भादो का महीना हो, आसमान में काले बादलों की घटा छाई हो और मन में अपनों के लिए ढेर सारा प्यार हो, तो समझ लीजिए कि 'कजरी तीज' का समय आ गया है। हरियाली तीज की चंचलता के बाद जब प्रकृति थोड़ी और गंभीर और सलोनी हो जाती है, तब सुहागिनों के आंगन में कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026)की रौनक बिखरती है। इसे कहीं 'सातुड़ी तीज' कहा जाता है तो कहीं 'बड़ी तीज'।
यह त्योहार केवल व्रत-उपवास तक सीमित नहीं है, यह तो एक उत्सव है—हाथों में रची पिया के नाम की गहरी मेहंदी का, घेवर और सत्तू की मिठास का, और उस नीमड़ी माता की कहानी का जो पीढ़ियों से हमारी दादी-नानी सुनाती आई हैं। साल में कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026)का यह पावन अवसर अगस्त के अंत में आ रहा है। आइए, इस लेख के जरिए इस खूबसूरत और भक्तिमय उत्सव की दुनिया में कदम रखते हैं।
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हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) मनाई जाती है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में यह त्योहार बड़े ही चाव से मनाया जाता है। 'कजरी' शब्द का सीधा संबंध 'काली घटाओं' या 'कजली' से है, जो मानसून के इस मौसम की पहचान है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा और सुयोग्य वर पाने की कामना के साथ नीमड़ी माता की शरण में जाती हैं।
कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) का महत्व केवल लोक परंपराओं तक सीमित नहीं है, इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक संदेश भी है:

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कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) की पूजा विधि थोड़ी अलग और बहुत ही दिलचस्प होती है। इसे आप घर पर इस तरह संपन्न कर सकती हैं:
लाभ
क्या करें:
क्या न करें:
एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण का परिवार था। उसकी पत्नी ने कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) का व्रत रखा और ब्राह्मण से पूजा के लिए सत्तू लाने को कहा। ब्राह्मण के पास धन नहीं था, तो वह रात को एक साहूकार की दुकान में घुस गया और वहां से चने का सत्तू, घी और चीनी चुरा ली।
जब वह बाहर निकलने लगा, तो नौकरों ने उसे पकड़ लिया। साहूकार ने जब उससे चोरी का कारण पूछा, तो ब्राह्मण ने रोते हुए बताया कि उसकी पत्नी ने व्रत रखा है और पूजा के लिए घर में कुछ नहीं था। साहूकार का दिल पसीज गया। उसने ब्राह्मण को अपना धर्म भाई बनाया और उसकी पत्नी के लिए ढेर सारी पूजा की सामग्री और सत्तू भेंट किया। तभी से नीमड़ी माता की कृपा और सत्तू का महत्व इस त्योहार से जुड़ गया।
कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) हमें सिखाती है कि श्रद्धा और विश्वास में बहुत ताकत होती है। एक साधारण सी नीम की टहनी भी अगर सच्चे मन से पूजी जाए, तो वह 'नीमड़ी माता' बनकर पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करती है। 31 अगस्त को जब आप अपना व्रत खोलें, तो अपने मन में भी वह मिठास और शीतलता भर लें जो चंद्रमा और सत्तू हमें देते हैं।
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कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) का पावन व्रत 31 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा।
हरियाली तीज सावन में आती है और प्रकृति के उल्लास का प्रतीक है। कजरी तीज भादों में आती है, जिसमें नीमड़ी माता और सत्तू का विशेष महत्व होता है। इसे 'बड़ी तीज' भी कहते हैं।
नीमड़ी माता को शीतलता और आरोग्य की देवी माना जाता है। उनकी पूजा से वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
बिल्कुल, कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए कजरी तीज का व्र माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.