Aisi Laagi Lagan Meera Hogi Magan: “ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन” सिर्फ एक भजन की पंक्ति नहीं है, बल्कि यह सच्ची भक्ति और प्रेम की गहराई को दर्शाने वाला भाव है। इस एक पंक्ति में भक्त और भगवान के बीच के उस अटूट संबंध को महसूस किया जा सकता है, जहां भक्त पूरी तरह अपने आराध्य में लीन हो जाता है।
यह पंक्ति हमें Meera Bai की उस अटूट भक्ति की याद दिलाती है, जहां उन्होंने अपने जीवन के हर सुख-दुख, हर परिस्थिति में केवल श्रीकृष्ण को ही अपना सब कुछ माना। जब भक्ति इतनी गहरी हो जाती है कि संसार की हर चीज़ छोटी लगने लगे, तब मन पूरी तरह ईश्वर में रम जाता है—ठीक वैसे ही जैसे मीरा मगन हो गई थीं।
इस भाव में एक तरह की आत्मिक शांति और आनंद छिपा है, जहां न कोई चाह बचती है, न कोई डर—बस ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण ही जीवन का आधार बन जाता है। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में कोई दिखावा नहीं होता, बल्कि दिल से किया गया प्रेम ही भगवान तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग है।
है आँख वो जो, श्याम का दर्शन किया करे।
है शीश जो, प्रभु चरण में वंदन किया करे।
बेकार वो मुख है, जो रहे व्यर्थ बातों में।
मुख है वो जो, हरी नाम का सुमिरन किया करे॥
हीरे मोती से नहीं शोभा है हाथ की।
है हाथ जो भगवान् का पूजन किया करे॥
मर के भी अमर नाम है उस जीव का जग में।
प्रभु प्रेम में बलिदान जो जीवन किया करे॥

ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली, हरी गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी॥
महलों में पली, बन के जोगन चली।
महलों में पली, बन के जोगन चली।
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली गली गली, हरी गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन
कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं,
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी।
कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं,
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी।
बैठी संतो के संग, रंगी मोहन के रंग,
मीरा प्रेमी प्रीतम को मनाने लगी।
वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी॥
महलों में पली, बन के जोगन चली।
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥
ऐसी लागी लगन
राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया,
मीरा सागर में सरिता समाने लगी।
राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया,
मीरा सागर में सरिता समाने लगी।
दुःख लाखों सहे, मुख से गोविन्द कहे,
मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी।
वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी॥
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन।
वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी॥
महलों में पली, बन के जोगन चली।
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥
“ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन” (Aisi Laagi Lagan, Meera Hogi Magan) जैसी पंक्तियां हमें सच्ची भक्ति के उस रूप से परिचित कराती हैं, जहां प्रेम और समर्पण की कोई सीमा नहीं होती। यह केवल शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसी अनुभूति है जो मन को शांति, संतोष और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास से भर देती है।
यह भाव हमें सिखाता है कि जब भक्ति दिल से की जाती है, तो जीवन की परेशानियां भी छोटी लगने लगती हैं और मन हमेशा सकारात्मक बना रहता है। मीरा की तरह अगर हम भी अपने ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम और समर्पण रखें, तो जीवन में आध्यात्मिक आनंद और सुकून का अनुभव किया जा सकता है।