Parama Ekadashi 2026: परम एकादशी हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले सबसे पवित्र व्रतों में से एक मानी जाती है। यह एकादशी अधिक मास (मलमास) के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है। “परम” शब्द का अर्थ है सबसे श्रेष्ठ या सर्वोच्च, इसलिए इस दिन का व्रत भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
साल 2026 में परम एकादशी (Parama Ekadashi 2026) गुरुवार के दिन पड़ रही है। यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और पुरुषोत्तम भगवान की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से जीवन में आने वाली परेशानियां, गरीबी और नकारात्मकता दूर होती है। साथ ही व्यक्ति को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
एकादशी तिथि: 11 जून 2026
दिन: गुरुवार
पारण समय: 12 जून 2026, सुबह 5:44 से 8:25 बजे तक (IST)
एकादशी व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि में पारणा करके किया जाता है। पारणा का अर्थ है व्रत खोलना।
हिंदू धर्मग्रंथों में परम एकादशी (Parama Ekadashi) को अत्यंत प्रभावशाली व्रत बताया गया है। स्कंद पुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की महिमा बताते हुए कहा था कि इस एक दिन के व्रत का पुण्य अश्वमेध यज्ञ के बराबर माना जाता है।
यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक माना जाता है जो जीवन में आर्थिक परेशानियों, कष्टों या मानसिक तनाव से गुजर रहे होते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से यह व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धन के देवता कुबेर ने भी इसी व्रत का पालन किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें धन का स्वामी बना दिया।
परम एकादशी (Parama Ekadashi) के दिन पूजा करने के लिए कुछ सरल नियमों का पालन किया जाता है।
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
घर के मंदिर में भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। उन्हें तुलसी के पत्ते, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
इस दिन “ॐ नमो नारायणाय” या “ॐ विष्णवे नमः” मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।
कुछ लोग पूरे दिन निराहार व्रत रखते हैं, जबकि कई लोग फल, दूध या हल्का सात्विक भोजन लेते हैं।
जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अनाज दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
अगले दिन ब्राह्मण या गरीबों को भोजन कराने के बाद व्रत खोला जाता है।
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह लगभग हर तीन साल में एक बार आता है। इस पूरे महीने को भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है।
इसी कारण इस महीने में आने वाली परम एकादशी (Parama Ekadashi) का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस दिन किया गया जप, तप, दान और व्रत कई गुना फल देता है।
परम एकादशी (Parama Ekadashi) का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है। अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
जो भक्त श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। साथ ही यह व्रत मन को शुद्ध करने और भगवान के प्रति भक्ति को मजबूत बनाने का भी एक सुंदर माध्यम है।