भगवान श्री कृष्ण के पौत्र भगवान अनिरुद्ध की जयंती अनिरुद्ध चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 (Aniruddha Chaturthi 2026) की तिथि 13 दिसंबर है, जो रविवार के दिन पड़ रही है।
भगवान अनिरुद्ध को मन के नियंत्रक के रूप में देखा जाता है। लोग उनसे मानसिक शांति और स्पष्ट सोच पाने की उम्मीद में पूजा करते हैं। अनिरुद्ध चतुर्थी के दिन उनकी पूजा करने से उनके भक्तों को उनका आशीर्वाद मिलता है, जो जीवन की चुनौतियों से निपटने में मदद करता है।
अनिरुद्ध चतुर्थी (Aniruddha Chaturthi 2026) का महत्व आध्यात्मिक रूप से बहुत अधिक है। इस दिन भगवान अनिरुद्ध की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति और स्पष्टता प्राप्त होती है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति केवल अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि मन की शुद्धि में है।
भगवान अनिरुद्ध की पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:
इस व्रत में कुछ विशेष सावधानियों की आवश्यकता होती है:

अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा (Mythological Story)
पौराणिक कथा के अनुसार, अनिरुद्ध जी अत्यंत सुंदर और बलशाली थे। असुर राज बाणासुर की पुत्री 'उषा' ने स्वप्न में अनिरुद्ध जी को देखा और उन्हें अपना हृदय दे बैठी। उषा की सखी चित्रलेखा ने अपनी योगशक्ति से अनिरुद्ध जी को द्वारका से उठाकर बाणासुर के महल में पहुँचा दिया। बाणासुर ने जब यह देखा तो उसने अनिरुद्ध को बंदी बना लिया। अनिरुद्ध जी ने कारागार में रहकर भी अपना धैर्य नहीं खोया। अंत में, भगवान श्री कृष्ण ने बाणासुर को युद्ध में परास्त किया और अनिरुद्ध व उषा का विवाह हुआ। यह कथा सिखाती है कि सच्चा प्रेम और अडिग धैर्य हर संकट को पार कर लेता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 (Aniruddha Chaturthi 2026) का पावन दिन हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति केवल अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि मन की शुद्धि में है। भगवान अनिरुद्ध की कृपा हमारे जीवन के अंधकार को मिटाकर हमें आत्मबल प्रदान करती है। इस वर्ष, जब आप उनकी पूजा करें, तो अटूट विश्वास के साथ अपना मन उनके चरणों में अर्पित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 (Aniruddha Chaturthi 2026) में किस दिन है?
यह 13 दिसंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी।
Q2. भगवान अनिरुद्ध का श्री कृष्ण से क्या संबंध है?
भगवान अनिरुद्ध, श्री कृष्ण के पौत्र (पुत्र प्रद्युम्न के पुत्र) हैं।
Q3. क्या यह व्रत विद्यार्थी रख सकते हैं?
हाँ, एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के लिए विद्यार्थियों के लिए यह व्रत बहुत लाभकारी है।
Q4. पूजा में कौन सा रंग सबसे शुभ है?
भगवान विष्णु के कुल की पूजा में पीला रंग सबसे शुभ माना जाता है।
Q5. इस व्रत का मुख्य फल क्या है?
मुख्य रूप से यह व्रत मानसिक शांति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.