Bhagat Ke Vash me hai Bhagwan: “भगत के वश में है भगवान” एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदय को छू लेने वाला हिंदी भजन है, जो भक्ति की उस सच्चाई को दर्शाता है कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम और समर्पण से बंध जाते हैं। इस भजन में यह सुंदर संदेश दिया गया है कि ईश्वर को पाने के लिए किसी विशेष साधन या शक्ति की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सच्चे मन से की गई भक्ति ही सबसे बड़ा माध्यम है।
यह भजन हमें याद दिलाता है कि जब कोई भक्त पूरी श्रद्धा, विश्वास और प्रेम के साथ भगवान को पुकारता है, तो भगवान स्वयं उसकी सहायता के लिए प्रकट हो जाते हैं। चाहे वह द्रौपदी की पुकार हो, प्रह्लाद की भक्ति हो या गजेन्द्र की प्रार्थना—हर जगह भगवान ने अपने भक्तों की रक्षा की है। यही भाव इस भजन के शब्दों में बहुत ही सरल और सुंदर तरीके से व्यक्त किया गया है।
इस भजन की खास बात यह है कि यह हर उम्र के लोगों के दिल को छू लेता है। इसके शब्द सरल हैं, लेकिन उनमें गहरी आध्यात्मिकता छिपी हुई है। जब इसे भावपूर्वक गाया या सुना जाता है, तो मन में शांति, सुकून और ईश्वर के प्रति विश्वास बढ़ने लगता है।
“भगत के वश में है भगवान” भजन (Bhagat Ke Vash me hai Bhagwan Bhajan) हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि वह भगवान को भी अपने भक्त के वश में कर लेती है। यह भजन हमें अहंकार छोड़कर विनम्रता और श्रद्धा के साथ ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा देता है।
यदि आप भी इस भजन के माध्यम से भगवान के प्रति अपनी आस्था को और मजबूत करना चाहते हैं, तो इसके अर्थ को समझकर और पूरे मन से इसका गायन या श्रवण अवश्य करें। यह भजन आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतुलन लाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
भगत के वश में है भगवान,
भक्त बिना ये कुछ भी नहीं है।
भक्त है इसकी जान,
भगत के वश में है भगवान ।

भक्त मुरली वाले की,
रोज वृन्दावन डोले।
कृष्ण को लल्ला समझे,
कृष्ण को लल्ला बोले।
श्याम के प्यार में पागल,
हुए वो श्याम दीवानी।
अगर भजनो में लागे,
छोड़ दे दाना पानी।
प्यार करण लागी इससे,
अपने पुत्र समान।
भगत के वश में है भगवान ।
वो अपने कृष्ण लला को,
कलेजे लगा कर रखे।
हमेशा सजा कर रखे,
के लाड लड़ा कर रखे।
वो दिन में भाग के देखे,
के रात में जाग के देखे।
कभी अपने कमरे से,
श्याम को जाक के देखे।
अपनी जान से ज्यादा रखती,
अपने लला का ध्यान।
भगत के वश में है भगवान ।
वो लल्ला लल्ला पुकारे,
हाय क्या जुल्म हुआ रे।
बुढ़ापा बिगड़ गया जी,
लाल मेरा कैसे गिरा रे।
जाओ डॉक्टर को लाओ,
लाल का हाल दिखाओ।
अगर इसको कुछ हो गया,
मुझे भी मार गिराओ।
रोते रोते पागल हो गई,
घर वाले परेशान।
भगत के वश में है भगवान ।
बना पीतल से मैया,
ये तेरा श्याम सलोना।
पड़ा बेजान है ये,
जैसे मिठ्ठी का खिलौना।
सारी दुनिया में ढूंढो,
बेहेम की दवा नहीं है।
चोट पीतल को आये,
ऐसा तो हुआ नहीं है।
केवल तेरी ममता है ये,
मूर्ति है बेजान।
भगत के वश में है भगवान ।
ज्यूही सीने से लगाया,
और डॉक्टर चकराया।
उसने कई बार लगाया,
पसीना झम कर आया।
देख ये अद्भुद माया,
रह गया हक्का बक्का।
पसीना लगा पोछने,
छूट गया उसका छक्का।
धड़क रहा सीना लल्ला का,
मूर्ति में थे प्राण।
भगत के वश में है भगवान ।
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ये लल्ला मचल गया था।
तुम्हारी गोद में आने,
जरा सा उछल गया था।
तू इसको गोद में ले ले,
लाल मुस्काने लगेगा।
गोद में खुद भी नाचे,
तुमे भी नाचने लगेगा।
कस के पकड़ियो लल्ला तेरा,
थोड़ा सा सैतान।
भगत के वश में है भगवान ।
देख तेरे लाल की माया,
बड़ा गबरा रहा हु।
जहा से तू लल्ला लाई,
वही पे जा रहा हु।
बुला कर तुमने मुझको,
बड़ा अहसान किया है।
आज से सारा जीवन,
उसी के नाम किया है।
एक अहसान कर दे,
तेरेलल्ला से कह दे।
वही वृन्दावन में माँ,
ये डॉक्टर प्राण दे दे।
बनवारी माँ तू नहीं पागल,
पागल सारा जहा।
भगत के वश में है भगवान ।
माँ की ममता के आगे,
देखो भगवन हारे।
एक पत्थर की मूर्ति,
देखो किलकारी मारे।
भावना होगी सच्ची,
जो दिल में प्यार होगा।
हमेशा इस धरती पे,
यु चमत्कार होगा।
मैया तुमको तेरे लला को,
कोटिन कोटि प्रणाम।
भगत के वश में है भगवान।
भक्त बिना ये कुछ भी नहीं है।
भक्त है इसकी जान।
भगत के वश में है भगवान ।
यह भजन केवल सुनने या गाने के लिए ही नहीं, बल्कि उसके भाव को अपने जीवन में उतारने के लिए भी प्रेरित करता है। यह हमें सिखाता है कि निष्कपट भक्ति, विनम्रता और श्रद्धा से हम अपने जीवन को सुख, शांति और सकारात्मकता से भर सकते हैं।
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