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June 12, 2026 Blog

Randhan Chhath 2026 : शीतला सातम से पहले क्यों मनाते हैं यह पर्व? जानें महत्व, नियम और पारंपरिक विधि

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

रांधण छठ 2026 का पावन संदेश: चूल्हे की शांति और माँ का आशीर्वाद (The Sacred Message of Randhan Chhath 2026: The Peace of the Hearth and a Mother's Blessing)

हमारी भारतीय संस्कृति में रसोइघर को सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि माँ अन्नपूर्णा का मंदिर माना गया है। घर की सुख-समृद्धि और परिवार की सेहत का रास्ता इसी रसोई से होकर गुजरता है। बदलते मौसम के साथ जब हमारे शरीर और खान-पान में बदलाव की जरूरत होती है, तब हमारे पूर्वजों ने उसे त्योहारों के रूप में पिरो दिया। एक ऐसा ही अनोखा, आत्मीय और श्रद्धा से भरा त्योहार आ रहा है—रांधण छठ 2026 (Randhan Chhath 2026)। मुख्य रूप से गुजरात और पश्चिमी भारत में मनाया जाने वाला यह पर्व इस साल 2 सितंबर 2026 को आ रहा है।

रांधण छठ 2026 (Randhan Chhath 2026) का नाम सुनते ही घरों में एक अलग चहल-पहल शुरू हो जाती है। यह त्योहार माँ शीतला के आगमन की तैयारी का प्रतीक है। इस दिन माताएं अपने पूरे परिवार की अच्छी सेहत और बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए एक दिन पहले ही तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाती हैं। आइए इस लेख के जरिए जानते हैं कि यह खूबसूरत परंपरा क्या है, इस व्रत का क्या महत्व है और इसे घर पर कैसे मनाया जाता है।

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रांधण छठ व्रत क्या है? (What is the Randhan Chhath fast?)

सरल शब्दों में समझें तो 'रांधण' शब्द का गुजराती भाषा में अर्थ होता है—'भोजन पकाना'। रांधण छठ, शीतला सातम से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य नियम यह है कि घर की महिलाएं पूरे दिन में रात तक अगले दिन यानी सातम के लिए सारा भोजन पकाकर तैयार कर लेती हैं। इसके बाद रात को चूल्हे या गैस को अच्छी तरह साफ करके शांत कर दिया जाता है। अगले पूरे दिन घर में चूल्हा नहीं जलता और हर कोई ठंडा (बासी) भोजन ही ग्रहण करता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जिस अग्नि देव पर हम रोज भोजन पकाते हैं, उन्हें भी आराम और सम्मान देने की आवश्यकता है।

रांधण छठ 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and Time)

साल में रांधण छठ  (Randhan Chhath 2026) का यह पारंपरिक पर्व 2 सितंबर, बुधवार को पूरे उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 3 सितंबर को शीतला सातम मनाई जाएगी।

इस पर्व की सही तिथियां और समय कुछ इस प्रकार हैं:

रांधण छठ तारीख: 2 सितंबर 2026, दिन बुधवार
षष्ठी तिथि का प्रारंभ: 1 सितंबर 2026 को दोपहर 02:10 बजे से शुरू
षष्ठी तिथि की समाप्ति: 2 सितंबर 2026 को दोपहर 03:40 बजे तक
विशेष पकवान बनाने का समय: 2 सितंबर को पूरे दिन और रात को चूल्हा शांत करने से पहले तक।

इस अनोखे पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Religious and spiritual significance)

सनातन संस्कृति में रांधण छठ का बहुत गहरा वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व है। भाद्रपद मास के इस समय में ऋतु परिवर्तन हो रहा होता है, जिससे संक्रामक बीमारियां (जैसे चेचक, खसरा या पेट के रोग) फैलने का खतरा बढ़ जाता है। माँ शीतला को शीतलता और आरोग्यता की देवी माना गया है।

मान्यता है कि रांधण छठ 2026 (Randhan Chhath 2026) की रात को जब चूल्हा पूरी तरह ठंडा हो जाता है, तब माँ शीतला हर घर की रसोई में आकर विश्राम करती हैं। चूल्हे की पवित्र राख में लोटकर वे प्रसन्न होती हैं और घर के बच्चों को निरोगी रहने का आशीर्वाद देती हैं। यदि कोई इस दिन चूल्हा जलाकर गर्मी पैदा करता है, तो माँ शीतला का कोप झेलना पड़ सकता है।

रांधण छठ की पारंपरिक विधि (Traditional Method of Randhan Chhath)

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इस त्योहार को मनाने का तरीका बेहद आत्मीय और सामूहिक होता है। आइए जानते हैं इसकी चरणबद्ध पूजा विधि:

रसोई की सफाई और पकवानों की शुरुआत:2 सितंबर की सुबह।

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और अपनी रसोई को पूरी तरह साफ करें। इसके बाद अगले दिन के लिए भोजन पकाने की तैयारी शुरू करें। इस दिन तरह-तरह की पारंपरिक मिठाइयां, थेपला, पूरी, बिशप वीड (अजवाइन) की पूरियां, सब्जियां और बाजरे की रोटी बनाई जाती है।

भोजन का संचय:दोपहर से शाम तक।

महिलाएं आपस में मिलकर गीत गाते हुए तरह-तरह के ऐसे व्यंजन बनाती हैं जो अगले दिन तक खराब न हों। सभी व्यंजनों को ढककर सुरक्षित रख दिया जाता है ताकि अगले दिन ठंडे भोग के रूप में इनका उपयोग हो सके।

चूल्हे की विदाई और शांति:रात के समय।

रात का खाना खाने के बाद चूल्हे या गैस स्टोव को अच्छी तरह से साफ किया जाता है। इसके बाद चूल्हे को पूरी तरह से ठंडा करके उस पर दूध या पानी के छींटे मारे जाते हैं।

पूजा और माँ शीतला का आह्वान:देर रात।

चूल्हे के ठंडे होने के बाद उस पर चंदन, कुमकुम का तिलक लगाया जाता है और महुआ या पलाश के पत्ते रखकर धूप दिखाई जाती है। माँ शीतला से प्रार्थना की जाती है कि वे आएं और रसोई में विश्राम कर परिवार को खुशहाली दें।

व्रत और त्योहार के जरूरी नियम (Fasting rules)

रांधण छठ 2026 (Randhan Chhath 2026) और उसके अगले दिन कुछ कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है:

  • चूल्हा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध: रांधण छठ की रात को चूल्हा शांत होने के बाद, अगले दिन (शीतला सातम) की रात तक घर में चूल्हा नहीं जलता और हर कोई ठंडा (बासी) भोजन ही ग्रहण करता है।
  • ताजे भोजन का निषेध: इस दिन केवल वही भोजन खाया जाता है जो रांधण छठ के दिन पकाया गया हो। चाय या दूध गर्म करने की भी मनाही होती है।
  • पवित्रता का ध्यान: जो भोजन पकाया जा रहा है, उसमें शुद्ध घी और सात्विक सामग्रियों का ही उपयोग होना चाहिए।

रांधण छठ और माँ शीतला की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार एक गांव में सास और बहू रहती थीं। रांधण छठ 2026 (Randhan Chhath 2026) के दिन बहू देर रात तक रसोई में तरह-तरह के पकवान बनाती रही। काम खत्म करने के बाद उसने थककर चूल्हा तो साफ किया, लेकिन काम की जल्दी में वह चूल्हे को पानी छिड़ककर पूरी तरह ठंडा करना भूल गई और सो गई।

मध्यरात्रि में जब माँ शीतला उस गांव में आईं और विश्राम करने के लिए उस घर की रसोई में पहुंचीं, तो जैसे ही वे चूल्हे की राख में लेटीं, उनका पूरा शरीर गर्म चूल्हे के कारण जल गया। माँ शीतला क्रोधित हो गईं और उन्होंने श्राप दे दिया कि जैसा मेरा शरीर जला है, वैसा ही तुम्हारी कोख भी जल जाए। सुबह उठकर जब बहू ने देखा तो उसका इकलौता बेटा मृत पड़ा था। वह रोती-बिलखती अपनी सास के पास गई। सास ने कहा कि तुमने रांधण छठ के नियमों का पालन नहीं किया, यह माँ शीतला का प्रकोप है।

बहू अपने मृत बच्चे को टोकरी में लेकर जंगलों की तरफ भागी। रास्ते में उसे एक बूढ़ी औरत मिली जो अपने सिर की जुओं से बहुत परेशान थी। बहू ने ममतावश उस बूढ़ी औरत के सिर को साफ किया और उसे बहुत शीतलता पहुंचाई। वह बूढ़ी औरत कोई और नहीं स्वयं माँ शीतला थीं। उन्होंने प्रसन्न होकर कहा, “तुम्हारी ममता देखकर मेरा मन शीतल हो गया, तुम्हारी गोद हमेशा भरी रहे।” जैसे ही उन्होंने यह कहा, बहू का मरा हुआ बेटा जीवित होकर हंसने लगा। बहू को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने गांव आकर सभी को रांधण छठ पर चूल्हा पूरी तरह ठंडा करने के नियम के बारे में बताया।

निष्कर्ष (Conclusion)

2 सितंबर को आने वाला यह रांधण छठ 2026 (Randhan Chhath 2026) का पर्व हमें हमारी जड़ों की ओर ले जाता है। यह त्योहार सिखाता है कि हर उस साधन के प्रति आदर भाव रखना चाहिए जो हमारे जीवन को चलाता है। इस डिजिटल युग में भी ऐसी खूबसूरत परंपराएं हमारे परिवारों को एक सूत्र में बांधकर रखती हैं। आइए, इस साल पूरी श्रद्धा के साथ रांधण छठ मनाएं, माँ शीतला का स्वागत करें और अपने परिवार के लिए उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मांगें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)


  1. साल 2026 में रांधण छठ कब है?
    साल 2026 में रांधण छठ का त्योहार 2 सितंबर, बुधवार को मनाया जाएगा और इसके अगले दिन 3 सितंबर को शीतला सातम मनाई जाएगी।

  1. रांधण छठ 2026 (Randhan Chhath 2026) का क्या मतलब होता है?
    'रांधण' का अर्थ होता है भोजन पकाना। इस दिन शीतला सातम के लिए पूरे दिन का भोजन एक साथ पहले ही पका लिया जाता है, इसलिए इसे रांधण छठ कहते हैं।

  1. क्या रांधण छठ के अगले दिन चाय पी सकते हैं?
    परंपरा के अनुसार, अगले दिन चूल्हा जलाना पूरी तरह वर्जित होता है, इसलिए गरम चाय नहीं बनाई जाती। लोग पहले से बनी ठंडी चाय या दूध-दही का सेवन करते हैं।

  1. रांधण छठ के दिन कौन से मुख्य पकवान बनाए जाते हैं?
    इस दिन मुख्य रूप से थेपला, बाजरे की रोटी, पूरी, पकोड़े, हलवा और ऐसी सब्जियां बनाई जाती हैं जो अगले दिन ठंडी होने पर भी खराब न हों।

  1. रांधण छठ का व्रत कौन रख सकता है?
    यह व्रत मुख्य रूप से घर की माताएं और महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.