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June 25, 2026 Blog

Pithori Amavasya 2026 : बच्चों की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

संतान की लंबी उम्र और माँ का आंचल: पिठोरी अमावस्या 2026 की अलौकिक महिमा (A Child's Longevity and a Mother's Protective Embrace: The Divine Significance of Pithori Amavasya 2026)

एक माँ का अपनी संतान के प्रति स्नेह इस दुनिया की सबसे खूबसूरत और निश्छल भावना है। बच्चा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, एक माँ के लिए वह हमेशा उसका छोटा सा लाडला ही रहता है। उसकी लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए माताएं हंसते-हंसते दुनिया के सबसे कठिन व्रत रख लेती हैं। अपनी संतान की सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए रखा जाने वाला एक ऐसा ही बेहद पवित्र और लोक-आस्था से जुड़ा महापर्व आने वाला है—पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026),जिसे देश के कुछ हिस्सों में पोला अमावस्या या कुशग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस साल यह पावन व्रत 10 सितंबर 2026 को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। भाद्रपद के महीने में आने वाली यह अमावस्या केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह मातृशक्ति की तपस्या और उनके अटूट विश्वास की मूरत है। इस दिन माताएं साक्षात 64 देवियों की आराधना करती हैं और अपने बच्चों की दीर्घायु का वरदान मांगती हैं। 

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पिठोरी अमावस्या व्रत क्या है? (What is the Pithori Amavasya fast?)

सरल और स्पष्ट शब्दों में कहें तो भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) कहा जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में इस अमावस्या का बहुत बड़ा स्थान है। 'पिठोरी' शब्द की उत्पत्ति 'पिठ' यानी आटे से हुई है। इस दिन माताएं चावल या गेहूं के आटे को गूंथकर उससे 64 देवियों की मूर्तियां बनाती हैं और उनकी पारंपरिक रूप से पूजा करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से शादीशुदा महिलाएं अपनी संतान की रक्षा, वंश वृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।

पिठोरी अमावस्या 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

साल में पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) का यह पावन पर्व 10 सितंबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन संतान के कल्याण के लिए की जाने वाली पूजा और पितरों के निमित्त किया जाने वाला तर्पण बहुत फलदायी माना गया है।

पंचांग गणना के अनुसार मुख्य समय और शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

पिठोरी अमावस्या व्रत तारीख: 10 सितंबर 2026, दिन गुरुवार
अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 9 सितंबर 2026 को रात 11:20 बजे से शुरू
अमावस्या तिथि की समाप्ति: 10 सितंबर 2026 को रात 09:45 बजे तक
पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त: 10 सितंबर को सुबह 06:07 AM से सुबह 09:18 AM तक (सुबह की पूजा के लिए श्रेष्ठ)
पितृ तर्पण और दान का समय: दोपहर 11:45 AM से दोपहर 01:30 PM तक

इस पावन व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

सनातन परंपरा में पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) का बहुत गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन 64 देवियों के साथ-साथ माता दुर्गा की पूजा करने से बच्चों के जीवन पर आने वाले सभी प्रकार के अकाल मृत्यु के योग और गंभीर संकट हमेशा के लिए टल जाते हैं। इसके अलावा, अमावस्या तिथि होने के कारण इस दिन पितृ तर्पण और पिंडदान करने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन जो माताएं उपवास रखकर अपने बच्चों के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देती हैं, उनके बच्चों को जीवन के हर क्षेत्र में अपार सफलता और आरोग्यता मिलती है। यह त्योहार परिवारों को अपनी जड़ों और अपनी कुलदेवियों से जोड़ने का एक अनूठा जरिया है।

पिठोरी अमावस्या की चरणबद्ध पूजा विधि (Pooja Ritual)

पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) की पूजा में आटे की देवियों का विशेष स्थान होता है। आइए जानते हैं इसकी प्रामाणिक पूजा विधि:

  1. पवित्र स्नान और संकल्प: 10 सितंबर की सुबह 05:30 बजे।
    सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें और हाथ में जल लेकर अपनी संतान की लंबी उम्र व सुखी जीवन के लिए व्रत का संकल्प लें।
  1. आटे की मूर्तियां और चौकी तैयार करना: सुबह 06:30 बजे।
    चावल या गेहूं के आटे को पानी में गूंथकर उससे माता दुर्गा और 64 देवियों की प्रतीकात्मक छोटी-छोटी मूर्तियां तैयार करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर इन सभी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक स्थापित करें।
  1. अभिषेक, तिलक और श्रृंगार: सुबह 07:15 बजे।
    सभी देवियों को गंगाजल के छींटे दें। इसके बाद उन्हें हल्दी, कुमकुम, चंदन और अक्षत का तिलक लगाएं। देवियों को लाल चुनरी या कलावा चढ़ाएं और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
  1. विशेष भोग और महाआरती: सुबह 08:00 बजे।
    घर में बने विशेष पकवानों, ऋतु फलों और आटे से बनी मीठी पूरियों का देवियों को भोग लगाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाकर पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) की व्रत कथा सुनें। अंत में आरती गाएं और पूजा के बाद वही आटे का प्रसाद अपनी संतान को खिलाएं।

पिठोरी अमावस्या व्रत के जरूरी नियम (Rules)

Pithori Amavasya 2026

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इस कठिन व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने के लिए इन पारंपरिक नियमों का पालन अवश्य करें:

  • निराहार या फलाहारी उपवास: माताएं इस दिन सुबह की पूजा से लेकर शाम तक निराहार रहती हैं। यदि स्वास्थ्य ठीक न हो, तो दिन के समय दूध या फलों का सेवन किया जा सकता है।
  • संतान का होना अनिवार्य: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत केवल वही महिलाएं रखती हैं जिन्हें संतान सुख प्राप्त हो चुका है, ताकि उनके बच्चों की रक्षा हो सके।
  • सात्विकता और स्वच्छता: घर में पूरी तरह साफ-सफाई रखें। मन में किसी के प्रति कड़वाहट या गुस्सा न लाएं और बच्चों से बेहद प्यार और धैर्य से पेश आएं।

इस व्रत को करने के अद्भुत लाभ (Benefits)

माताएं जब अपने बच्चों के लिए इस कठिन तप को पूरा करती हैं, तो उन्हें इसके कई दिव्य लाभ मिलते हैं:

  • संतान की दीर्घायु और आरोग्यता: बच्चों को शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और उनकी आयु लंबी होती है।
  • पितृदोष से शांति: इस दिन पितरों के निमित्त दान करने से कुंडली का पितृदोष दूर होता है और घर में खुशहाली आती है।
  • वंश की रक्षा: कुलदेवियों के आशीर्वाद से परिवार का वंश आगे बढ़ता है और बच्चों का करियर उज्ज्वल होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Dont's)

व्रत और पूजा के दौरान किसी भी तरह की भूल से बचने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

क्या करें:

  • पूजा पूरी होने के बाद अपनी संतान को तिलक लगाएं, उन्हें मिठाई खिलाएं और उनका मुंह मीठा कराकर आशीर्वाद दें।
  • इस दिन पितरों की शांति के लिए किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को अन्न, वस्त्र या काले तिल का दान अवश्य करें।
  • दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके पितरों के नाम से जल का अर्घ्य दें।

क्या न करें:

  • घर में कलेश न करें: अमावस्या के दिन घर में वाद-विवाद, झगड़ा या चिल्लाने का माहौल बिल्कुल न बनने दें, इससे लक्ष्मी जी रुष्ट हो जाती हैं।
  • तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित: इस पावन दिन पर पूरे घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का प्रयोग पूरी तरह बंद रखें।
  • पीपल के पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं: इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना शुभ होता है, लेकिन उसकी पत्तियों या टहनियों को तोड़ना वर्जित माना जाता है।

पिठोरी अमावस्या की पौराणिक व्रत कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक धनी परिवार रहता था, जिसमें सात भाई और उनकी पत्नियां रहती थीं। उन सातों बहुओं में से जो सबसे छोटी बहू थी, वह जब भी किसी संतान को जन्म देती, उसका बच्चा जन्म लेते ही कुछ समय बाद दम तोड़ देता था। इस वजह से वह हर समय बेहद दुखी और व्याकुल रहती थी। भाद्रपद मास की अमावस्या के दिन, गांव की सभी महिलाएं पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) का व्रत रखकर आटे की देवियों की पूजा कर रही थीं। छोटी बहू ने भी अपनी संतान की रक्षा के लिए चुपके से यह व्रत रखा और पूरी निष्ठा से 64 देवियों की आराधना की। रात के समय, जब वह सो रही थी, तो साक्षात चौंसठ योगिनियां उसके सपने में आईं और उसकी गोद में सोए हुए मृत बच्चे पर अमृत के छींटे मार दिए।सुबह जब छोटी बहू की आंख खुली, तो उसने देखा कि उसका मृत बच्चा जीवित होकर हंस रहा था और खेल रहा था। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने दौड़कर अपनी सास और परिवार के अन्य सदस्यों को यह चमत्कारी बात बताई। जब गांव की अन्य महिलाओं को इस व्रत के प्रताप का पता चला, तो सभी माताओं के मन में इस पर्व के प्रति श्रद्धा और गहरी हो गई। तभी से संतान की लंबी उम्र के लिए हर साल पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) का व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।

निष्कर्ष (Conclusion)

10 सितंबर को आने वाली यह पिठोरी अमावस्या (Pithori Amavasya 2026) हर माँ के अटूट विश्वास, उसके त्याग और उसकी असीम ममता का जीवंत उत्सव है। आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से जुड़े रहना हमें जीवन में धैर्य और अपनों की सुरक्षा की सीख देता है। आइए, इस साल पूरी श्रद्धा के साथ अपनी कुलदेवियों और माँ दुर्गा की आराधना करें, अपने पितरों का आशीर्वाद लें और अपनी संतान के उज्ज्वल व सुरक्षित भविष्य की कामना करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. साल 2026 में पिठोरी अमावस्या कब है?
    साल 2026 में पिठोरी अमावस्या का पावन व्रत 10 सितंबर, गुरुवार को देश भर में श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा।
  1. पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) के दिन किसकी पूजा की जाती है?
    इस दिन मुख्य रूप से चावल या गेहूं के गूंथे हुए आटे से बनाई गई 64 देवियों और माता दुर्गा की पूजा की जाती है।
  1. क्या इस दिन पितरों के लिए तर्पण करना जरूरी है?
    हाँ, चूंकि यह भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि है, इसलिए इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान या दान-पुण्य करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
  1. पिठोरी अमावस्या को पोला अमावस्या क्यों कहते हैं?
    देश के कुछ हिस्सों में इस दिन खेती-किसानी के मुख्य आधार यानी बैलों और मवेशियों की विशेष पूजा की जाती है, इसलिए इसे 'पोला अमावस्या' भी कहा जाता है।
  1. क्या यह व्रत केवल पुत्र की लंबी आयु के लिए है?
    नहीं, प्राचीन काल में भले ही इसे पुत्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आज के समय में माताएं अपनी सभी संतानों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए यह व्रत पूरी श्रद्धा से रखती हैं।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.