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May 27, 2026 Blog

Hariyali Amavasya 2026: हरियाली अमावस्या कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पितृ दोष से मुक्ति के अचूक उपाय

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

हरियाली अमावस्या 2026: प्रकृति के श्रृंगार और पितरों के आशीर्वाद का महापर्व (Hariyali Amavasya 2026: A grand festival celebrating the beauty of nature and blessings of ancestors)

सावन की रंगत जब अपने चरम पर होती है, चारों तरफ पेड़ों पर नई कोपलें फूटती हैं और धरती हरी चुनरी ओढ़ लेती है, तब मन भक्ति और कृतज्ञता से भर जाता है। यह समय प्रकृति के अद्भुत रूप को नमन करने और अपने पितरों का आशीर्वाद पाने का है— 'हरियाली अमावस्या'। यह एक कैलेंडर की तारीख से कहीं अधिक है, यह हमारे जीवन में नई ऊर्जा और हरियाली भरने का एक आध्यात्मिक निमंत्रण है।

कल्पना कीजिए, सावन की फुहारें गिर रही हैं और आप एक छोटा सा पौधा रोप रहे हैं—यह अहसास ही कितना सुकून देने वाला है। साल में हरियाली अमावस्या  2026 (Hariyali Amavasya 2026) 12 अगस्त को आ रही है। आइए, इस लेख के जरिए जानते हैं कि यह दिन हमारे पर्यावरण और हमारे भाग्य दोनों को कैसे बदल सकता है।

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हरियाली अमावस्या क्या है? (What is Hariyali Amavasya?)

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को 'हरियाली अमावस्या' कहा जाता है। यह पर्व प्रकृति की हरियाली और खुशहाली को समर्पित है। भारत के कई हिस्सों, विशेषकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हिमाचल में इस दिन बड़े मेलों का आयोजन होता है और लोग उत्सव मनाते हैं। यह दिन महादेव की भक्ति और पूर्वजों (पितरों) की शांति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

हरियाली अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

hariyali amavasya 2026

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साल में हरियाली अमावस्या 2026 (Hariyali Amavasya 2026) अगस्त के मध्य में आ रही है। इस दिन का समय नीचे दिया गया है:

पर्व की तिथि: 12 अगस्त 2026, बुधवार
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 11 अगस्त 2026 को रात 08:30 बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त: 12 अगस्त 2026 को रात 09:15 बजे तक
स्नान और दान का समय: सुबह 04:35 AM से 08:20 AM तक।
इस दिन स्नान-दान और वृक्षारोपण करना सबसे फलदायी होगा।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Religious and spiritual significance)

हरियाली अमावस्या 2026 (Hariyali Amavasya 2026) का महत्व तीन रूपों में देखा जाता है— धार्मिक, पितृ शांति और पर्यावरण।
पितृ दोष से मुक्ति: अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन तर्पण करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
महादेव और माँ पार्वती का पूजन: सावन का महीना होने के कारण इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
वृक्षारोपण का संकल्प: शास्त्रों में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान माना गया है। इस दिन पौधे लगाने से ग्रह दोष शांत होते हैं।

विस्तृत पूजा विधि (Pooja Rituals)

इस दिन की पूजा बहुत ही सरल और भावपूर्ण है। आप घर पर इस प्रकार पूजन कर सकते हैं:
पवित्र स्नान: सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि घर पर हैं, तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
तर्पण और दान: स्नान के बाद अपने पितरों के नाम से जल में तिल डालकर तर्पण करें। गरीबों को सफेद अनाज या गुड़ का दान करें।
शिव-शक्ति पूजन: भगवान शिव और माँ पार्वती की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें।
पीपल और तुलसी पूजा: अमावस्या पर पीपल के पेड़ में देवताओं का वास होता है। पीपल की जड़ में जल चढ़ाएं और घी का दीपक जलाएं।
वृक्षारोपण: आज के दिन एक पौधा (नीम, पीपल, बरगद या तुलसी) जरूर लगाएं और उसकी रक्षा का संकल्प लें।

व्रत के नियम (Rules of fasting)

  • अमावस्या के दिन सुबह का स्नान अनिवार्य है।
  • इस दिन मौन रहकर प्रभु का ध्यान करना मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • घर में पूरी तरह सात्विक माहौल रखें और कलेश न करें।
  • व्रत रखने वाले लोग शाम के समय सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

हरियाली अमावस्या के लाभ (Benefits)

  • पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर की आर्थिक तंगी दूर होती है।
  • संतान पक्ष से आ रही समस्याएं हल होती हैं।
  • जो लोग नौकरी या व्यापार में बाधा महसूस कर रहे हैं, उन्हें सफलता मिलती है।
  • प्रकृति के करीब रहने से मानसिक तनाव कम होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)

क्या करें:

  • पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करें।
  • मछलियों को आटे की गोलियां और चींटियों को शक्कर खिलाएं।
  • महादेव के मंदिर में 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप करें।
  • अपनी राशि के अनुसार शुभ पौधा लगाएं।

क्या न करें:

  • तामसिक भोजन: इस दिन प्याज, लहसुन या मांस-मदिरा का भूलकर भी सेवन न करें।
  • पेड़-पौधों को काटना: चूंकि यह हरियाली का उत्सव है, आज के दिन किसी भी हरे पेड़ या टहनी को न काटें।
  • अकेले सुनसान जगह न जाएं: अमावस्या की रात नकारात्मक ऊर्जा प्रभावी होती है, इसलिए सुनसान जगहों पर जाने से बचें।
  • बड़ों का अपमान: इस दिन अपने घर के बुजुर्गों का दिल न दुखाएं, अन्यथा पितर नाराज हो सकते हैं।

पौराणिक कथा (Story)

एक पौराणिक कथा के अनुसार, हरियाली अमावस्या 2026 (Hariyali Amavasya 2026) एक राजा के घर में उनकी बहू ने चोरी से कुछ मिठाई खा ली और उसका दोष चूहे पर लगा दिया। बेगुनाह चूहे को सजा मिली, जिससे वह बहुत दुखी हुआ। बाद में चूहे ने गणेश जी से न्याय की गुहार लगाई। राजा को जब सच्चाई का पता चला, तो उन्होंने प्रायश्चित के लिए सावन अमावस्या पर 'हरियाली व्रत' और 'गौ-पूजा' का विधान किया। तब से यह माना जाने लगा कि जो भी इस दिन प्रकृति और जीवों की सेवा करता है, उसके घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।

निष्कर्ष (Conclusion)

हरियाली अमावस्या 2026 (Hariyali Amavasya 2026) हमें यह याद दिलाने आती है कि हमारा अस्तित्व इस प्रकृति से ही है। 12 अगस्त को जब आप महादेव की पूजा करें और अपने पितरों को याद करें, तो एक पौधा लगाकर धरती माँ को भी अपना उपहार दें। आपकी एक छोटी सी कोशिश आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हर भरा भविष्य सुनिश्चित कर सकती है। सावन की यह अमावस्या आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की हरियाली लेकर आए!

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. हरियाली अमावस्या 2026 (Hariyali Amavasya 2026) में कब है?

हरियाली अमावस्या 2026 (Hariyali Amavasya 2026) 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी।

2. पितृ शांति के लिए इस दिन क्या करना चाहिए?

इस दिन जल में काले तिल डालकर पितरों को तर्पण दें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं या दान दें।

3. हरियाली अमावस्या 2026 (Hariyali Amavasya 2026) पर कौन सा पौधा लगाना सबसे शुभ है?

तुलसी, नीम, पीपल, बरगद या आंवले का पौधा लगाना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

4. क्या इस दिन व्रत रखना जरूरी है?

अनिवार्य नहीं है, लेकिन जो लोग पितृ दोष या मानसिक शांति चाहते हैं, उनके लिए व्रत रखना बहुत लाभकारी होता है।

5. हरियाली अमावस्या को 'खेती का त्योहार' क्यों कहते हैं?

क्योंकि इस समय तक किसान अपनी बुवाई पूरी कर चुके होते हैं और खेतों में हरियाली देख ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.