एक मां का हृदय अपनी संतान के लिए कितना ममतामयी और रक्षात्मक होता है, इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। बच्चों के जीवन पर आने वाली छोटी से छोटी आंच को भी मां अपने आंचल में समेट लेती है। सनातन धर्म में मां के इसी निःस्वार्थ वात्सल्य और भक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक है सकट चौथ 2027 (Sakat Chauth 2027) का पावन व्रत। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाने वाला यह व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि एक मां का भगवान गणेश पर अटूट विश्वास है कि बप्पा उनके लाल के हर संकट को दूर करेंगे। आइए जानते हैं कि वर्ष 2027 में सकट चौथ कब है (Sakat Chauth Kab Hai), चंद्रोदय का शुभ समय क्या रहेगा और किस विधि से पूजन करने पर विघ्नहर्ता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
यदि आप भी अपनी संतान की लंबी आयु और सफलता के लिए गणेश जी की विशेष कृपा पाना चाहती हैं, तो सकट चौथ 2027 की तिथि (Sakat Chauth 2027 Date) का यह अवसर आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, सकट चौथ शुभ मुहूर्त (Sakat Chauth Shubh Muhurat), गणेश पूजा विधि (Ganesh Puja Vidhi) और पौराणिक सकट चौथ व्रत कथा (Sakat Chauth Vrat Katha)।
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माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का पर्व (Sakat Chauth Festival) के नाम से जाना जाता है। इसे तिलकुटा चौथ, संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुंड चतुर्थी और माघी चौथ भी कहते हैं। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, निरोगी काया, उत्तम स्वास्थ्य और सफलता के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के समय विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की विधिवत पूजा की जाती है और तिल तथा गुड़ के लड्डू (तिलकुटा) का भोग लगाया जाता है। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही यह व्रत पूर्ण माना जाता है। उत्तर भारत विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में यह त्यौहार बड़े ही भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है।
वर्ष 2027 में सकट चौथ का व्रत जनवरी के महीने में रखा जाएगा। इस व्रत में शाम की गणेश पूजा और रात के चंद्रोदय का विशेष महत्व होता है। सकट चौथ 2027 तिथि और मुहूर्त (Sakat Chauth 2027 Date and Time) की जानकारी नीचे दी गई है:
सकट चौथ तिथि (Sakat Chauth 2027 Date): 25 जनवरी 2027, सोमवार
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ: 25 जनवरी 2027 को प्रातःकाल से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 26 जनवरी 2027 को तड़के
संध्या गणेश पूजा मुहूर्त (Ganesh Puja Muhurat): 25 जनवरी 2027 को शाम 05:55 बजे से रात 07:35 बजे तक
चंद्रोदय समय (Sakat Chauth Moonrise Time): 25 जनवरी 2027 को रात 08:45 बजे (स्थानीय पंचांग के अनुसार)
(नोट: संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस रात को चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय होता है। इसलिए 25 जनवरी 2027, सोमवार को ही सकट चौथ का व्रत रखना शास्त्रसम्मत रहेगा।)
सकट चौथ 2027 (Sakat Chauth 2027) का महत्व शास्त्रों में अत्यंत महान बताया गया है। 'सकट' शब्द संकट का ही अपभ्रंश है, जिसका अर्थ होता है मुसीबतों का नाश होना। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान गणेश ने अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) की परिक्रमा करके ब्रह्मांड का चक्कर लगाने का पुण्य पाया था और वे देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले प्रथम पूज्य देव बने थे।
आध्यात्मिक दृष्टि से यह व्रत मां और संतान के बीच के रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाता है। जब एक मां पूरे समर्पण के साथ गणेश जी से अपनी संतान की रक्षा की गुहार लगाती है, तो सकट चौथ के उपाय (Sakat Chauth Upay) और पूजा से बप्पा उसके बच्चे की कुंडली में मौजूद बड़े से बड़े ग्रह दोष और संकट को तुरंत हर लेते हैं। इस दिन तिल का दान और सेवन करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।

गणेश जी की कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए शाम को विधि-विधान से पूजन करना चाहिए। आइए जानते हैं सकट चौथ पूजा विधि (Sakat Chauth Puja Vidhi) चरण-दर-चरण:
प्रातः स्नान और व्रत संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा के सामने हाथ में जल व अक्षत लेकर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल की तैयारी: शाम को पुनः स्वच्छ होकर घर के मंदिर या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान गणेश और मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
दीपक प्रज्वलन और तिलक: देसी घी का दीपक जलाएं। बप्पा को रोली, चंदन, अक्षत और सिंदूर का तिलक लगाएं।
दुर्वा और लाल फूल अर्पण: गणेश जी की पूजा में दुर्वा का विशेष महत्व है। उन्हें 21 दुर्वा (दूब घास), लाल कनेर या गुड़हल के फूल अर्पित करें।
तिलकुटा और भोग: तिल और गुड़ को कूटकर बनाया गया 'तिलकुटा', शकरकंद (कंदमूल), गुड़, मोदक और मौसमी फल का भोग लगाएं।
कथा पाठ और आरती: सकट चौथ व्रत कथा (Sakat Chauth Vrat Katha) पढ़ें या सुनें। इसके बाद गणेश मंत्र (Ganesh Mantra) 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जाप करें और गणेश जी की आरती करें।
चंद्रदेव को अर्घ्य: चंद्रोदय होने पर एक लोटे में जल, थोड़ा सा दूध, अक्षत, रोली और तिल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के बाद पति या बड़ों का आशीर्वाद लेकर तिलकुटा का प्रसाद खाकर व्रत खोलें।
यह व्रत मुख्य रूप से निर्जला रखा जाता है, लेकिन अस्वस्थ होने पर फलाहार लिया जा सकता है।
गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग बिल्कुल न करें।
चंद्रमा को अर्घ्य देते समय ध्यान रखें कि जल की धारा पैरों पर न पड़े।
दिनभर मन में सात्विक विचार रखें और किसी पर क्रोध न करें।
संतान की सुरक्षा और दीर्घायु: सकट चौथ के फायदे (Benefits of Sakat Chauth) से बच्चों पर आने वाले सभी छोटे-बड़े संकट, दुर्घटनाएं और बीमारियां टल जाती हैं।
शिक्षा और करियर में सफलता: बप्पा बुद्धि के दाता हैं, इसलिए बच्चों को पढ़ाई में सफलता और तेज बुद्धि मिलती है।
पारिवारिक क्लेश का नाश: घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है और दरिद्रता दूर होती है।
ऋण और रोगों से मुक्ति: जीवन के पुराने कर्ज उतरते हैं और उत्तम स्वास्थ्य मिलता है।
क्या करें:
गणेश जी को 21 दुर्वा की गांठ बनाकर अर्पित करें।
तिल, गुड़, गर्म कपड़े और कंबल गरीबों में दान करें।
चंद्रदेव के दर्शन के बाद ही अपना उपवास खोलें।
क्या न करें:
गणेश जी को भूलकर भी तुलसी पत्र न चढ़ाएं।
चंद्रमा को बिना अर्घ्य दिए भोजन या जल ग्रहण न करें।
इस दिन काले रंग के कपड़े पहनकर पूजा न करें।
तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज या मदिरा का सेवन वर्जित रखें।
पौराणिक सकट चौथ व्रत कथा (Sakat Chauth Vrat Katha) के अनुसार, एक कुम्हार अपने गांव में मिट्टी के बर्तन बनाता और उन्हें पकाने के लिए आवां (भट्टी) लगाता था। एक बार जब उसने आवां लगाया, तो बर्तन पके ही नहीं। परेशान होकर वह राजा के पास गया। राजा के पंडितों ने कहा कि हर बार आवां लगाते समय गांव के एक-एक घर से एक बच्चे की बलि देनी होगी, तभी बर्तन पकेंगे।
डर के मारे गांव वाले हर बार एक-एक बच्चे की बलि देने लगे। एक दिन एक बूढ़ी माई के इकलौते बेटे की बारी आई। वह बूढ़ी औरत सकट माता और गणेश जी की अनन्य भक्त थी। उस दिन सकट चौथ का त्यौहार था। माई ने अपने बेटे को सकट की सुपारी और दूब का बीड़ा देकर कहा कि जब तुम्हें आवां में बिठाया जाए, तो तुम मन ही मन गणेश जी का ध्यान करना और यह सुपारी पास रखना।
छोटे बच्चे को जलते हुए आवां के बीच बिठाकर ऊपर से ढक दिया गया। बूढ़ी मां अपने घर में बैठकर दिन-रात रोती हुई बप्पा से अपने बेटे की रक्षा की प्रार्थना करती रही। जब अगले दिन कुम्हार ने आवां खोला, तो वहां का दृश्य देखकर सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं।
आवां के अंदर के सारे मिट्टी के बर्तन तो पक चुके थे, लेकिन जिस जगह वह छोटा बच्चा बैठा था, वह जगह बिल्कुल ठंडी थी और वह बच्चा हंसता हुआ खेल रहा था। इतना ही नहीं, जिन बच्चों की बलि पहले दी गई थी, वे भी जीवित होकर बाहर आ गए। यह चमत्कार देखकर पूरा गांव बप्पा की जय-जयकार करने लगा। तभी से अपनी संतान की लंबी उम्र और रक्षा के लिए सकट चौथ (Sakat Chauth) का व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।
सकट चौथ 2027 (Sakat Chauth 2027) का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि जब मां का वात्सल्य और भगवान गणेश का आशीर्वाद एक साथ मिलते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। वर्ष 2027 में 25 जनवरी को आने वाले इस शुभ अवसर पर सभी माताएं भक्तिभाव से व्रत रखें, बप्पा की पूजा करें और अपनी संतान के मंगल भविष्य के लिए प्रार्थना करें। विघ्नहर्ता गणेश जी आपकी संतान की हर संकट से रक्षा करेंगे और आपके घर को खुशियों से भर देंगे।
Guruvayur Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा
Q1: सकट चौथ 2027 (Sakat Chauth 2027) में कब है?
सकट चौथ 2027 (Sakat Chauth 2027) का पावन व्रत 25 जनवरी , सोमवार को रखा जाएगा।
Q2: सकट चौथ के दिन चंद्रमा निकलने का समय क्या है?
वर्ष में सकट चौथ 2027 (Sakat Chauth 2027) के दिन चंद्रोदय रात लगभग 08:45 बजे होगा।
Q3: सकट चौथ की पूजा में गणेश जी को क्या चढ़ाना सबसे शुभ होता है?
इस दिन गणेश जी को 21 दुर्वा, तिल और गुड़ का बना तिलकुटा, शकरकंद और मोदक चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है।
Q4: क्या सकट चौथ 2027 (Sakat Chauth 2027) का व्रत बिना चंद्र दर्शन के खोला जा सकता है?
नहीं, सकट चौथ के व्रत में चंद्र दर्शन और उन्हें जल व दूध से अर्घ्य देना अनिवार्य होता है, इसके बिना व्रत पूरा नहीं माना जाता।
Q5: सकट चौथ को तिलकुटा चौथ क्यों कहते हैं?
क्योंकि इस दिन विशेष रूप से तिल और गुड़ को कूटकर तिलकुटा बनाया जाता है और बप्पा को इसका भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.