जब हम शक्ति, सहनशीलता और निस्वार्थ प्रेम की बात करते हैं, तो हमारे मन में एक खूबसूरत तस्वीर उभर आती है - माँ पार्वती की तस्वीर। वह देवी जिन्होंने अपनी कठोर तपस्या से महादेव को अपना बनाया और गृहस्थ जीवन को एक नई परिभाषा दी। पार्वती जयंती केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह उत्सव है नारी शक्ति के संकल्प का और अटूट विश्वास का।
यदि आप भी अपने वैवाहिक जीवन में मधुरता चाहते हैं या मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना रखते हैं, तो पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) आपके लिए एक विशेष अवसर है। आइए, इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि इस वर्ष माँ पार्वती का प्राकट्य दिवस कब है और इसे किस प्रकार श्रद्धापूर्वक मनाया जाए।
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पार्वती जयंती मनाई जाती है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे बड़े ही भक्ति भाव से मनाया जाता है।
महत्वपूर्ण समय:
विशेष संयोग: 2026 में पार्वती जयंती शुक्रवार के दिन पड़ रही है। शुक्रवार माता लक्ष्मी और देवी शक्ति का दिन माना जाता है, जिससे इस दिन की महत्ता और भी बढ़ गई है।
पार्वती जयंती वह पावन दिन है जब पर्वतराज हिमालय और माता मैना के घर आदि शक्ति ने पार्वती के रूप में जन्म लिया था। शास्त्रों के अनुसार, सती के आत्मदाह के बाद महादेव वैराग्य में चले गए थे। सृष्टि के संतुलन और शिव-शक्ति के पुनर्मिलन के लिए देवी ने हिमालय की पुत्री के रूप में पुनर्जन्म लिया।
पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) का आध्यात्मिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह पर्व हमें सिखाता है कि कठिन परिश्रम और सच्ची भक्ति से ईश्वर को भी प्राप्त किया जा सकता है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह 'अखंड सौभाग्य' का दिन है, वहीं अविवाहित कन्याओं के लिए यह सुयोग्य वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
माँ पार्वती की पूजा बहुत ही सरल और भावपूर्ण होती है। इस दिन आप घर पर इस विधि से पूजन कर सकते हैं:

पार्वती जयंती का व्रत रखने वाले जातकों को कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि व्रत का पूर्ण फल मिल सके:
श्रद्धापूर्वक पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) का व्रत रखने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
व्रत की सफलता आपकी सावधानी पर निर्भर करती है। पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) के दिन इन बातों का खास ख्याल रखें:
क्या करें:
इस दिन दान का बहुत महत्व है। गरीब महिलाओं को भोजन कराएं या उन्हें सुहाग का सामान दान दें। मंदिर जाकर दीप दान करें। घर के बड़ों, विशेषकर माता का सम्मान करें और उनके चरण स्पर्श करें। पूरे दिन 'ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः' मंत्र का मानसिक जाप करते रहें।
क्या न करें:
इस दिन क्रोध करने से आपका पुण्य कम हो सकता है, इसलिए वाणी पर संयम रखें। तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज या मांस-मदिरा का स्पर्श भी न करें। घर में वाद-विवाद का माहौल न बनने दें। साथ ही, माता पार्वती की पूजा कभी भी भगवान शिव के बिना अधूरी मानी जाती है, इसलिए शिव जी की उपेक्षा न करें।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में देह त्याग दी, तो महादेव गहरे शोक में डूब गए। संसार में असुरों का आतंक बढ़ने लगा। तब आदि शक्ति ने हिमालय की पुत्री 'पार्वती' के रूप में जन्म लिया। बचपन से ही पार्वती का मन शिव में रमा था। नारद जी के कहने पर उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक घोर तपस्या की। उन्होंने केवल पत्तों (अपर्णा) पर रहकर और बाद में निराहार रहकर महादेव को प्रसन्न किया। पार्वती जयंती उन्हीं की इसी अडिग भक्ति और समर्पण का उत्सव है। यह कथा हमें याद दिलाती है कि यदि लक्ष्य पवित्र हो और संकल्प मजबूत, तो पूरी कायनात हमें उससे मिलाने में लग जाती है।
पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) हमें अपने रिश्तों की कद्र करना और संघर्षों के बीच धैर्य बनाए रखना सिखाती है। माँ पार्वती प्रेम और अनुशासन का सही संतुलन हैं। इस वर्ष जब आप 20 फरवरी को माता का पूजन करें, तो केवल धन या वैभव न मांगें, बल्कि उनसे वह धैर्य और प्रेम मांगें जिससे आपका घर एक स्वर्ग बन सके। उम्मीद है कि माता पार्वती का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहे। आपके घर में सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का वास हो।
Q1. पार्वती जयंती 2026 (Parvati Jayanti 2026) में कब है?
यह 20 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
Q2. क्या कुंवारी लड़कियां यह व्रत रख सकती हैं?
हाँ, सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए कन्याएं यह व्रत और माता पार्वती की पूजा विशेष रूप से करती हैं।
Q3. पार्वती जयंती और हरियाली तीज में क्या अंतर है?
पार्वती जयंती माता के जन्म का उत्सव है, जबकि तीज उनके और शिव के पुनर्मिलन और मिलन की खुशी में मनाई जाती है।
Q4. इस दिन कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?
"ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” या “ॐ पार्वत्यै नमः” का जाप करना अत्यंत लाभकारी है।
Q5. पूजा में माता को क्या भेंट करना चाहिए?
माता को सिंदूर, लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान भेंट करना सबसे शुभ माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.