Desktop Special Offer Mobile Special Offer
October 21, 2026 Blog

Gaun Paush Putrada Ekadashi 2027: जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जीवन में संतान का होना हर माता-पिता के लिए सबसे बड़ी खुशी होती है। जब घर के आंगन में नन्हे कदमों की आहट गूंजती है, तो जीवन का हर दुख धुंधला पड़ जाता है। लेकिन कई बार प्रारब्ध और भाग्य के चलते यह सुख आसानी से नहीं मिलता। ऐसे में सनातन धर्म का अटूट विश्वास और भक्ति मार्ग ही जीवन में नया सवेरा लाता है। पौष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली गौण पौष पुत्रदा एकादशी 2027 (Gauna Pausha Putrada Ekadashi 2027) भगवान श्री हरि विष्णु का वह पावन वरदान है जो सूनी गोद को भर देता है और जीवन से हर निराशा को दूर करता है। वैष्णव संप्रदाय और संन्यासियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाने वाली यह एकादशी भक्ति, वात्सल्य और मोक्ष की त्रिवेणी है। आइए जानते हैं वर्ष 2027 में गौण पौष पुत्रदा एकादशी कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और किस विधि से पूजन करने पर प्रभु की असीम कृपा प्राप्त होती है।

यदि आप भी संतान सुख और भगवान विष्णु का असीम आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो गौण पौष पुत्रदा एकादशी 2027 की तिथि (Gauna Pausha Putrada Ekadashi 2027 Date) का यह अवसर आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, विष्णु पूजा विधि (Vishnu Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।

Papankusha Ekadashi 2026: 22 अक्टूबर को है पापांकुशा एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और पापों से मुक्ति की कथा

गौण पौष पुत्रदा एकादशी क्या है (What is Gauna Pausha Putrada Ekadashi?)

पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि जब दो दिनों तक व्याप्त होती है या जब एकादशी तिथि दूषित होकर द्वादशी से युक्त होती है, तब दूसरे दिन गौण एकादशी का व्रत रखा जाता है। इसे वैष्णव एकादशी (Vaishnava Ekadashi) या दूजी एकादशी भी कहा जाता है। गौण पौष पुत्रदा एकादशी मुख्य रूप से वैष्णव मत के अनुयायियों, संन्यासियों, योगियों और साधकों द्वारा रखी जाती है। गृहस्थ जन सामान्यतः गृहस्थ एकादशी रखते हैं, जबकि वैष्णव संप्रदाय शुद्ध एकादशी के रूप में दूसरे दिन गौण व्रत का पालन करता है। यह व्रत योग्य संतान की प्राप्ति, उसकी लंबी आयु और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने के लिए सर्वोपरि माना गया है।

गौण पौष पुत्रदा एकादशी 2027: तिथि और शुभ मुहूर्त (Gauna Pausha Putrada Ekadashi 2027 Date and Shubh Muhurat)

वर्ष 2027 में गौण पौष पुत्रदा एकादशी का यह पावन व्रत 19 जनवरी को रखा जाएगा। वैष्णव मतानुसार सही तिथि और मुहूर्त में किया गया पूजन विशेष फलदायी होता है। गौण एकादशी शुभ मुहूर्त (Gauna Ekadashi Shubh Muhurat) की जानकारी नीचे दी गई है:

  • गौण एकादशी तिथि (Gauna Pausha Putrada Ekadashi 2027 Date): 19 जनवरी 2027, मंगलवार

  • एकादशी तिथि प्रारम्भ: 18 जनवरी 2027 को देर रात

  • एकादशी तिथि समाप्त: 19 जनवरी 2027 को सायंकाल

  • पूजा का शुभ मुहूर्त (Puja Shubh Muhurat): 19 जनवरी 2027 को प्रातः 07:15 बजे से प्रातः 11:15 बजे तक

  • व्रत पारण का समय (Parana Time): 20 जनवरी 2027 को प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में

(नोट: वैष्णव नियमों और पंचांग विधान के अनुसार 19 जनवरी 2027 को ही गौण पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखना शास्त्रसम्मत माना जाएगा।)

गौण पौष पुत्रदा एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Significance of Gauna Pausha Putrada Ekadashi)

गौण पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व स्वयं शास्त्रों में अत्यंत पवित्र और फलदायी बताया गया है। श्री हरि विष्णु के बाल स्वरूप की भक्ति में लीन होने का यह उत्तम अवसर होता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से यह व्रत केवल संतान प्राप्ति का साधन ही नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के संचित पापों को भस्म कर आत्मा को शुद्ध करता है। जब साधक निष्काम भाव या वात्सल्य भाव से भगवान जनार्दन की शरण में आता है, तो उसके कुल का उद्धार होता है। जिन परिवारों में पूर्वजों के दोष या पितृ बाधा के कारण वंश वृद्धि रुकी होती है, उनके लिए गौण पुत्रदा एकादशी व्रत (Gauna Putrada Ekadashi Vrat) अमोघ औषधि के समान काम करता है।

गौण पौष पुत्रदा एकादशी की सम्पूर्ण पूजा विधि (Gauna Pausha Putrada Ekadashi Puja Vidhi)

Gaun Paush Putrada Ekadashi 2027 FESTIVAL

Guruvayur Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

भगवान श्री हरि विष्णु को प्रसन्न करने के लिए एकादशी पर शुद्धता और भक्तिभाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण पूजा विधि:

  1. प्रातः स्नान और संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें और हाथ में जल, अक्षत व तिल लेकर गौण एकादशी व्रत का संकल्प लें।

  2. चौकी की स्थापना: घर के मंदिर या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  3. दीपक और पंचामृत स्नान: देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। प्रभु की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराकर पीले वस्त्र अर्पित करें।

  4. श्रृंगार और अर्पण: श्री हरि को पीले फूल, पीला चंदन, अक्षत, तुलसी पत्र और मौसमी फल चढ़ाएं।

  5. विशेष भोग: भगवान को माखन-मिश्री, बेसन के लड्डू और पंचामृत का भोग लगाएं। याद रखें कि भोग में तुलसी पत्र होना अनिवार्य है।

  6. मंत्र जाप और कथा पाठ: गौण पौष पुत्रदा एकादशी की पावन कथा का पाठ करें और विष्णु मंत्र (Vishnu Mantra) 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का कम से कम 108 बार जाप करें।

  7. आरती: अंत में कपूर से आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें।

गौण पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के मुख्य नियम (Gauna Pausha Putrada Ekadashi Rules)

  • व्रत से एक दिन पूर्व यानी दशमी तिथि से ही केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

  • एकादशी के दिन पूर्ण रूप से निराहार या केवल फलाहार रहकर ही व्रत रखें।

  • इस पावन दिन किसी के प्रति मन में द्वेष, ईर्ष्या, क्रोध या नकारात्मक भाव न लाएं।

  • पूरी रात जागकर भगवान के नाम का भजन और संकीर्तन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

इस पावन व्रत से मिलने वाले लाभ (Benefits of Gauna Pausha Putrada Ekadashi)

  • योग्य और गुणी संतान की प्राप्ति: निसंतान दंपत्तियों को भगवान विष्णु की कृपा से सुंदर, आरोग्य और गुणवान संतान का सुख मिलता है।

  • संतान की सुरक्षा और उन्नति: बच्चों के जीवन में आने वाले संकट, बीमारियां और बाधाएं दूर होती हैं।

  • पापों का विनाश: जाने-अनजाने में हुए जन्मों-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं।

  • वैकुंठ लोक की प्राप्ति: जीवन के अंतिम समय में मोक्ष प्राप्त होता है और जीव श्री हरि के चरणों में स्थान पाता है।

क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts)

क्या करें:

  • भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और पीली मिठाइयां अर्पित करें।

  • गरीबों और जरूरतमंदों को तिल, गुड़, अन्न और गर्म कपड़ों का दान करें।

  • तुलसी माता के समक्ष देसी घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।

क्या न करें:

  • एकादशी के दिन भोजन या पूजा में चावल का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है।

  • इस दिन तुलसी पत्र को भूलकर भी न तोड़ें, एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

  • घर में झाड़ू-पोछा करते समय ध्यान रखें कि किसी सूक्ष्म जीव की हत्या न हो।

  • लहसुन, प्याज, मांसाहार या शराब का सेवन बिल्कुल न करें।

गौण पौष पुत्रदा एकादशी की पावन कथा (Gauna Pausha Putrada Ekadashi Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रावती नगरी में राजा सुकेतुमान और उनकी रानी शैव्या राज करते थे। उनके पास अपार धन-संपदा थी, परंतु कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और रानी हमेशा दुखी रहते थे। राजा को हर समय यही चिंता सताती थी कि उनके बाद उनका पिंडदान कौन करेगा और वंश कैसे आगे बढ़ेगा।

इसी उदासी में एक दिन राजा जंगल में चले गए। घूमते-घूमते वे एक विशाल सरोवर के पास पहुंचे, जहां कई मुनि आश्रम बनाकर जप-तप कर रहे थे। राजा ने ऋषियों को प्रणाम किया और अपनी व्यथा सुनाई।

ऋषियों ने राजा को बताया कि आज पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी है। यदि तुम अपनी पत्नी के साथ पूरी निष्ठा से इस एकादशी का व्रत रखोगे, तो भगवान विष्णु अवश्य ही तुम्हें पुत्र रत्न प्रदान करेंगे। मुनियों की आज्ञा पाकर राजा सुकेतुमान अपने राज्य लौटे और रानी के साथ नियमपूर्वक पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा। इस व्रत के पुण्य प्रताप से रानी ने एक अत्यंत तेजस्वी और धर्मपरायण पुत्र को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर अपने राज्य का नाम रोशन किया।

निष्कर्ष (Conclusion)

गौण पौष पुत्रदा एकादशी का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि जब हम दुनिया के हर दरवाजे से निराश हो जाते हैं, तब भी भगवान श्री हरि का द्वार हमारे लिए सदैव खुला रहता है। वर्ष 2027 में 19 जनवरी को मिलने वाले इस शुभ अवसर को हाथ से न जाने दें। यदि आप भी संतान की कामना करते हैं या अपने बच्चों के मंगल जीवन की इच्छा रखते हैं, तो पूरे भक्तिभाव से गौण पौष पुत्रदा एकादशी 2027 (Gauna Pausha Putrada Ekadashi 2027) का व्रत रखें। प्रभु वासुदेव आपकी हर मनोकामना पूरी करेंगे और आपके जीवन को सुख-समृद्धि से भर देंगे।

Gauna Devuthani Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: गौण पौष पुत्रदा एकादशी 2027 (Gauna Pausha Putrada Ekadashi 2027) में कब है?

वैष्णव संप्रदाय और पंचांग के अनुसार गौण पौष पुत्रदा एकादशी 19 जनवरी 2027, मंगलवार को मनाई जाएगी।

Q2: सामान्य एकादशी और गौण एकादशी में क्या अंतर है?

गृहस्थ लोग पहले दिन पड़ने वाली एकादशी (स्मार्त एकादशी) का व्रत रखते हैं, जबकि वैष्णव संप्रदाय और संन्यासी दूजी या शुद्ध एकादशी को गौण एकादशी के रूप में रखते हैं।

Q3: एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाया जाता?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल खाने से महर्षि मेधा के अंगों का सेवन करने जैसा पाप लगता है और व्यक्ति का मन चंचल होता है।

Q4: गौण एकादशी व्रत का पारण कब करना चाहिए?

इस व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में करना चाहिए।

Q5: क्या यह व्रत पति-पत्नी दोनों साथ रख सकते हैं?

जी हां, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले पति और पत्नी दोनों यदि साथ मिलकर यह व्रत रखते हैं तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.