June 20, 2023 Blog

अष्टग्रहों के दोषों का प्रभाव और काल भैरव अष्टक के पाठ से उनका निवारण (Kalabhairava Ashtakam)

BY : STARZSPEAK

काल भैरव अष्टकम (Kalabhairava Ashtakam), एक प्रमुख देवता के रूप में जानी जाती है जिसे हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। भगवान काल भैरव को भोलेनाथ शिव के एक अभिन्न रूप माना जाता है जिनकी पूजा और अराधना से व्यक्ति को अनुग्रह प्राप्त होता है। काल भैरव अष्टकम, जिसे श्रद्धा भक्ति के साथ पठने से भक्त को शक्ति, सुरक्षा और साधना में सफलता मिलती है। इस अष्टकम में काल भैरव के गुण, महिमा और महत्व का वर्णन किया गया है जो उनके भक्तों को प्रेरित करता है और उनकी आराधना में नवीनता और आनंद प्रदान करता है।

KaalBhairava Ashtakam in Hindi or 

(Kalabhairava Ashtakam) – कालभैरवाष्टकम् 

देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् ।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥1॥

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं
नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् ।
कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥2॥

शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं
श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥3॥

भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं
भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् ।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥4॥

धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं
कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम् ।
स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥5॥

रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं
नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम् ।
मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥6॥

अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं
दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम् ।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥7॥

भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं
काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम् ।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥8॥

कालभैरवाष्टकं पठंति ये मनोहरं
ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम् ।
शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं
प्रयान्ति कालभैरवांघ्रिसन्निधिं नरा ध्रुवम् ॥9॥

इथि श्रीमास्चंकराचार्य विरचितं कालभैरवाष्टकम् सम्पूर्णम ||


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Kalabhairava Ashtakam

कालभैरवाष्टकम् (Kalabhairava Ashtakam) हिंदी अर्थ सहित 

जिनके चरणों की पूजा देवराज इंद्र नित्य करते हैं, जो चंद्रमा और सांप (सर्प) को शिरोभूषण के रूप में धारण करते हैं, जो दिगंबर जी के वेश में हैं और जिनकी पूजा नारद और अन्य योगियों द्वारा की जाती है, मैं उन काशी के नाथ कालभैरव को भजता हूं।

जो सूर्य के समान प्रकाश फैलाते हैं, भगवान का अभिन्न अंश हैं, जिनका गला नीला है और संसारिक सुख-दुख का निर्माता हैं और जिनके तीन नेत्र हैं। जो काल के भी काल हैं, जिनके त्रिशूल से तीनों लोकों का पालन किया जाता है और जो अमर हैं, मैं उन काशी के नाथ कालभैरव को भजता हूं।

जो दोनों हाथों में त्रिशूल, फण्डा, कुल्हाड़ी और दंड धारण करते हैं, सृष्टि का कारण हैं, जो आदिदेवता के अधिष्ठान हैं और जो संसारिक दुःखों से परे हैं, जिन्हें तांडव नृत्य का आनंद है, मैं उन काशी के नाथ कालभैरव को भजता हूं।

जो मुक्ति प्रदान करने वाले हैं, शुभता और आनंद के रूप में विभूषित हैं, जो भक्तों का सदैव प्रेम करते हैं और जो तीनों लोकों में स्थित हैं। जो घंटीयों को अपनी कमर में धारण करते हैं, मैं उन काशी के नाथ कालभैरव को भजता हूं।

जो सभी धर्मों की संरक्षा करते हैं और अधर्म का नाश करते हैं, कर्मों से मुक्ति प्रदान करते हैं। जो सोने रंग के सांप से सजे हुए हैं, मैं उन काशी के नाथ कालभैरव को भजता हूं।

जिनके पैरों पर रत्न जड़े हैं, जो इष्ट देवता और परम पवित्र हैं। जो दांतों से मृत्यु का भय दूर करते हैं, मैं उन काशी के नाथ कालभैरव को भजता हूं।

जिनकी हंसी की ध्वनि से ब्रह्मा के सभी कृतियाँ थम जाती हैं, जिनकी दृष्टि से पापों का नाश होता है, जो अष्ट सिद्धियाँ प्रदान करते हैं और मुंडी धारण करते हैं, मैं उन काशी के नाथ कालभैरव को भजता हूं।

जो भूतों और प्रेतों के राजा हैं और विशाल कीर्ति प्रदान करने वाले हैं, जो सत्य और न्याय का पथ दिखाते हैं, जो जगत के स्वामी हैं, मैं उन काशी के नाथ कालभैरव को भजता हूं।

जो कालभैरव की पूजा करते हैं, वे ज्ञान और मोक्ष को प्राप्त करते हैं। पुण्य प्राप्त करते हैं और मृत्यु के बाद शोक, दुःख, क्रोध आदि को नष्ट करने वाले भगवान कालभैरव के पवित्र चरणों को प्राप्त करते हैं।

कालभैरवाष्टकम् (Kalabhairava Ashtakam) पढ़ने के फायदे 

कालभैरवाष्टकम् को पढ़ने के कई फायदे हैं। यह श्लोक संग्रह कशी के नाथ कालभैरव की महिमा, शक्ति और आराधना को स्तुति करता है। इसके पठन से निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं:

  • शांति और सुकून: कालभैरवाष्टकम् का पठन शांति और सुकून को लाने में सहायता करता है। यह मन को स्थिर करता है और चिंताओं और तनाव से राहत प्रदान करता है।
  • रक्षा और सुरक्षा: कालभैरवाष्टकम् का अधिवेशन सुरक्षा और रक्षा की शक्ति को बढ़ाता है। यह भय, आपत्ति और शत्रुओं से रक्षा करने में मदद करता है।
  • ज्ञान और बुद्धि: इस अष्टकम् का पठन ज्ञान और बुद्धि को प्राप्त करने में सहायता करता है। यह विद्यार्थियों, शिक्षकों और ज्ञानी लोगों को आवश्यक संज्ञान और विचारशक्ति प्रदान करता है।
  • भक्ति और समर्पण: कालभैरवाष्टकम् का पाठ भक्ति और समर्पण की भावना को जागृत करता है। इसके माध्यम से भक्त अपनी ईश्वरीय भावना को प्रकट करते हैं और अपने आपको उनकी सेवा में समर्पित करते हैं।
  • आरोग्य और स्वास्थ्य: कालभैरवाष्टकम् का पठन आरोग्य और स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकता है। यह रोगों के निर्मूलन, शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए शक्ति प्रदान करता है।

यदि किसी व्यक्ति को कालभैरवाष्टकम् के पाठ की नियमित रूप से अभ्यास करना चाहिए, तो उसे इन फायदों को अनुभव करने की संभावना होती है। हालांकि, हमेशा ध्यान दें कि किसी भी पूजा, मंत्र या अष्टकम् का पाठ करने से पहले उचित विधि, मार्गदर्शन और गुरु की सलाह लेना आवश्यक है।

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