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April 9, 2026 Blog

Aniruddha Chaturthi 2026: श्री कृष्ण के पौत्र का आशीर्वाद पाने का महापर्व, जानिये सही तिथि, मुहूर्त और महत्व

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer


भगवान श्री कृष्ण के पौत्र भगवान अनिरुद्ध की जयंती अनिरुद्ध चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 (Aniruddha Chaturthi 2026) की तिथि 13 दिसंबर है, जो रविवार के दिन पड़ रही है।

भगवान अनिरुद्ध की कृपा पाने का महापर्व अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 (Aniruddha Chaturthi 2026 is a great festival to seek the blessings of Lord Aniruddha)

भगवान अनिरुद्ध को मन के नियंत्रक के रूप में देखा जाता है। लोग उनसे मानसिक शांति और स्पष्ट सोच पाने की उम्मीद में पूजा करते हैं। अनिरुद्ध चतुर्थी के दिन उनकी पूजा करने से उनके भक्तों को उनका आशीर्वाद मिलता है, जो जीवन की चुनौतियों से निपटने में मदद करता है।

अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 का महत्व (Significance of Aniruddha Chaturthi 2026)

अनिरुद्ध चतुर्थी (Aniruddha Chaturthi 2026) का महत्व आध्यात्मिक रूप से बहुत अधिक है। इस दिन भगवान अनिरुद्ध की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति और स्पष्टता प्राप्त होती है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति केवल अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि मन की शुद्धि में है।

अनिरुद्ध चतुर्थी की पूजा विधि (Worship method of Aniruddha Chaturthi)

भगवान अनिरुद्ध की पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:

  • प्रातः काल स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र पहनें।
  • एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान अनिरुद्ध की प्रतिमा स्थापित करें।
  • प्रभु को पंचामृत से स्नान कराएं और फिर गंगाजल अर्पित करें।
  • पीला चंदन, पीले पुष्प, तुलसी दल और पीला जनेऊ अर्पित करें।
  • भगवान को मक्खन-मिश्री या पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
  • शुद्ध घी का दीपक जलाएं और 'ॐ अनिरुद्धाय नमः' मंत्र का जाप करें।
  • भगवान अनिरुद्ध की कथा सुनें और अंत में आरती कर आशीर्वाद लें।

अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत के नियम (Rules of Aniruddha Chaturthi fast)

इस व्रत में कुछ विशेष सावधानियों की आवश्यकता होती है:

  • सात्विकता का पालन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • फलाहारी व्रत रखें और दिन में केवल एक बार फल या दूध का सेवन करें।
  • संभव हो तो दिन में कुछ समय मौन रहें।
  • रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करें।

अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत के लाभ (Benefits of Aniruddha Chaturthi fast)

अनिरुद्ध चतुर्थी पूजा विधि के लिए पीले पुष्प और पूजन सामग्री की सजावट

अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • मानसिक स्पष्टता और शांति: अनिरुद्ध जी मन के देवता होने के कारण हमारे मन के भ्रम को दूर कर हमें शांति प्रदान करते हैं।
  • वंश वृद्धि और संतान सुख: संतान प्राप्ति और बच्चों की उन्नति के लिए यह व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है।
  • दृढ़ संकल्प शक्ति: यह व्रत हमें आत्मविश्वास और संकल्प प्रदान करता है, जो जीवन की चुनौतियों से निपटने में हमारी मदद करता है।
  • सुखी दांपत्य: अनिरुद्ध-उषा की कथा के प्रभाव से पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
  • कार्य सिद्धि और बाधा मुक्ति: जीवन के अटके हुए कार्यों में हमें सफलता मिलती है और बाधाएं दूर होती हैं।
  • बौद्धिक विकास: एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता में हमें बहुत सुधार होता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • इस दिन गौ माता को गुड़ और रोटी खिलाएं।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • अपने दादा-दादी और माता-पिता का आशीर्वाद लें।
  • पीले कपड़े और चीज़ों का उपयोग: भगवान अनिरुद्ध को पीला रंग बहुत पसंद है, इसलिए पूजा में आप खुद पीले कपड़े पहनें और भगवान को पीले फूल और फल चढ़ाएं।
  • मौन ध्यान: दिन का कुछ समय चुप रहकर भगवान का ध्यान करें। इससे आपको मानसिक रूप से केंद्रित रहने और अपने आत्मबल को बढ़ाने में मदद मिलेगी।


क्या न करें:

  • तामसिक भोजन से परहेज करें।
  • किसी भी बुजुर्ग या बालक का अपमान न करें।
  • झूठ बोलने और व्यर्थ के विवाद से बचें।
  • नशा और बुरी आदतें: इस व्रत की पवित्रता बनाए रखने के लिए, इस दिन किसी भी तरह के नशे, जैसे कि सिगरेट, शराब या तंबाकू से दूर रहें।
  • तुलसी के पत्ते तोड़ना: भगवान विष्णु के परिवार की पूजा में तुलसी के पत्ते बहुत जरूरी हैं। लेकिन ध्यान रखें कि चतुर्थी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें। पूजा के लिए एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें।

पौराणिक कथा (Mythological Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, अनिरुद्ध जी अत्यंत सुंदर और बलशाली थे। असुर राज बाणासुर की पुत्री 'उषा' ने स्वप्न में अनिरुद्ध जी को देखा और उन्हें अपना हृदय दे बैठी। उषा की सखी चित्रलेखा ने अपनी योगशक्ति से अनिरुद्ध जी को द्वारका से उठाकर बाणासुर के महल में पहुँचा दिया। बाणासुर ने जब यह देखा तो उसने अनिरुद्ध को बंदी बना लिया। अनिरुद्ध जी ने कारागार में रहकर भी अपना धैर्य नहीं खोया। अंत में, भगवान श्री कृष्ण ने बाणासुर को युद्ध में परास्त किया और अनिरुद्ध व उषा का विवाह हुआ। यह कथा सिखाती है कि सच्चा प्रेम और अडिग धैर्य हर संकट को पार कर लेता है।

निष्कर्ष (Conclusion) 

अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 (Aniruddha Chaturthi 2026) का पावन दिन हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति केवल अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि मन की शुद्धि में है। भगवान अनिरुद्ध की कृपा हमारे जीवन के अंधकार को मिटाकर हमें आत्मबल प्रदान करती है। इस वर्ष, जब आप उनकी पूजा करें, तो अटूट विश्वास के साथ अपना मन उनके चरणों में अर्पित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 (Aniruddha Chaturthi 2026) में किस दिन है?
यह 13 दिसंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी।


Q2. भगवान अनिरुद्ध का श्री कृष्ण से क्या संबंध है?
भगवान अनिरुद्ध, श्री कृष्ण के पौत्र (पुत्र प्रद्युम्न के पुत्र) हैं।


Q3. क्या यह व्रत विद्यार्थी रख सकते हैं?
हाँ, एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के लिए विद्यार्थियों के लिए यह व्रत बहुत लाभकारी है।


Q4. पूजा में कौन सा रंग सबसे शुभ है?
भगवान विष्णु के कुल की पूजा में पीला रंग सबसे शुभ माना जाता है।


Q5. इस व्रत का मुख्य फल क्या है?
मुख्य रूप से यह व्रत मानसिक शांति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.