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March 6, 2026 Blog

Parama Ekadashi 2026: कब है परम एकादशी ? जाने तिथि, महत्व, व्रत कथा और पूजा विधि

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Parama Ekadashi 2026: परम एकादशी हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले सबसे पवित्र व्रतों में से एक मानी जाती है। यह एकादशी अधिक मास (मलमास) के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है। “परम” शब्द का अर्थ है सबसे श्रेष्ठ या सर्वोच्च, इसलिए इस दिन का व्रत भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

साल 2026 में परम एकादशी (Parama Ekadashi 2026) गुरुवार के दिन पड़ रही है। यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और पुरुषोत्तम भगवान की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से जीवन में आने वाली परेशानियां, गरीबी और नकारात्मकता दूर होती है। साथ ही व्यक्ति को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

परम एकादशी 2026 की तिथि (Parama Ekadashi 2026 date and time)

एकादशी तिथि: 11 जून 2026

दिन: गुरुवार

पारण समय: 12 जून 2026, सुबह 5:44 से 8:25 बजे तक (IST)

एकादशी व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि में पारणा करके किया जाता है। पारणा का अर्थ है व्रत खोलना।

परम एकादशी का धार्मिक महत्व (Religious Significance of Parama Ekadashi)

हिंदू धर्मग्रंथों में परम एकादशी (Parama Ekadashi) को अत्यंत प्रभावशाली व्रत बताया गया है। स्कंद पुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की महिमा बताते हुए कहा था कि इस एक दिन के व्रत का पुण्य अश्वमेध यज्ञ के बराबर माना जाता है।

यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक माना जाता है जो जीवन में आर्थिक परेशानियों, कष्टों या मानसिक तनाव से गुजर रहे होते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से यह व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धन के देवता कुबेर ने भी इसी व्रत का पालन किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें धन का स्वामी बना दिया।

parama ekadashi 2026

परम एकादशी व्रत कथा (Parama Ekadashi Vrat Katha)

  • परम एकादशी से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा का उल्लेख पुराणों में मिलता है।
  • प्राचीन समय में काम्पिल्य नगर में सुमेधा नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम पवित्रा था। दोनों बहुत धार्मिक और ईमानदार थे, लेकिन उनके जीवन में अत्यधिक गरीबी थी। कई बार उनके पास खाने के लिए भी पर्याप्त भोजन नहीं होता था, फिर भी वे अपने घर आने वाले अतिथियों की सेवा करना नहीं भूलते थे।
  • एक दिन उनके घर महान ऋषि कौंडिन्य आए। सुमेधा और उनकी पत्नी ने अपनी गरीबी के बावजूद ऋषि का आदर-सत्कार किया। उनकी भक्ति और सेवा देखकर ऋषि प्रसन्न हुए और उन्होंने पूछा कि वे इतने दुखी क्यों हैं।
  • सुमेधा ने विनम्रता से कहा, “हे ऋषिवर, हम भगवान की भक्ति तो करते हैं, लेकिन गरीबी से बहुत परेशान हैं। कृपया हमें इसका उपाय बताइए।”
  • तब ऋषि कौंडिन्य ने उन्हें अधिक मास में आने वाली परम एकादशी का व्रत (Parama Ekadashi Vrat) रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह व्रत भगवान पुरुषोत्तम को अत्यंत प्रिय है और इसे करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।
  • ऋषि की बात मानकर सुमेधा और पवित्रा ने पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखा। कहते हैं कि उसी रात एक राजकुमार उनके घर आया और उन्हें रहने के लिए घर, धन और अन्न प्रदान किया। धीरे-धीरे उनकी गरीबी समाप्त हो गई और उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर गया। अंत में दोनों ने भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष प्राप्त किया।


परम एकादशी की पूजा विधि (Worship method of Parama Ekadashi)

परम एकादशी (Parama Ekadashi) के दिन पूजा करने के लिए कुछ सरल नियमों का पालन किया जाता है।

  1. सुबह जल्दी उठें

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।

  1. भगवान विष्णु की पूजा करें

घर के मंदिर में भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। उन्हें तुलसी के पत्ते, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।

  1. मंत्र जाप करें

इस दिन “ॐ नमो नारायणाय” या “ॐ विष्णवे नमः” मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।

  1. व्रत का पालन करें

कुछ लोग पूरे दिन निराहार व्रत रखते हैं, जबकि कई लोग फल, दूध या हल्का सात्विक भोजन लेते हैं।

  1. दान और सेवा करें

जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अनाज दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

  1. द्वादशी के दिन पारणा करें

अगले दिन ब्राह्मण या गरीबों को भोजन कराने के बाद व्रत खोला जाता है।

परम एकादशी व्रत के नियम (Rules of Parama Ekadashi fast)

  • व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से मानी जाती है।
  • इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और लहसुन-प्याज से परहेज करना चाहिए।
  • एकादशी के दिन मन, वाणी और व्यवहार को शुद्ध रखना चाहिए।
  • झूठ बोलने, क्रोध करने और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए।
  • रात में भगवान विष्णु का भजन या कीर्तन करना शुभ माना जाता है।

परम एकादशी के लाभ (Benefits of Parama Ekadashi)

  • परम एकादशी का व्रत केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • यह व्रत व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता और दुखों को कम करने में मदद करता है।
  • भगवान विष्णु की कृपा से धन और समृद्धि प्राप्त होने की मान्यता है।
  • इस व्रत से व्यक्ति के पिछले जन्मों के पाप भी कम होते हैं।
  • मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  • आध्यात्मिक रूप से यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी माना जाता है।

अधिक मास और परम एकादशी का संबंध

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह लगभग हर तीन साल में एक बार आता है। इस पूरे महीने को भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है।

इसी कारण इस महीने में आने वाली परम एकादशी (Parama Ekadashi) का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस दिन किया गया जप, तप, दान और व्रत कई गुना फल देता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

परम एकादशी (Parama Ekadashi) का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत पवित्र अवसर माना जाता है। अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

जो भक्त श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। साथ ही यह व्रत मन को शुद्ध करने और भगवान के प्रति भक्ति को मजबूत बनाने का भी एक सुंदर माध्यम है।