ब्रह्मा जी की नाक से एक छोटा सा वराह शिशु प्रकट हुआ। वह जल्दी ही एक बड़े पहाड़ की तरह विशाल हो गया। यह भगवान विष्णु का वराह अवतार था। प्रभु ने गरजते हुए समुद्र में छलांग लगा दी। पाताल लोक में उन्होंने धरती माता को ढूंढ लिया और अपने दांतों पर सुरक्षित उठा लिया। जब वे धरती को लेकर ऊपर आ रहे थे, तब हिरण्याक्ष ने उन्हें रोक लिया और युद्ध के लिए चुनौती दी। भगवान वराह और हिरण्याक्ष के बीच समुद्र में भयंकर युद्ध हुआ। अंत में, प्रभु ने अपने सुदर्शन चक्र और गदा के प्रहार से उस क्रूर राक्षस को मार दिया। इसके बाद उन्होंने धरती माता को वापस उनके स्थान पर रखा और पूरी दुनिया को बचा लिया।

निष्कर्ष (Conclusion)

13 सितंबर को आने वाली यह वराह जयंती 2026 (Varaha Jayanti 2026)हमें यह संदेश देती है कि ईश्वर अपनी संतानों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह त्योहार हमें अपनी धरती माता, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सम्मान रखना सिखाता है। आइए, इस साल पूरे नियम और श्रद्धा के साथ भगवान वराह की आराधना करें, अपने कर्मों को शुद्ध बनाएं और प्रभु से जीवन के सारे कष्टों को हरने की प्रार्थना करें। जय श्री हरि वराह देव!

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. साल 2026 में वराह जयंती कब है?
    साल 2026 में भगवान वराह की जयंती का पावन व्रत 13 सितंबर, रविवार को श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा।

  1. भगवान विष्णु ने वराह अवतार क्यों लिया था?
    भगवान विष्णु ने महाक्रूर असुर हिरण्याक्ष का वध करने और उसके द्वारा पाताल लोक के समुद्र में छिपाई गई धरती माता को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वराह अवतार लिया था।

  1. वराह जयंती 2026 (Varaha Jayanti 2026) पर किस चीज का भोग लगाया जाता है?
    इस दिन भगवान वराह को मुख्य रूप से माखन-मिश्री, पीले फल, मखाने की खीर और तुलसी दल का भोग लगाया जाता है।

  1. क्या वराह जयंती 2026 (Varaha Jayanti 2026) का व्रत रखने से जमीन से जुड़े विवाद सुलझते हैं?
    हाँ, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान वराह भूमि के रक्षक माने जाते हैं। इसीलिए इस दिन व्रत और पूजन करने से प्रॉपर्टी, मकान और जमीन से जुड़ी हर बाधा दूर होती है।

  1. भगवान वराह की पूजा के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?
    भगवान वराह की पूजा का सबसे अच्छा समय 13 सितंबर 2026 को सुबह 06:08 बजे से सुबह 11:45 बजे तक है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.