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May 25, 2026 Blog

Kajari Teej 2026: कजरी तीज कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नीमड़ी माता की पूजा का विशेष महत्व

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

कजरी तीज 2026: नीमड़ी माता की भक्ति और अटूट सुहाग का पर्व (Kajari Teej 2026: A festival of devotion to Neemdi Mata and unbreakable marital bliss)

भादो का महीना हो, आसमान में काले बादलों की घटा छाई हो और मन में अपनों के लिए ढेर सारा प्यार हो, तो समझ लीजिए कि 'कजरी तीज' का समय आ गया है। हरियाली तीज की चंचलता के बाद जब प्रकृति थोड़ी और गंभीर और सलोनी हो जाती है, तब सुहागिनों के आंगन में कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026)की रौनक बिखरती है। इसे कहीं 'सातुड़ी तीज' कहा जाता है तो कहीं 'बड़ी तीज'।

यह त्योहार केवल व्रत-उपवास तक सीमित नहीं है, यह तो एक उत्सव है—हाथों में रची पिया के नाम की गहरी मेहंदी का, घेवर और सत्तू की मिठास का, और उस नीमड़ी माता की कहानी का जो पीढ़ियों से हमारी दादी-नानी सुनाती आई हैं। साल में कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026)का यह पावन अवसर अगस्त के अंत में आ रहा है। आइए, इस लेख के जरिए इस खूबसूरत और भक्तिमय उत्सव की दुनिया में कदम रखते हैं।

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कजरी तीज क्या है? (What is Kajari Teej?)

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) मनाई जाती है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में यह त्योहार बड़े ही चाव से मनाया जाता है। 'कजरी' शब्द का सीधा संबंध 'काली घटाओं' या 'कजली' से है, जो मानसून के इस मौसम की पहचान है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा और सुयोग्य वर पाने की कामना के साथ नीमड़ी माता की शरण में जाती हैं।

कजरी तीज 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Kajari Teej 2026: Date and Auspicious Time)

साल में कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) का व्रत अगस्त के आखिरी दिन पड़ रहा है, जो इसे और भी मंगलमय बनाता है।
व्रत की तिथि: 31 अगस्त 2026, सोमवार
तृतीया तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2026, रात 09:15 बजे से
तृतीया तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2026, रात 08:30 बजे तक
पूजा का शुभ समय: सुबह 07:35 बजे से 09:10 बजे तक और शाम को 06:20 बजे से रात 08:40 बजे तक।


धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Religious and spiritual significance)

कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) का महत्व केवल लोक परंपराओं तक सीमित नहीं है, इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक संदेश भी है:

  • शक्ति और शिव का मिलन: माना जाता है कि माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए जो कठोर तपस्या की थी, कजरी तीज उसी अटूट संकल्प का प्रतीक है।
  • प्रकृति और नारी: नीम के पेड़ की पूजा करना हमें सिखाता है कि हमारा जीवन प्रकृति से जुड़ा है। नीम की कड़वाहट जिस तरह बीमारियों को दूर करती है, वैसे ही यह व्रत जीवन के कष्टों को दूर कर खुशहाली लाता है।
  • चंद्र दर्शन की महिमा: इस व्रत में रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है, जो मन की शांति और शीतलता का प्रतीक है।

विस्तृत पूजा विधि (elaborate puja ritual)

kajari teej 2026

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कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) की पूजा विधि थोड़ी अलग और बहुत ही दिलचस्प होती है। इसे आप घर पर इस तरह संपन्न कर सकती हैं:

  • नीमड़ी माता की स्थापना: घर के आंगन या एक साफ दीवार के पास मिट्टी से एक छोटा तालाब बनाएं। उसके किनारे नीम की एक टहनी रोपें। इसे ही 'नीमड़ी माता' कहा जाता है।
  • सजावट: तालाब के किनारे घी का दीपक रखें। तालाब के पानी में थोड़ा कच्चा दूध और जल डालें।
  • श्रृंगार: नीमड़ी माता को लाल चुनरी ओढ़ाएं, मेहंदी, रोली, अक्षत और मोली अर्पित करें। माता को सिंदूर चढ़ाएं।
  • प्रतिबिंब देखना: तालाब के भरे हुए पानी में अपने आभूषणों, दीपक और खुद का प्रतिबिंब देखना बहुत शुभ माना जाता है। यह सौभाग्य की वृद्धि का प्रतीक है।
  • नैवेद्य: माता को सत्तू, फल और मालपुआ का भोग लगाएं। सत्तू के लड्डू पर चांदी का वर्क लगाकर उसे सजाया जाता है।
  • कथा और आरती: सखियों के साथ मिलकर कजरी तीज की कथा सुनें और नीमड़ी माता की आरती करें।
  • चंद्र अर्घ्य: रात को जब चंद्रमा के दर्शन हों, तो उन्हें जल और कच्चे दूध से अर्घ्य दें और अपने पति के हाथों से जल पीकर व्रत का पारण करें।

व्रत के नियम (fasting rules)

  • यह व्रत मुख्य रूप से निर्जला रखा जाता है, लेकिन यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो फलाहार लिया जा सकता है।
  • इस दिन सत्तू का विशेष महत्व है। चने, चावल या गेहूं के सत्तू में घी और चीनी मिलाकर लड्डू बनाए जाते हैं।
  • सुहागिन महिलाओं को पूरा श्रृंगार करना चाहिए और हाथों में मेहंदी जरूर लगानी चाहिए।

लाभ

  • वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है।
  • घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।
  • कुंवारी कन्याओं को भगवान शिव जैसा धैर्यवान और सुयोग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)

क्या करें:

  • नीमड़ी माता की पूजा के साथ-साथ शिव-पार्वती का ध्यान अवश्य करें।
  • सत्तू का दान गरीबों या ब्राह्मणों को जरूर दें।
  • घर के बड़ों और सास का आशीर्वाद लें और उन्हें 'बायना' भेंट करें।


क्या न करें:

  • भोजन का त्याग: चंद्र दर्शन से पहले अन्न और जल ग्रहण न करें।
  • क्रोध और कलह: व्रत के दिन किसी से झगड़ा न करें और न ही किसी की बुराई करें।
  • रंगों का चुनाव: इस शुभ दिन पर काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र न पहनें। लाल, पीला या हरा रंग सर्वोत्तम है।


कजरी तीज 2026 की पौराणिक कथा (Story)

एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण का परिवार था। उसकी पत्नी ने कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) का व्रत रखा और ब्राह्मण से पूजा के लिए सत्तू लाने को कहा। ब्राह्मण के पास धन नहीं था, तो वह रात को एक साहूकार की दुकान में घुस गया और वहां से चने का सत्तू, घी और चीनी चुरा ली।

जब वह बाहर निकलने लगा, तो नौकरों ने उसे पकड़ लिया। साहूकार ने जब उससे चोरी का कारण पूछा, तो ब्राह्मण ने रोते हुए बताया कि उसकी पत्नी ने व्रत रखा है और पूजा के लिए घर में कुछ नहीं था। साहूकार का दिल पसीज गया। उसने ब्राह्मण को अपना धर्म भाई बनाया और उसकी पत्नी के लिए ढेर सारी पूजा की सामग्री और सत्तू भेंट किया। तभी से नीमड़ी माता की कृपा और सत्तू का महत्व इस त्योहार से जुड़ गया।


निष्कर्ष (Conclusion)

कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) हमें सिखाती है कि श्रद्धा और विश्वास में बहुत ताकत होती है। एक साधारण सी नीम की टहनी भी अगर सच्चे मन से पूजी जाए, तो वह 'नीमड़ी माता' बनकर पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करती है। 31 अगस्त को जब आप अपना व्रत खोलें, तो अपने मन में भी वह मिठास और शीतलता भर लें जो चंद्रमा और सत्तू हमें देते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) में कब है?

      कजरी तीज 2026 (Kajari Teej 2026) का पावन व्रत 31 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा।

  1. कजरी तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर है?

      हरियाली तीज सावन में आती है और प्रकृति के उल्लास का प्रतीक है। कजरी तीज भादों में आती है, जिसमें नीमड़ी माता और सत्तू का विशेष महत्व            होता है। इसे 'बड़ी तीज' भी कहते हैं।

  1. क्या इस व्रत में सत्तू खाना जरूरी है?

    जी हाँ, कजरी तीज को 'सातुड़ी तीज' भी कहते हैं क्योंकि इस दिन सत्तू का ही प्रसाद चढ़ाया और पारण में खाया जाता है।

  2. नीमड़ी माता की पूजा क्यों की जाती है?

      नीमड़ी माता को शीतलता और आरोग्य की देवी माना जाता है। उनकी पूजा से वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

  1. क्या कुंवारी लड़कियां यह व्रत रख सकती हैं?

      बिल्कुल, कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए कजरी तीज का व्र माना जाता है।






Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.