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May 21, 2026 Blog

Varalakshmi Vrat 2026: वरलक्ष्मी व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सुख-समृद्धि पाने के अचूक उपाय

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

वरलक्ष्मी व्रत 2026: घर आएगी खुशहाली और बरसेगी माँ लक्ष्मी की कृपा (Varalakshmi Vrat 2026: Bringing prosperity and blessings of Goddess Lakshmi to your home)

एक माँ का अपने परिवार के लिए त्याग और समर्पण शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वह चाहती है कि उसके बच्चे स्वस्थ रहें, पति की उन्नति हो और घर का कोना-कोना खुशियों से महकता रहे। भारतीय संस्कृति में महिलाओं के इसी निस्वार्थ भाव को सम्मान देने और उनके घर को धन-धान्य से भरने का एक विशेष पर्व है— 'वरलक्ष्मी व्रत'।

कहते हैं कि जब हम सच्चे मन से लक्ष्मी माँ को पुकारते हैं, तो वह केवल धन ही नहीं, बल्कि 'वर' (आशीर्वाद) के रूप में शांति और सुरक्षा भी देती हैं। साल में वरलक्ष्मी व्रत 2026 (Varalakshmi Vrat 2026) का यह पावन अवसर अगस्त के आखिरी शुक्रवार को आ रहा है। यह दिन उन सभी के लिए खास है जो अपने जीवन में स्थिरता और वैभव की कामना करते हैं। आइए, इस दिव्य व्रत की यात्रा पर चलते हैं।

वरलक्ष्मी व्रत क्या है? (What is Varalakshmi Vrat?)

वरलक्ष्मी व्रत 2026 (Varalakshmi Vrat 2026) मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों में बेहद लोकप्रिय है, लेकिन अब इसकी महिमा पूरे भारत में फैल चुकी है। 'वर' का अर्थ है वरदान और 'लक्ष्मी' का अर्थ है धन-संपत्ति की देवी। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाने वाला यह व्रत देवी लक्ष्मी के एक विशेष स्वरूप को समर्पित है, जो अष्टलक्ष्मी के बराबर फल देता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने परिवार के कल्याण के लिए रखती हैं।

वरलक्ष्मी व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and Time)

varalakshmi vrat 2026

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साल में वरलक्ष्मी व्रत 2026 (Varalakshmi Vrat 2026) ,28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। चूँकि शुक्रवार लक्ष्मी जी का प्रिय दिन है, इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है।

व्रत की तिथि: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार
श्रावण शुक्ल पक्ष चतुर्दशी/पूर्णिमा का संयोग
पूजा के लिए शुभ लग्न:
सिंह लग्न (सुबह): 06:12 AM से 08:25 AM तक
वृश्चिक लग्न (दोपहर): 01:00 PM से 03:18 PM तक
कुंभ लग्न (शाम): 07:05 PM से 08:35 PM तक

नोट: वरलक्ष्मी पूजा में 'लग्न' का बड़ा महत्व होता है। शाम का समय (प्रदोष काल) पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Religious and spiritual significance)

वरलक्ष्मी व्रत 2026 (Varalakshmi Vrat 2026) को करना 'दिवाली' की पूजा के समान फलदायी माना गया है।
अष्टलक्ष्मी का आशीर्वाद: माना जाता है कि इस एक व्रत को करने से ज्ञान, धन, अनाज, संतान, भाग्य, शांति, शक्ति और विजय—इन आठों शक्तियों की प्राप्ति होती है।
परिवार की सुरक्षा: यह व्रत केवल व्यक्तिगत सुख के लिए नहीं, बल्कि पूरे कुल की रक्षा के लिए किया जाता है।
शुक्र ग्रह की मजबूती: ज्योतिष के अनुसार, इस दिन लक्ष्मी पूजन से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है, जिससे भौतिक सुख-सुविधाएं बढ़ती हैं।

विस्तृत पूजा विधि (Pooja Rituals)

वरलक्ष्मी व्रत 2026 (Varalakshmi Vrat 2026) पूजा में 'कलश स्थापना' सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे आप इस तरह संपन्न कर सकते हैं:
तैयारी: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या सुनहरे रंग के वस्त्र पहनें। घर की सफाई करें और प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं।
चौकी और कलश: एक लकड़ी की चौकी पर नया रेशमी कपड़ा बिछाएं। उस पर थोड़े अक्षत फैलाएं। एक तांबे या चांदी के कलश पर चंदन और कुमकुम से तिलक लगाएं।
कलश की सजावट: कलश के अंदर जल, अक्षत, सिक्का, सुपारी और आम के पत्ते रखें। कलश के मुख पर एक नारियल रखें जिस पर माँ लक्ष्मी का मुखौटा या श्रृंगार किया गया हो।
माँ का आह्वान: देवी वरलक्ष्मी का ध्यान करें और उन्हें आसन ग्रहण करने की प्रार्थना करें।
पूजा सामग्री: माँ को ताजे फूल, श्रृंगार का सामान, मिठाई और फल अर्पित करें।
रक्षा सूत्र: पूजा के बाद एक धागा जिसमें नौ गांठें हों, उसे अपनी कलाई पर बांधें। यह माँ के संरक्षण का प्रतीक है।
आरती: लक्ष्मी जी की आरती गाएं और अंत में प्रसाद वितरण करें।

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व्रत के नियम (Rules of fasting)

  • यह व्रत पूर्णतः सात्विक होना चाहिए। मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें।
  • निर्जला या फलाहारी व्रत रखा जा सकता है। शाम की पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
  • घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें क्योंकि लक्ष्मी जी स्वच्छ स्थान पर ही निवास करती हैं।
  • शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जरूर जलाएं।

क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)

क्या करें:

  • सुहागिन महिलाओं को घर बुलाकर उन्हें फल, मिठाई और सुहाग सामग्री दान करें।
  • लक्ष्मी सहस्रनाम या महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करें।
  • पूजा में कमल के फूल का प्रयोग अवश्य करें।
  • गाय को रोटी या चारा खिलाएं।

क्या न करें:

  • इस दिन घर में कोई भी मांसाहारी भोजन या नशीली वस्तु न लाएं।
  • किसी भी महिला का अपमान न करें, चाहे वह घर की हो या बाहर की।
  • व्रत के दौरान दोपहर में सोने से बचें।
  • उधार का लेन-देन इस दिन टालना बेहतर होता है।

पौराणिक व्रत कथा (Story)

एक पौराणिक कथा के अनुसार, वरलक्ष्मी व्रत  2026 (Varalakshmi Vrat 2026) मगध देश में 'चारुमती' नामक एक अत्यंत गुणी और पतिव्रता स्त्री रहती थी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी लक्ष्मी ने उसके सपने में आकर उसे 'वरलक्ष्मी व्रत' करने का आदेश दिया। चारुमती ने श्रावण मास के शुक्रवार को अपनी सखियों के साथ विधि-विधान से यह व्रत किया।

जैसे ही पूजा संपन्न हुई, चारुमती और उसकी सखियों के शरीर सोने के आभूषणों से सज गए और उनके घर धन-धान्य से भर गए। इस चमत्कार को देखकर नगर की अन्य महिलाओं ने भी यह व्रत शुरू किया। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा कभी खाली नहीं जाती।

लाभ

  • आर्थिक तंगी दूर होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
  • संतान प्राप्ति के इच्छुक दंपत्तियों के लिए यह व्रत वरदान साबित होता है।
  • वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और पति-पत्नी के बीच तालमेल बढ़ता है।
  • घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

वरलक्ष्मी व्रत 2026 (Varalakshmi Vrat 2026) हमें याद दिलाता है कि लक्ष्मी केवल तिजोरी में बंद धन का नाम नहीं है, बल्कि वह हमारे घर की शांति, बच्चों की मुस्कान और बड़ों के आशीर्वाद में भी बसती है। 28 अगस्त को जब आप माँ लक्ष्मी का आह्वान करें, तो उनसे केवल धन न मांगें, बल्कि वह 'वर' मांगें जिससे आपका पूरा परिवार प्रेम के धागे में बंधा रहे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. वरलक्ष्मी व्रत 2026 (Varalakshmi Vrat 2026) में कब है?
यह व्रत 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।


2. क्या अविवाहित लड़कियां यह व्रत रख सकती हैं?
हाँ, कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी और उज्ज्वल भविष्य के लिए यह व्रत रख सकती हैं।


3. वरलक्ष्मी पूजा में कलश का क्या महत्व है?
कलश को साक्षात देवी का स्वरूप माना जाता है। इसमें जल और औषधियाँ ब्रह्मांड की शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।


4. क्या इस व्रत में नमक खा सकते हैं?
आमतौर पर व्रत में सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है, लेकिन कई लोग रात की पूजा के बाद ही भोजन करते हैं।


5. अगर शुक्रवार को पीरियड्स हों तो व्रत कैसे करें?
ऐसी स्थिति में आप मानसिक व्रत रख सकती हैं, लेकिन मूर्ति स्पर्श या पूजा न करें। आप अगले शुक्रवार या अगले वर्ष यह व्रत विधिपूर्वक कर सकती हैं।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.