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April 9, 2026 Blog

Parvati Jayanti 2026: अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का महापर्व, जानिये सहीतिथि, मुहूर्त और संपूर्ण कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जब हम शक्ति, सहनशीलता और निस्वार्थ प्रेम की बात करते हैं, तो हमारे मन में एक खूबसूरत तस्वीर उभर आती है - माँ पार्वती की तस्वीर। वह देवी जिन्होंने अपनी कठोर तपस्या से महादेव को अपना बनाया और गृहस्थ जीवन को एक नई परिभाषा दी। पार्वती जयंती केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह उत्सव है नारी शक्ति के संकल्प का और अटूट विश्वास का।

यदि आप भी अपने वैवाहिक जीवन में मधुरता चाहते हैं या मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना रखते हैं, तो पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) आपके लिए एक विशेष अवसर है। आइए, इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि इस वर्ष माँ पार्वती का प्राकट्य दिवस कब है और इसे किस प्रकार श्रद्धापूर्वक मनाया जाए।

पार्वती जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Parvati Jayanti 2026: Date and Auspicious Time)

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पार्वती जयंती मनाई जाती है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे बड़े ही भक्ति भाव से मनाया जाता है।

महत्वपूर्ण समय:

  • पार्वती जयंती 2026 की तिथि: 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार)
  • तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 फरवरी 2026 को दोपहर 03:45 बजे से
  • तृतीया तिथि समाप्त: 20 फरवरी 2026 को शाम 05:12 बजे तक
  • पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 06:45 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक।

विशेष संयोग: 2026 में पार्वती जयंती शुक्रवार के दिन पड़ रही है। शुक्रवार माता लक्ष्मी और देवी शक्ति का दिन माना जाता है, जिससे इस दिन की महत्ता और भी बढ़ गई है।

पार्वती जयंती का परिचय और धार्मिक महत्व (Introduction and Religious Significance of Parvati Jayanti)

पार्वती जयंती वह पावन दिन है जब पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर आदि शक्ति ने पार्वती के रूप में जन्म लिया था। शास्त्रों के अनुसार, सती के आत्मदाह के बाद महादेव वैराग्य में चले गए थे। सृष्टि के संतुलन और शिव-शक्ति के पुनर्मिलन के लिए देवी ने हिमालय की पुत्री के रूप में पुनर्जन्म लिया।

पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) का आध्यात्मिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह पर्व हमें सिखाता है कि कठिन परिश्रम और सच्ची भक्ति से ईश्वर को भी प्राप्त किया जा सकता है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह 'अखंड सौभाग्य' का दिन है, वहीं अविवाहित कन्याओं के लिए यह सुयोग्य वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

पार्वती जयंती पूजा विधि (Parvati Jayanti Puja Method)

माँ पार्वती की पूजा बहुत ही सरल और भावपूर्ण होती है। इस दिन आप घर पर इस विधि से पूजन कर सकते हैं:

  • शुद्धिकरण: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ (संभव हो तो लाल) वस्त्र धारण करें।
  • संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें कि “आज मैं माता पार्वती की प्रसन्नता के लिए यह व्रत कर रही/रहा हूँ।"
  • स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और माँ पार्वती तथा भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • श्रृंगार: माता पार्वती को कुमकुम, अक्षत, सिंदूर और सुहाग की सामग्री (मेहंदी, चूड़ी, बिंदी आदि) अर्पित करें। महादेव को भस्म और चंदन लगाएं।
  • अर्पण: देवी को लाल फूल, विशेषकर गुड़हल या गुलाब चढ़ाएं। फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • दीप और पाठ: धूप-दीप जलाएं और पार्वती चालीसा या माँ पार्वती के मंत्रों का जाप करें।
  • आरती: अंत में शिव-पार्वती की संयुक्त आरती करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।

व्रत के कड़े नियम (Strict rules of fasting)

parvati jayanti 2026

पार्वती जयंती का व्रत रखने वाले जातकों को कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि व्रत का पूर्ण फल मिल सके:

  • सात्विकता: पूरे दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें। किसी के प्रति बुरा विचार न लाएं।
  • आहार: यह व्रत फलाहारी रखा जाता है। यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो एक समय सात्विक भोजन किया जा सकता है।
  • निद्रा: व्रत के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए। अपना समय भजन-कीर्तन में बिताएं।
  • ब्रह्मचर्य: इस पावन दिन पर ब्रह्मचर्य के नियमों का कड़ाई से पालन करें।

पार्वती जयंती व्रत के अद्भुत लाभ (Amazing Benefits of Parvati Jayanti Fast)

श्रद्धापूर्वक पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) का व्रत रखने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • सुखी दांपत्य: पति-पत्नी के बीच चल रहे कलह समाप्त होते हैं और प्रेम बढ़ता है।
  • योग्य वर की प्राप्ति: अविवाहित कन्याओं को मनचाहा और शिव के समान गुणी जीवनसाथी मिलता है।
  • संतान सुख: जो माताएं अपनी संतान की उन्नति चाहती हैं, उन्हें इस दिन देवी का आशीर्वाद मिलता है।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि: देवी पार्वती शक्ति का स्वरूप हैं, उनकी पूजा से भय दूर होता है और मानसिक बल मिलता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

व्रत की सफलता आपकी सावधानी पर निर्भर करती है। पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) के दिन इन बातों का खास ख्याल रखें:

क्या करें:

इस दिन दान का बहुत महत्व है। गरीब महिलाओं को भोजन कराएं या उन्हें सुहाग का सामान दान दें। मंदिर जाकर दीप दान करें। घर के बड़ों, विशेषकर माता का सम्मान करें और उनके चरण स्पर्श करें। पूरे दिन 'ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः' मंत्र का मानसिक जाप करते रहें।

क्या न करें:

इस दिन क्रोध करने से आपका पुण्य कम हो सकता है, इसलिए वाणी पर संयम रखें। तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज या मांस-मदिरा का स्पर्श भी न करें। घर में वाद-विवाद का माहौल न बनने दें। साथ ही, माता पार्वती की पूजा कभी भी भगवान शिव के बिना अधूरी मानी जाती है, इसलिए शिव जी की उपेक्षा न करें।

माँ पार्वती के जन्म की पौराणिक कथा (The mythological story of the birth of Goddess Parvati)

पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में देह त्याग दी, तो महादेव गहरे शोक में डूब गए। संसार में असुरों का आतंक बढ़ने लगा। तब आदि शक्ति ने हिमालय की पुत्री 'पार्वती' के रूप में जन्म लिया। बचपन से ही पार्वती का मन शिव में रमा था। नारद जी के कहने पर उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक घोर तपस्या की। उन्होंने केवल पत्तों (अपर्णा) पर रहकर और बाद में निराहार रहकर महादेव को प्रसन्न किया। पार्वती जयंती उन्हीं की इसी अडिग भक्ति और समर्पण का उत्सव है। यह कथा हमें याद दिलाती है कि यदि लक्ष्य पवित्र हो और संकल्प मजबूत, तो पूरी कायनात हमें उससे मिलाने में लग जाती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) हमें अपने रिश्तों की कद्र करना और संघर्षों के बीच धैर्य बनाए रखना सिखाती है। माँ पार्वती प्रेम और अनुशासन का सही संतुलन हैं। इस वर्ष जब आप 20 फरवरी को माता का पूजन करें, तो केवल धन या वैभव न मांगें, बल्कि उनसे वह धैर्य और प्रेम मांगें जिससे आपका घर एक स्वर्ग बन सके। उम्मीद है कि माता पार्वती का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहे। आपके घर में सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का वास हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FQAs)

Q1. पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) में कब है?
यह 20 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।


Q2. क्या कुंवारी लड़कियां यह व्रत रख सकती हैं?
हाँ, सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए कन्याएं यह व्रत और माता पार्वती की पूजा विशेष रूप से करती हैं।


Q3. पार्वती जयंती और हरियाली तीज में क्या अंतर है?
पार्वती जयंती माता के जन्म का उत्सव है, जबकि तीज उनके और शिव के पुनर्मिलन और मिलन की खुशी में मनाई जाती है।


Q4. इस दिन कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?
"ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” या “ॐ पार्वत्यै नमः” का जाप करना अत्यंत लाभकारी है।


Q5. पूजा में माता को क्या भेंट करना चाहिए?
माता को सिंदूर, लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान भेंट करना सबसे शुभ माना जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.