काशी की पावन गलियों में जब भी साधना, तपस्या और अलौकिक चमत्कारों का जिक्र होता है, तो एक ऐसे महान संत का नाम सबसे ऊपर आता है जिन्हें स्वयं भगवान विश्वनाथ का प्रत्यक्ष स्वरूप माना गया। हम बात कर रहे हैं 'काशी के चलते-फिरते शिव' कहे जाने वाले महान सिद्ध संत तैलंग स्वामी जी की। पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी के संधिकाल में जन्मी इस दिव्य आत्मा का जीवन हठयोग, आत्मज्ञान और असीम करुणा की जीवंत मिसाल है। इस पावन अवसर को हम तैलंग स्वामी जयंती 2027 (Trailanga Swami Jayanti 2027) के रूप में मनाते हैं।
यदि आप भी भगवान शिव और स्वामी जी का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो तैलंग स्वामी जयंती 2027 की तिथि (Trailanga Swami Jayanti 2027 Date) का यह अवसर आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, शुभ समय, शिव पूजा विधि (Shiv Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।
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तैलंग स्वामी जयंती का पर्व (Trailanga Swami Jayanti Festival) भारत के महानतम सिद्ध योगियों में से एक स्वामी तैलंग (त्रैलंग स्वामी) के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। उनका जन्म आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपना अधिकांश जीवन काशी (वाराणसी) के गंगा घाटों पर बिताया। वे लगभग 280 वर्ष तक जीवित रहे और उन्हें भारत के इतिहास के सबसे दीर्घायु और सिद्ध संतों में गिना जाता है। रामकृष्ण परमहंस जी ने उन्हें स्वयं 'साक्षात काशी विश्वनाथ' कहा था। इस पावन जयंती पर श्रद्धालु स्वामी जी के चित्र या प्रतिमा का पूजन करते हैं, उनकी सिद्धियों का स्मरण करते हैं और उनके बताए साधना मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।
वर्ष 2027 में स्वामी तैलंग जी का जन्मोत्सव पौष शुक्ल पक्ष की पावन तिथि के अनुसार मनाया जाएगा। तैलंग स्वामी जयंती शुभ समय (Trailanga Swami Jayanti Shubh Time) की जानकारी नीचे दी गई है:
तैलंग स्वामी जयंती तिथि (Trailanga Swami Jayanti 2027 Date): 19 जनवरी 2027, मंगलवार
पौष शुक्ल द्वादशी तिथि प्रारम्भ: 18 जनवरी 2027 को देर रात
पौष शुक्ल द्वादशी तिथि समाप्त: 19 जनवरी 2027 को सायंकाल
साधना और पूजन का शुभ समय (Trailanga Swami Puja Muhurat): 19 जनवरी 2027 को प्रातः 06:30 बजे से प्रातः 10:30 बजे तक
(नोट: धार्मिक पंचांग और काशी की परंपरा के अनुसार 19 जनवरी 2027 को ही स्वामी तैलंग जी का जन्मोत्सव पूर्ण श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।)
तैलंग स्वामी जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि यह शरीर केवल सांसारिक उपभोग के लिए नहीं, बल्कि परमात्मा की प्राप्ति का साधन है। स्वामी जी महीनों तक बिना अन्न-जल के गंगा नदी के पानी में डूबे रहते थे या कड़ी धूप में जलती रेत पर मौन साधना में लीन रहते थे।
इस दिन का आध्यात्मिक महत्व यह है कि यह हमारी सोई हुई चेतना को जगाता है। जो भक्त स्वामी जी का स्मरण करते हैं, उनके मन से भय, मोह और वासना मिटने लगती हैं। उनकी जयंती पर ध्यान और साधना करने से साधक को असीम आंतरिक शांति, इच्छाशक्ति और आत्मबल की प्राप्ति होती है। यह दिन हमें मौन की शक्ति और ईश्वर में लीन रहने का अनूठा पाठ पढ़ाता है।

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स्वामी तैलंग जी एक निष्काम योगी थे, इसलिए उनकी पूजा अत्यंत सरल और भावपूर्ण होती है। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण पूजा विधि:
प्रातः स्नान और स्वच्छता: जयंती के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल की तैयारी: घर के मंदिर में उत्तर दिशा में एक चौकी रखें। उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर तैलंग स्वामी जी और भगवान शिव का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।
दीप प्रज्वलन: देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। स्वामी जी को सफेद व पीले फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
भोग अर्पण: स्वामी जी को भांग, पंचामृत, दूध, फल और मिष्ठान का भोग लगाएं, क्योंकि वे शिव स्वरूप माने जाते हैं।
मौन ध्यान और मंत्र जाप: पूजा के बाद कम से कम 15 से 20 मिनट तक मौन बैठकर भगवान शिव और स्वामी जी के स्वरूप का ध्यान करें। इसके बाद शिव मंत्र (Shiv Mantra) 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें।
आरती: अंत में आरती करें और घर के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
इस दिन मन, क्रम और वचन से पूर्ण सात्विकता और पवित्रता का पालन करें।
जितना संभव हो सके कम बोलें या मौन व्रत का पालन करें।
भोजन में केवल सात्विक आहार ही ग्रहण करें।
किसी भी व्यक्ति के प्रति कटु विचार न लाएं और सभी में ईश्वर का रूप देखें।
मानसिक और शारीरिक आरोग्यता: स्वामी जी हठयोग के महान आचार्य थे, उनका स्मरण करने से शरीर निरोगी होता है और मन के विकार दूर होते हैं।
इच्छाशक्ति और एकाग्रता में वृद्धि: विद्यार्थियों और साधकों के लिए इस दिन ध्यान लगाना मन की एकाग्रता को कई गुना बढ़ा देता है।
शिव कृपा की प्राप्ति: स्वामी जी को शिव का अवतार माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा से भगवान विश्वनाथ की असीम कृपा मिलती है।
भय और बाधाओं से मुक्ति: जीवन में आ रही अनजान बाधाएं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
क्या करें:
जरूरतमंदों और संतों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करें।
गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करें और तैलंग स्वामी जी की जीवनी पढ़ें।
दिन का कुछ समय ध्यान और योग में अवश्य बिताएं।
क्या न करें:
इस दिन क्रोध, अहंकार या किसी का अपमान भूलकर भी न करें।
तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांसाहार या शराब का सेवन न करें।
झूठ बोलने या किसी को छलने से बचें।
काशी के इतिहास में स्वामी तैलंग जी के अनगिनत चमत्कार दर्ज हैं। वे अक्सर बिना वस्त्रों के काशी के घाटों पर घूमते रहते थे। अंग्रेजों के शासनकाल में एक ब्रिटिश अधिकारी को लगा कि एक नग्न साधु का इस तरह घूमना ठीक नहीं है, इसलिए उसने स्वामी जी को जेल में बंद करवा दिया और लोहे के भारी ताले लगवा दिए।
लेकिन अगले ही पल जब अधिकारी बाहर आया, तो उसने देखा कि तैलंग स्वामी जी जेल की छत पर आराम से टहल रहे थे। जब उसने अंदर जाकर देखा तो जेल का ताला वैसे ही बंद था। अधिकारी ने फिर से उन्हें अंदर बंद किया, लेकिन स्वामी जी पुनः बाहर आ गए। यह देखकर अंग्रेज अधिकारी का अहंकार चकनाचूर हो गया और वह स्वामी जी के चरणों में गिर पड़ा।
एक अन्य घटना में एक व्यक्ति ने स्वामी जी की परीक्षा लेने के लिए उन्हें चूने का गाढ़ा घोल दूध बताकर पीने को दे दिया। सिद्ध योगी स्वामी जी ने बिना हिचकिचाए उसे पी लिया। थोड़ी ही देर में वह छल करने वाला व्यक्ति पेट दर्द से तड़पने लगा। स्वामी जी ने मुस्कुराते हुए उससे कहा कि जब तुम मुझे जहर पिलाते हो, तो वह जहर तुम्हारे अपने पेट में ही जलन पैदा करता है क्योंकि हम सब एक ही ईश्वर के अंश हैं। स्वामी जी ने अपने तपोबल से उस व्यक्ति का दर्द ठीक कर दिया। यह कथा सिखाती है कि सिद्ध पुरुष हर जीव में परमात्मा को देखते हैं।
तैलंग स्वामी जी का जीवन हमें याद दिलाता है कि यह दुनिया और इसके भौतिक सुख क्षणभंगुर हैं, जबकि आत्मा का परमात्मा से मिलन ही परम सत्य है। वर्ष 2027 में 19 जनवरी को मनाई जाने वाली यह तैलंग स्वामी जयंती 2027 (Trailanga Swami Jayanti 2027) आपके जीवन में साधना, धैर्य और दिव्य शांति का नया उजाला लेकर आए। आइए, इस पावन दिन पर हम सब काशी के इस महान योगी को नमन करें और अपने भीतर भक्ति और संयम का दीप जलाएं।
Q1: तैलंग स्वामी जयंती 2027 (Trailanga Swami Jayanti 2027) में कब है?
तैलंग स्वामी जी की जयंती 19 जनवरी 2027, मंगलवार को मनाई जाएगी।
Q2: तैलंग स्वामी जी को किसका अवतार माना जाता है?
स्वामी तैलंग जी को भगवान शिव (काशी विश्वनाथ) का प्रत्यक्ष अवतार माना जाता है।
Q3: स्वामी तैलंग कितने वर्षों तक जीवित रहे?
पौराणिक और ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार स्वामी जी लगभग 280 वर्षों तक जीवित रहे।
Q4: स्वामी जी का मुख्य निवास स्थान कौन सा था?
वे काशी के मणिकर्णिका और पंचगंगा घाट पर अपनी साधना में लीन रहते थे।
Q5: इस दिन कौन से मंत्र का जाप करना फलदायी होता है?
इस दिन 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.