Kamada Ekadashi 2026: कामदा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ मानी जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे वर्ष की पहली एकादशी के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से मन की इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। यह दिन आत्मशुद्धि, संयम और सच्ची भक्ति का संदेश देता है। वर्ष 2026 में कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi 2026) भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का एक सुंदर अवसर लेकर आ रही है।
कामदा एकादशी को वर्ष की पहली एकादशी माना जाता है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। यह दिन आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक है।
इस दिन व्यक्ति अपने मन, शरीर और आत्मा को पवित्र करने का प्रयास करता है। यह व्रत हमें सिखाता है कि जीवन में संयम और धैर्य कितना जरूरी है। भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और शांति आती है।
कामदा एकादशी (kamada ekadashi)हमें यह भी याद दिलाती है कि गलती होने पर पश्चाताप और सुधार का मार्ग हमेशा खुला रहता है।
एकादशी तिथि समाप्त: 29 मार्च 2026, रविवार को सुबह 07:46 बजे।
पारण (व्रत खोलने) का समय: 20 मार्च 2026 को सुबह 06:25 से 08:55 बजे तक।
ध्यान रखें: पारण हमेशा द्वादशी तिथि में ही करना चाहिए।
शुभ मुहूर्त:
प्रातः चर मुहूर्त: 07:13 AM – 08:46 AM
लाभ मुहूर्त: 08:46 AM – 10:18 AM
अमृत मुहूर्त: 10:18 AM – 11:50 PM

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भगवान विष्णु को समर्पित कामदा एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक किया जाए तो विशेष फलदायी माना जाता है। यह व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति और पापों से मुक्ति देने वाला बताया गया है। नीचे इसकी सरल और सहज विधि दी जा रही है:
इस प्रकार श्रद्धा, संयम और सच्चे मन से किया गया कामदा एकादशी व्रत आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
प्राचीन काल की बात है। धर्मराज युधिष्ठिर ने एक दिन भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या महत्व है। तब श्रीकृष्ण ने कहा, “हे धर्मराज! इस एकादशी की महिमा स्वयं महर्षि वशिष्ठ ने पहले राजा दिलीप को सुनाई थी। वही पवित्र कथा आज मैं तुम्हें सुनाता हूँ।”
बहुत समय पहले भोगीपुर नाम का एक समृद्ध और वैभवशाली नगर था। वहां पुंडरीक नाम के राजा का शासन था। नगर इतना सुंदर था कि अप्सराएँ, किन्नर और गंधर्व भी वहाँ निवास करते थे। उन्हीं में ललिता नाम की अत्यंत रूपवती अप्सरा और उसके पति ललित नामक गंधर्व रहते थे। दोनों एक-दूसरे से गहरा प्रेम करते थे और क्षणभर का वियोग भी सहन नहीं कर पाते थे।
एक दिन राजा पुंडरीक के दरबार में गंधर्वों का संगीत कार्यक्रम चल रहा था। ललित भी मधुर स्वर में गान कर रहा था, लेकिन गाते-गाते उसका मन अपनी प्रिय पत्नी की स्मृति में खो गया। ध्यान भटकने से उसका स्वर बिगड़ गया। सभा में उपस्थित कर्कोटक नामक नाग ने यह बात तुरंत राजा को बता दी। राजा पुंडरीक को यह अपमानजनक लगा और क्रोध में आकर उन्होंने ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया।
श्राप मिलते ही ललित का रूप बदल गया और वह एक भयावह राक्षस बन गया। वह वन-वन भटकने लगा और कष्ट भोगने लगा। जब ललिता को यह ज्ञात हुआ, तो उसका हृदय टूट गया। वह अपने पति के पीछे-पीछे जंगलों में भटकती रही, उसके दुख का उपाय खोजती रही।
एक दिन भटकते हुए उसे एक शांत और पवित्र आश्रम दिखाई दिया। वहाँ एक तपस्वी मुनि साधना में लीन थे। ललिता ने उनके चरणों में गिरकर अपनी पूरी व्यथा सुनाई। मुनि का हृदय द्रवित हो उठा। उन्होंने उसे कामदा एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने की सलाह दी और आशीर्वाद दिया।
ललिता ने पूर्ण विश्वास और भक्ति के साथ कामदा एकादशी का व्रत (Kamada ekadashi Vrat) रखा। व्रत की पुण्य शक्ति से ललित को श्राप से मुक्ति मिल गई और वह पुनः अपने सुंदर गंधर्व रूप में लौट आया।
यह कथा हमें सच्चे प्रेम, आस्था और व्रत की शक्ति का संदेश देती है। साथ ही यह दर्शाती है कि दांपत्य जीवन में सामंजस्य और शुभ कार्यों में परंपराओं का पालन कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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कामदा एकादशी को बहुत ही फलदायी व्रत माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत पापों का नाश करने वाला और पुण्य प्रदान करने वाला है। ऐसा कहा जाता है कि यदि किसी व्यक्ति ने जाने-अनजाने में कोई गलत कार्य किया हो, तो इस व्रत के प्रभाव से उसे मुक्ति मिल सकती है।
इस व्रत के मुख्य लाभ:
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को यज्ञ, दान और तप के बराबर फल मिलता है। जो लोग संतान सुख की कामना करते हैं, उनके लिए भी यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, का प्रभाव अत्यंत चमत्कारी माना गया है। यह (kamada ekadashi)व्रत व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
जो लोग मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह या आर्थिक संकट से परेशान होते हैं, उनके लिए यह व्रत आशा की नई किरण बन सकता है। नियमित रूप से एकादशी का पालन करने से मन शुद्ध होता है और जीवन में संतुलन आता है।
कई लोग अनुभव करते हैं कि इस व्रत के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। हालांकि, चमत्कार से अधिक जरूरी है सच्ची श्रद्धा और अच्छे कर्म।
कामदा एकादशी का व्रत श्रद्धा, संयम और सात्विकता के साथ किया जाता है। इस पावन दिन कुछ विशेष बातों का पालन करना शुभ माना जाता है:
इन नियमों का पालन श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और (kamada ekadashi) जीवन में सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।
कामदा एकादशी (kamada ekadashi) केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का अवसर है। यह हमें संयम, प्रेम और श्रद्धा के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है। सच्चे मन और विश्वास से किया गया यह व्रत जीवन में शांति, संतुलन और सुख-समृद्धि ला सकता है। इसलिए 2026 की कामदा एकादशी को भक्ति और नियम के साथ मनाएं और आध्यात्मिक उन्नति की ओर एक कदम बढ़ाएं।
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Meera Joshi, a spiritual writer with 12+ years’ expertise, documents pooja vidhis and rituals, simplifying traditional ceremonies for modern readers to perform with faith, accuracy, and devotion.