शादी-ब्याह और मांगलिक कार्यों के लिए साल का आखिरी सुनहरा मौका
कल्पना कीजिए उस घर की जहाँ शहनाइयां बजने वाली हैं, जहाँ नए घर की नींव रखी जानी है, या जहाँ किसी नन्हे कदम की आहट होने वाली है। लेकिन पंचांग देखते ही पता चलता है कि शुभ मुहूर्त तो निकल चुके हैं! ऐसे में मायूस होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारतीय संस्कृति में 'अबूझ मुहूर्त' का एक ऐसा वरदान है जिसे हम भड़ली नवमी कहते हैं।
भड़ली नवमी 2026 (Bhadali Navami 2026) केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों की उम्मीद है जो बिना किसी बाधा के अपने शुभ कार्यों को संपन्न करना चाहते हैं। आषाढ़ मास की यह नवमी देवशयनी एकादशी से ठीक पहले आती है, जो हमें याद दिलाती है कि भगवान के सोने से पहले खुशियों को समेटने का यह आखिरी अवसर है। आइए, इस लेख में जानते हैं कि इस वर्ष भड़ली नवमी की महिमा क्या है।
भड़ली नवमी,(Bhadali Navami 2026) जिसे भड़ल्या नवमी या कंदर्प नवमी भी कहा जाता है, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। यह अक्षय तृतीया की तरह ही एक 'अबूझ मुहूर्त' है। इसका अर्थ यह है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए आपको किसी पंडित से मुहूर्त पूछने या पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस दिन का हर क्षण अपने आप में पवित्र और सिद्ध होता है। चूंकि इसके दो दिन बाद ही देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, इसलिए विवाह और गृह प्रवेश के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है।
वर्ष 2026 में भड़ली नवमी का संयोग बहुत ही सुंदर बन रहा है। यदि आप भी किसी मांगलिक कार्य की योजना बना रहे हैं, तो इन समयों को नोट कर लें:
भड़ली नवमी तिथि: 23 जून 2026 (मंगलवार)
नवमी तिथि प्रारंभ: 23 जून 2026 को सुबह 06:45 बजे से
नवमी तिथि समाप्त: 24 जून 2026 को सुबह 08:12 बजे तक
अबूझ मुहूर्त: चूंकि यह पूरा दिन स्वयं-सिद्ध है, इसलिए सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक का समय अत्यंत शुभ है।
विशेष: मंगलवार का दिन होने के कारण इस दिन हनुमान जी और शक्ति की पूजा का भी विशेष फल मिलेगा।

भड़ली नवमी 2026 (Bhadali Navami 2026) का महत्व इस बात से बढ़ जाता है कि यह ऋतु परिवर्तन और आध्यात्मिक विश्राम का संधिकाल है।
मांगलिक कार्यों का अंत: इसके बाद चातुर्मास शुरू हो जाता है, जिसमें विवाह जैसे कार्य वर्जित होते हैं। अतः यह साल का अंतिम 'बिग बैंग' मुहूर्त होता है।
विष्णु कृपा: इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से आने वाले चार महीनों के लिए सुख और शांति का आशीर्वाद मिलता है।
मनोकामना पूर्ति: माना जाता है कि इस दिन गुप्त दान और भक्ति करने से रुकी हुई शादियां और व्यापारिक बाधाएं दूर हो जाती हैं।
भले ही इस दिन कोई भी कार्य बिना मुहूर्त के हो सकता है, लेकिन आध्यात्मिक लाभ के लिए पूजा विधि का पालन करना श्रेष्ठ है:
शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (पीले या लाल रंग के) धारण करें।
संकल्प: मंदिर की सफाई करें और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने हाथ में जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।
अभिषेक: भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं और फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें।
श्रृंगार: उन्हें पीले फूल, चंदन, तुलसी दल और पीले वस्त्र अर्पित करें। माता लक्ष्मी को श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं।
नैवेद्य: केसरिया भात या पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
मंत्र जाप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें।
दीप दान: संध्या के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।
यदि आप भड़ली नवमी 2026 का व्रत रख रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
व्रत को फलाहारी रखें या एक समय सात्विक भोजन करें।
दिन भर मन में बुरे विचार न लाएं और वाणी पर संयम रखें।
यह दिन परोपकार का है, इसलिए किसी जरूरतमंद को मना न करें।
पूरी रात भगवान के भजन या नाम संकीर्तन करना अत्यंत लाभकारी होता है।
विवाह बाधा निवारण: जिन कन्याओं या युवकों के विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए यह दिन वरदान समान है।
मानसिक सुख: भगवान की आराधना से मन का डर और तनाव दूर होता है।
कार्य सिद्धि: नया व्यापार शुरू करने या नया वाहन खरीदने के लिए यह दिन सफलता की गारंटी माना जाता है।
क्या करें:
अन्न और जल का दान करें।
पीले रंग की चीजों का अधिक प्रयोग करें।
पेड़-पौधे लगाएं, विशेषकर पीपल या तुलसी।
क्या न करें:
तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस) का सेवन न करें।
किसी का दिल न दुखाएं, खासकर बड़ों का अपमान न करें।
घर में कलह या झगड़ा करने से बचें, क्योंकि आज की ऊर्जा को सकारात्मक रखना जरूरी है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार,(Bhadali Navami 2026) आषाढ़ मास की यह नवमी शक्ति और भक्ति के मिलन का प्रतीक है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में जब एक भक्त के पास अपनी बेटी के विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं बचा था और देवशयनी एकादशी नजदीक थी, तब भगवान विष्णु ने स्वयं प्रकट होकर उसे बताया कि आषाढ़ शुक्ल नवमी का दिन 'स्वयं सिद्ध' है। इस दिन ब्रह्मांड की सभी शक्तियां अनुकूल होती हैं। तब से इसे भड़ली नवमी के रूप में मनाया जाने लगा। यह कथा हमें सिखाती है कि जब हमारी श्रद्धा सच्ची होती है, तो ईश्वर स्वयं हमारे लिए रास्ते आसान कर देते हैं।
भड़ली नवमी 2026 (Bhadali Navami 2026) हमारे जीवन में खुशियों का द्वार खोलने वाली तिथि है। यह हमें सिखाती है कि समय कभी भी खराब नहीं होता, बस उसे सही भाव से पकड़ने की जरूरत है। अगर आप भी लंबे समय से किसी शुभ कार्य को
टाल रहे हैं, तो 23 जून का यह दिन आपके लिए ईश्वर का संदेश है। पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ भगवान की शरण में आएं और अपने नए सफर की शुरुआत करें।
Q1. भड़ली नवमी 2026 (Bhadali Navami 2026) में कब है?
यह 23 जून 2026, मंगलवार को है।
Q2. क्या भड़ली नवमी पर विवाह करना शुभ है?
जी हाँ, यह एक अबूझ मुहूर्त है, इसलिए इस दिन बिना मुहूर्त देखे शादी-ब्याह किए जा सकते हैं।
Q3. भड़ली नवमी (Bhadali Navami 2026) को कंदर्प नवमी क्यों कहते हैं?
कंदर्प कामदेव का नाम है। प्रेम और गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए शुभ होने के कारण इसे कंदर्प नवमी भी कहा जाता है।
Q4. क्या इस दिन गृह प्रवेश किया जा सकता है?
बिल्कुल, नए घर में प्रवेश के लिए यह साल के सबसे उत्तम दिनों में से एक है।
Q5. इस दिन कौन से भगवान की पूजा की जाती है?
मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.