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March 11, 2026 Blog

Ramchandra Keh Gaye Siya Se Lyrics : यहाँ पढ़े रामचंद्र कह गए सिया से भजन के सम्पूर्ण बोल

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Ramchandra Keh Gaye Siya Se: “रामचंद्र कह गए सिया से” हिंदी सिनेमा के उन सदाबहार गीतों में से एक है, जो समय के साथ-साथ और भी अधिक प्रासंगिक लगता है। यह गीत वर्ष 1970 में आई प्रसिद्ध फिल्म गोपी का है और अपने गहरे अर्थ तथा सामाजिक संदेश के कारण आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है। इस गीत में समाज में आने वाले बदलावों और कलयुग की स्थितियों को सरल शब्दों में दर्शाया गया है, जिससे श्रोता आसानी से जुड़ाव महसूस करते हैं।

इस गीत को अपनी भावपूर्ण आवाज़ से प्रसिद्ध गायक महेंद्र कपूर ने गाया है। गीत के बोल जाने-माने गीतकार राजेन्द्र कृष्ण ने लिखे हैं, जबकि इसका संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया है। इन सभी की रचनात्मकता ने मिलकर इस गीत को एक विशेष पहचान दी, जो आज भी श्रोताओं के दिलों में बसी हुई है।

फिल्म गोपी में इस गीत को एक खास संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है, जहाँ इसके माध्यम से समाज में बढ़ती स्वार्थ प्रवृत्ति, नैतिक मूल्यों में गिरावट और बदलती सोच को दर्शाया गया है। गीत के शब्द भगवान राम और माता सीता के संवाद के रूप में कलयुग की परिस्थितियों की कल्पना करते हैं, जिससे यह केवल एक मनोरंजक गीत ही नहीं बल्कि एक विचारपूर्ण संदेश भी बन जाता है।

फिल्म में दिलीप कुमार, सायरा बानो, ओम प्रकाश और प्राण जैसे दिग्गज कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। इन कलाकारों के शानदार अभिनय ने फिल्म को और भी प्रभावशाली बना दिया। खासतौर पर दिलीप कुमार का अभिनय दर्शकों को गहराई से प्रभावित करता है और गीत के भाव को और मजबूत बनाता है।

आज भी “रामचंद्र कह गए सिया से” केवल एक पुराना फिल्मी गीत नहीं है, बल्कि समाज के बदलते स्वरूप पर एक सार्थक टिप्पणी के रूप में याद किया जाता है। यही कारण है कि यह गीत कई पीढ़ियों तक सुना और सराहा जाता रहा है और आगे भी अपनी लोकप्रियता बनाए रखेगा।

ram ji bhajan lyrics


!! रामचंद्र कह गए सिया से !!
!! RamChandra Kah Gaye Siya Se Lyrics !!


हे जी रे... हे जी रे...

हे जी रे...

हे रामचंद्र कह गए सिया से

रामचंद्र कह गए सिया से

ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का

कौआ मोती खाएगा

हे जी रे...


सिया ने पूछा भगवन!

कलयुग में धर्म - कर्म को

कोई नहीं मानेगा?'

तो प्रभु बोले


धर्म भी होगा कर्म भी होगा

धर्म भी होगा कर्म भी होगा

परंतु शर्म नहीं होगी

बात बात में मात-पिता को

बात बात में मात-पिता को

बेटा आँख दिखाएगा


हे रामचंद्र कह गए सिया से...

राजा और प्रजा दोनों में

होगी निसिदिन खेचातानी खेचातानी

कदम कदम पर करेंगे दोनों

अपनी अपनी मनमानी,

हे...


हे जिसके हाथ में होगी लाठी

जिसके हाथ में होगी लाठी

भैंस वही ले जाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का

कौआ मोती खाएगा

हे रामचंद्र कह गए सिया से...


सुनो सिया कलयुग में

काला धन और काले मन होंगे

काले मन होंगे


चोर उच्चक्के नगर सेठ,

और प्रभु भक्त निर्धन होंगे

निर्धन होंगे


जो होगा लोभी और भोगी

जो होगा लोभी और भोगी

वो जोगी कहलाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का

कौआ मोती खरग


हे रामचंद्र कह गए सिया से...

मंदिर सूना सूना होगा

भरी रहेंगी मधुशाला, मधुशाला

पिता के संग संग भरी सभा में

नाचेंगी घर की बाला, घर की बाला


हे केसा कन्यादान पिता ही

केसा कन्यादान पिता ही

कन्या का धन खाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का

कौआ मोती खाएगा


हे रामचंद्र कह गए सिया से

रामचंद्र कह गए सिया से

ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का

कौआ मोती खाएगा

हे जी रे...


हे मूरख की प्रीत बुरी

जुए की जीत बुरी

बुरे संग बैठ ते भागे ही भागे,

भागे ही भागे

हे काजल की कोठरी में

कैसे ही जतन करो

काजल का दाग भाई लागे ही लागे भाई

काजल का दाग भाई लागे ही लागे

हे जी रे... हे जी रे...


हे कितना जती को कोई कितना सती हो कोई

कामनी के संग काम जागे ही जागे,

जागे ही जागे

सुनो कहे गोपीराम जिसका है नाम काम

उसका तो फंद गले लागे ही लागे रे भाई

उसका तो फंद गले लागे ही लागे

हे जी रे... हे जी रे…


निष्कर्ष (Conclusion)

“रामचंद्र कह गए सिया से” केवल एक फिल्मी गीत भर नहीं है, बल्कि समाज की सच्चाइयों को दर्शाने वाला एक गहरा संदेश भी देता है। Ramchandra Keh Gaye Siya Se गीत के शब्द कलयुग की परिस्थितियों और बदलते मानवीय मूल्यों को सरल और प्रभावशाली तरीके से सामने रखते हैं। यही कारण है कि यह गीत सुनने वाले को केवल मनोरंजन ही नहीं देता, बल्कि सोचने के लिए भी प्रेरित करता है।

Gopi फिल्म का यह गीत आज भी अपनी अर्थपूर्ण पंक्तियों और मधुर संगीत के कारण लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता है। समय बदलने के बावजूद इसके शब्द आज भी उतने ही प्रासंगिक महसूस होते हैं।

कुल मिलाकर, यह गीत हमें जीवन के मूल्यों, सच्चाई और नैतिकता की याद दिलाता है। यही वजह है कि “रामचंद्र कह गए सिया से” आज भी पुराने हिंदी गीतों में एक खास पहचान रखता है और पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों द्वारा पसंद किया जाता रहेगा।