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June 22, 2026 Blog

Shri Goga Navami 2026 : व्रत कब है? जानें गोगाजी चौहान की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

आस्था, वीरता और सर्पभय से मुक्ति का महापर्व: श्री गोगा नवमी 2026 (A Grand Festival of Faith, Valor, and Deliverance from the Fear of Snakes: Shri Goga Navami 2026)

भाद्रपद का महीना आते ही, राजस्थान की रेतीली धरती से लेकर उत्तर भारत के गांवों और शहरों तक, एक अनोखी गूंज सुनाई देती है—"नीले घोड़े रा असवार, थारी जय-जयकार!” ढोल-नगाड़ों की थाप, हाथों में ऊंचे निशान (ध्वज) थामे भक्तों की टोलियां और जाहरवीर बाबा के भजनों की मधुर तान। यह पावन पर्व है श्री गोगा नवमी। इस साल 5 सितंबर 2026 को गोगाजी महाराज का जन्मोत्सव पूरे देश में बड़े ही भावुक और जीवंत रूप में मनाया जाएगा।

गोगा नवमी 2026 (Goga Navami 2026) केवल एक पारंपरिक व्रत नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे लोक-देवता के प्रति असीम कृतज्ञता का प्रतीक है जिन्होंने गायों की रक्षा और मातृभूमि के सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। भगवान शिव के परम भक्त और नागों के राजाओं से सिद्धियां प्राप्त जाहरवीर गोगाजी महाराज अपने भक्तों को हर विपत्ति और जहरीले जीवों के खतरे से बचाते हैं।

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श्री गोगा नवमी क्या है? (What is Shri Goga Navami?)

भाद्रपद (भादों) मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को सिद्ध वीर गोगाजी महाराज के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसे हम श्री गोगा नवमी 2026 (Goga Navami 2026) कहते हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक अगले दिन आने वाला यह त्योहार लोक-संस्कृति और वैदिक परंपरा का एक अनूठा संगम है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों और थानों (पूजा स्थलों) पर बाबा जाहरवीर और नाग देवताओं की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से परिवार पर आने वाले आकस्मिक संकट दूर हो जाते हैं।

श्री गोगा नवमी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

साल में श्री गोगा नवमी 2026 (Goga Navami 2026) का यह पावन पर्व 5 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह से ही बाबा गोगाजी के मंदिरों में भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो जाएंगी। पंचांग गणना के अनुसार मुख्य समय कुछ इस प्रकार हैं:

श्री गोगा नवमी व्रत तारीख: 5 सितंबर 2026, दिन शुक्रवार
भाद्रपद नवमी तिथि का प्रारंभ: 4 सितंबर 2026 को सायंकाल 06:40 बजे से शुरू
भाद्रपद नवमी तिथि की समाप्ति: 5 सितंबर 2026 को रात 08:15 बजे तक
पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त: 5 सितंबर 2026 को सुबह 06:05 AM से सुबह 09:20 AM तक (इस समय पूजा करना सर्वश्रेष्ठ फलदायी रहेगा)।

इस पावन पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

सनातन परंपरा और भारतीय लोक-संस्कृति में गोगा नवमी का बहुत बड़ा महत्व है। गोगाजी महाराज को नागराज का अवतार और सांपों का रक्षक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में सर्प दोष, राहु या केतु का अशुभ प्रभाव होता है, उनके लिए इस दिन गोगाजी महाराज की शरण में जाना संजीवनी के समान है। आध्यात्मिक रूप से यह पर्व हमें यह सिखाता है कि वीरता, धर्म की रक्षा और जीव-जंतुओं के प्रति दया भाव रखने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद भी जन-जन के दिलों में अमर हो जाता है। राजस्थान के गोगामेड़ी में इस दिन बहुत बड़ा मेला लगता है, जहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदाय के लोग समान रूप से बाबा को शीश नवाते हैं, जो सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल है।

गोगाजी महाराज की चरणबद्ध पूजा विधि (Pooja ritual)

Shri Goga Navami 2026

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गोगा नवमी 2026 (Goga Navami 2026) के दिन घर पर ही बहुत ही सात्विक तरीके से बाबा की पूजा की जा सकती है। आइए जानते हैं इसकी प्रामाणिक पूजा विधि:

  1. स्नान और संकल्प: 5 सितंबर की सुबह 05:30 बजे स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़कें। हाथ में जल लेकर गोगा नवमी व्रत का संकल्प लें।
  1. बाबा और नाग देव की स्थापना: सुबह 06:30 बजे लकड़ी की चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं। उस पर मिट्टी से बने गोगाजी महाराज की मूर्ति स्थापित करें। यदि मूर्ति न हो, तो दीवार पर कोयले या गेरू से घोड़े पर सवार वीर गोगाजी और नाग देव का चित्र बनाएं।
  1. रोली-तिलक और श्रृंगार: सुबह 07:15 बजे गोगाजी महाराज और नाग देवताओं को हल्दी, कुमकुम, अक्षत (चावल) और चंदन का तिलक लगाएं। उन्हें नीले रंग के वस्त्र या कलावा अर्पित करें।
  1. विशेष भोग और महाआरती: सुबह 08:00 बजे बाबा को कच्चे दूध, जल, भुने हुए चने, चूरमा और बाजरे की रोटी का भोग लगाएं। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर गोगाजी की कथा सुनें और आरती करें। अंत में रक्षा के लिए प्रार्थना करें।

गोगा नवमी व्रत के जरूरी नियम (Rules)

इस पावन व्रत को करते समय इन नियमों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है:

  • दूध का दान और अर्पण: इस दिन सांपों के बिल (बांबी) के पास जाकर दूध अर्पित किया जाता है। ध्यान रखें कि घर में इस दिन दूध उबाला नहीं जाता, बल्कि कच्चा दूध ही इस्तेमाल होता है।
  • सात्विक जीवन: व्रत रखने वाले जातक को दिनभर निराहार या फलाहार रहना चाहिए। मन में किसी के प्रति कटु वचन या द्वेष की भावना नहीं लानी चाहिए।
  • अखंड श्रद्धा: बाबा जाहरवीर की पूजा में श्रद्धा सबसे बड़ी पूंजी है। पूजा के समय नीले रंग की चीजों का उपयोग करना बेहद शुभ माना जाता है।

इस व्रत को करने के चमत्कारी लाभ (Benefits)

जो श्रद्धालु इस दिन पूरी निष्ठा से बाबा का पूजन करते हैं, उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

  • सर्प दोष से मुक्ति: कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष या राहु-केतु का कुप्रभाव हमेशा के लिए शांत हो जाता है।
  • संतान की रक्षा: मान्यता है कि गोगाजी महाराज की कृपा से बच्चों की गंभीर बीमारियों और अकाल मृत्यु के संकट से रक्षा होती है।
  • घर में सुख-समृद्धि: जाहरवीर बाबा अपने भक्तों के घर को धन-धान्य से भर देते हैं और नकारात्मक शक्तियों को घर की चौखट से दूर रखते हैं।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Dont's)

उत्सव और पूजा के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

क्या करें:

  • यदि संभव हो तो किसी गौशाला में जाकर गायों की सेवा करें, क्योंकि गोगाजी ने गायों की रक्षा के लिए युद्ध लड़ा था।
  • पूजा के बाद बाबा के नाम का पवित्र धागा (तागा या रक्षा सूत्र) अपने बच्चों की कलाई पर बांधें।
  • "जय बाबा जाहरवीर” महामंत्र का मानसिक जाप करते रहें।

क्या न करें:

  • किसी भी जीव को न सताएं: इस दिन विशेष रूप से किसी सांप या रेंगने वाले जीव को चोट न पहुंचाएं और न ही उन्हें मारें।
  • तामसिक भोजन का प्रयोग वर्जित: पूरे घर में लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा जैसी तामसिक चीजों का प्रवेश पूरी तरह बंद रखें।
  • गंदगी न रखें: पूजा स्थल और घर के मुख्य द्वार के आसपास गंदगी बिल्कुल न रहने दें।

जाहरवीर गोगाजी महाराज की वीर पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक लोक-कथाओं के अनुसार, राजस्थान के ददरेवा राज्य में राजा जेवर सिंह और उनकी पत्नी रानी बाछल राज करते थे। शादी के कई वर्षों बाद भी उन्हें कोई संतान नहीं हुई। रानी बाछल ने संतान प्राप्ति के लिए गुरु गोरखनाथ जी की कठिन तपस्या की। गुरु गोरखनाथ ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें एक दिव्य 'गुगल' नाम का फल प्रसाद के रूप में दिया। रानी बाछल ने उस फल का सेवन किया, जिसके प्रभाव से भाद्रपद मास की नवमी तिथि को एक अत्यंत तेजस्वी बालक का जन्म हुआ। गुगल फल के नाम पर ही बालक का नाम 'गोगाजी' रखा गया। वे बचपन से ही बेहद चमत्कारी और साहसी थे। उन्होंने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली और योग व अस्त्र-शस्त्र की विद्या में निपुण हुए। जब देश पर विदेशी आक्रांताओं ने हमला किया और उनकी प्रिय गायों को चुराने की कोशिश की, तब वीर गोगाजी चौहान ने अपने नीले घोड़े पर सवार होकर वीरता से युद्ध लड़ा और गायों को मुक्त कराया। युद्ध के दौरान उन्होंने अद्भुत पराक्रम दिखाया, जिससे प्रभावित होकर साक्षात नागराज ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति भाद्रपद नवमी को तुम्हारी पूजा करेगा, उसे कभी सर्पदंश का भय नहीं सताएगा। अपनी अद्भुत शक्तियों और लोक-कल्याण के कारण वे 'जाहरवीर बाबा' के नाम से पूजे जाने लगे।

निष्कर्ष (Conclusion)

5 सितंबर को आने वाली यह श्री गोगा नवमी 2026 (Goga Navami 2026) हमारे जीवन में नया साहस, उमंग और सुरक्षा का कवच लेकर आ रही है। जाहरवीर बाबा का जीवन हमें सिखाता है कि धर्म और मातृभूमि की रक्षा करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा कर्तव्य है। आइए, इस साल पूरी श्रद्धा के साथ गोगाजी महाराज का जन्मोत्सव मनाएं, अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें और बाबा से अपनी रक्षा का वरदान मांगें। वीर जाहरवीर बाबा की जय

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. साल में श्री गोगा नवमी 2026 (Goga Navami 2026) कब है?
    साल में श्री गोगा नवमी 2026 (Goga Navami 2026) का पावन त्योहार 5 सितंबर, शुक्रवार को पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा।
  1. गोगाजी महाराज को किसका अवतार माना जाता है?
    धार्मिक और लोक मान्यताओं के अनुसार, वीर गोगाजी महाराज को नागराज का अवतार और भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है।
  1. गोगा नवमी 2026 (Goga Navami 2026) की पूजा में मुख्य भोग क्या चढ़ाया जाता है?
    इस दिन बाबा जाहरवीर को मुख्य रूप से बाजरे की रोटी, चूरमा, भुने हुए चने, कच्चा दूध और जल अर्पित किया जाता है।
  1. क्या गोगा नवमी 2026 (Goga Navami 2026) का व्रत रखने से राहु-केतु शांत होते हैं?
    जी हां, चूंकि गोगाजी सांपों के देवता हैं, इसलिए इस दिन व्रत और पूजन करने से कुंडली के राहु-केतु और कालसर्प दोष के बुरे प्रभाव पूरी तरह शांत हो जाते हैं।
  1. जाहरवीर बाबा का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?
    बाबा जाहरवीर का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के 'गोगामेड़ी' नामक स्थान पर स्थित है, जहाँ भाद्रपद के महीने में बहुत बड़ा मेला लगता है।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.