एक माँ का अपनी संतान के प्रति स्नेह इस दुनिया की सबसे खूबसूरत और निश्छल भावना है। बच्चा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, एक माँ के लिए वह हमेशा उसका छोटा सा लाडला ही रहता है। उसकी लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए माताएं हंसते-हंसते दुनिया के सबसे कठिन व्रत रख लेती हैं। अपनी संतान की सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए रखा जाने वाला एक ऐसा ही बेहद पवित्र और लोक-आस्था से जुड़ा महापर्व आने वाला है—पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026),जिसे देश के कुछ हिस्सों में पोला अमावस्या या कुशग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस साल यह पावन व्रत 10 सितंबर 2026 को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। भाद्रपद के महीने में आने वाली यह अमावस्या केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह मातृशक्ति की तपस्या और उनके अटूट विश्वास की मूरत है। इस दिन माताएं साक्षात 64 देवियों की आराधना करती हैं और अपने बच्चों की दीर्घायु का वरदान मांगती हैं।
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सरल और स्पष्ट शब्दों में कहें तो भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) कहा जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में इस अमावस्या का बहुत बड़ा स्थान है। 'पिठोरी' शब्द की उत्पत्ति 'पिठ' यानी आटे से हुई है। इस दिन माताएं चावल या गेहूं के आटे को गूंथकर उससे 64 देवियों की मूर्तियां बनाती हैं और उनकी पारंपरिक रूप से पूजा करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से शादीशुदा महिलाएं अपनी संतान की रक्षा, वंश वृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।
साल में पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) का यह पावन पर्व 10 सितंबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन संतान के कल्याण के लिए की जाने वाली पूजा और पितरों के निमित्त किया जाने वाला तर्पण बहुत फलदायी माना गया है।
पंचांग गणना के अनुसार मुख्य समय और शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
पिठोरी अमावस्या व्रत तारीख: 10 सितंबर 2026, दिन गुरुवारसनातन परंपरा में पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) का बहुत गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन 64 देवियों के साथ-साथ माता दुर्गा की पूजा करने से बच्चों के जीवन पर आने वाले सभी प्रकार के अकाल मृत्यु के योग और गंभीर संकट हमेशा के लिए टल जाते हैं। इसके अलावा, अमावस्या तिथि होने के कारण इस दिन पितृ तर्पण और पिंडदान करने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन जो माताएं उपवास रखकर अपने बच्चों के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देती हैं, उनके बच्चों को जीवन के हर क्षेत्र में अपार सफलता और आरोग्यता मिलती है। यह त्योहार परिवारों को अपनी जड़ों और अपनी कुलदेवियों से जोड़ने का एक अनूठा जरिया है।
पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) की पूजा में आटे की देवियों का विशेष स्थान होता है। आइए जानते हैं इसकी प्रामाणिक पूजा विधि:

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इस कठिन व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने के लिए इन पारंपरिक नियमों का पालन अवश्य करें:
माताएं जब अपने बच्चों के लिए इस कठिन तप को पूरा करती हैं, तो उन्हें इसके कई दिव्य लाभ मिलते हैं:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक धनी परिवार रहता था, जिसमें सात भाई और उनकी पत्नियां रहती थीं। उन सातों बहुओं में से जो सबसे छोटी बहू थी, वह जब भी किसी संतान को जन्म देती, उसका बच्चा जन्म लेते ही कुछ समय बाद दम तोड़ देता था। इस वजह से वह हर समय बेहद दुखी और व्याकुल रहती थी। भाद्रपद मास की अमावस्या के दिन, गांव की सभी महिलाएं पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) का व्रत रखकर आटे की देवियों की पूजा कर रही थीं। छोटी बहू ने भी अपनी संतान की रक्षा के लिए चुपके से यह व्रत रखा और पूरी निष्ठा से 64 देवियों की आराधना की। रात के समय, जब वह सो रही थी, तो साक्षात चौंसठ योगिनियां उसके सपने में आईं और उसकी गोद में सोए हुए मृत बच्चे पर अमृत के छींटे मार दिए।सुबह जब छोटी बहू की आंख खुली, तो उसने देखा कि उसका मृत बच्चा जीवित होकर हंस रहा था और खेल रहा था। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने दौड़कर अपनी सास और परिवार के अन्य सदस्यों को यह चमत्कारी बात बताई। जब गांव की अन्य महिलाओं को इस व्रत के प्रताप का पता चला, तो सभी माताओं के मन में इस पर्व के प्रति श्रद्धा और गहरी हो गई। तभी से संतान की लंबी उम्र के लिए हर साल पिठोरी अमावस्या 2026 (Pithori Amavasya 2026) का व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।
10 सितंबर को आने वाली यह पिठोरी अमावस्या (Pithori Amavasya 2026) हर माँ के अटूट विश्वास, उसके त्याग और उसकी असीम ममता का जीवंत उत्सव है। आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से जुड़े रहना हमें जीवन में धैर्य और अपनों की सुरक्षा की सीख देता है। आइए, इस साल पूरी श्रद्धा के साथ अपनी कुलदेवियों और माँ दुर्गा की आराधना करें, अपने पितरों का आशीर्वाद लें और अपनी संतान के उज्ज्वल व सुरक्षित भविष्य की कामना करें।
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Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.