संसार के इस मायावी चक्र में फंसा हर प्राणी अंततः शांति, भक्ति और श्री हरि के चरणों में स्थान की तलाश करता है। जब सांसारिक आपाधापी से मन थकने लगता है, तब भगवान श्री हरि विष्णु की भक्ति ही हृदय में अलौकिक सुकून का संचार करती है। सनातन धर्म में एकादशी का व्रत सर्वोपरि माना गया है, परंतु वैष्णव संप्रदाय के साधकों के लिए वैष्णव मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaishnava Mokshada Ekadashi 2026) का स्थान अत्यंत विशेष होता है।
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की यह एकादशी केवल एक उपवास नहीं, बल्कि स्वयं के साथ-साथ अपने पूर्वजों को भी जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त कराकर सीधे श्री हरि के वैकुंठ धाम में स्थान दिलाने वाली दिव्य बेला है। इसी पावन तिथि पर कुरुक्षेत्र की भूमि पर योगेश्वर श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर संदेश भी दिया था। यदि आप भी अपने जीवन के पापों को मिटाकर प्रभु का अनन्य प्रेम पाना चाहते हैं, तो वैष्णव मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaishnava Mokshada Ekadashi 2026) की तिथि का यह अवसर आपके लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होगा। आइए जानते हैं इस पावन व्रत की तिथि, मुहूर्त, वैष्णव एकादशी पूजा विधि (Vaishnava Ekadashi Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।
वैदिक पंचांग और वैष्णव परंपरा के अनुसार, जब एकादशी तिथि दो दिनों तक व्याप्त होती है या दशमी तिथि का प्रभाव एकादशी पर होता है, तब दूजी एकादशी यानी वैष्णव एकादशी (Vaishnava Ekadashi) को वैष्णव संप्रदाय के लोग मनाते हैं। मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को वैष्णव मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।
यह पावन दिन भगवान विष्णु के श्री कृष्ण अवतार और गीता जयंती (Gita Jayanti) यानी श्रीमद्भगवद्गीता के प्राकट्य से जुड़ा हुआ है। वैष्णव संप्रदाय के साधु-संत, संन्यासी, इस्कॉन अनुयायी और अनन्य विष्णु भक्त इस दिन पूरे नियम-संयम के साथ व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर नियमपूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके जन्म-जन्मांतर के पाप भस्म हो जाते हैं।
वैष्णव मोक्षदा एकादशी का व्रत सही तिथि, उत्तम पूजा मुहूर्त और पारण समय पर करना ही सबसे अधिक फलदायी माना गया है। वर्ष 2026 में वैष्णव मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaishnava Mokshada Ekadashi 2026) तिथि और शुभ मुहूर्त की तालिका नीचे दी गई है:
वैष्णव मोक्षदा एकादशी तिथि (Vaishnava Mokshada Ekadashi 2026 Date): 20 दिसंबर 2026, रविवार
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी प्रारंभ: 19 दिसंबर 2026 को रात 10:45 बजे से
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी समाप्त: 20 दिसंबर 2026 को रात 11:20 बजे तक
पूजा का उत्तम मुहूर्त: 20 दिसंबर 2026 को सुबह 08:30 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक
वैष्णव एकादशी व्रत पारण समय (Vaishnava Ekadashi Parana Time): 21 दिसंबर 2026 को सुबह 07:10 बजे से सुबह 09:15 बजे तक
वैष्णव नियमों और उदयातिथि के मान के अनुसार, वैष्णव मोक्षदा एकादशी का व्रत (Vaishnava Mokshada Ekadashi Vrat) 20 दिसंबर 2026 को ही रखा जाएगा।
शास्त्रों में वैष्णव मोक्षदा एकादशी को सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला और परम पद प्रदान करने वाला बताया गया है। वैष्णव ग्रंथों के अनुसार, जो मनुष्य इस दिन पूरे भक्तिभाव से व्रत रखकर भगवान विष्णु के स्वरूप की पूजा करता है, उसे सीधे वैकुंठ लोक में स्थान मिलता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन अपनी आत्मा को शुद्ध करने और सांसारिक मोह-माया के बंधनों से ऊपर उठने की दिव्य प्रेरणा देता है। जो भक्त इस दिन निर्जला या फलाहार रहकर भगवान दामोदर की आराधना करते हैं, उनके कुल के पितरों को भी नरक की यातनाओं से मुक्ति मिल जाती है और उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है।

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वैष्णव मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा इस प्रकार पूरे विधि-विधान से करें:
प्रातः स्नान और संकल्प: एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी में स्नान करें या नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर श्री हरि के सामने व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल की स्थापना: घर के मंदिर की सफाई करें और एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। पास ही पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता ग्रंथ को भी विराजमान करें।
अभिषेक और श्रृंगार: भगवान श्री हरि को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात उन्हें पीला चंदन, रोली, अक्षत, पीला वस्त्र और पीले गेंदे के फूल अर्पित करें।
विशेष भोग अर्पण: भगवान को तुलसी पत्र, मखाना, फल, पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाएं। याद रखें कि विष्णु जी के भोग में तुलसी का पत्ता होना बेहद अनिवार्य है।
गीता पाठ और मंत्र जप: इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता के 11वें और 15वें अध्याय का पाठ करें। साथ ही "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या हरे कृष्ण महामंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
आरती और प्रार्थना: धूप-दीप जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें और अपने जाने-अनजाने हुए पापों के लिए क्षमा मांगते हुए मोक्ष की प्रार्थना करें।
एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी की शाम से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
एकादशी के दिन पूर्ण रूप से फलाहार रहें या केवल जल ग्रहण करके व्रत रखें।
इस दिन क्रोध, असत्य, बुराई और किसी की चुगली करने से पूरी तरह दूर रहें।
द्वादशी के दिन (21 दिसंबर) शुभ मुहूर्त में ही ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान-दक्षिणा देने के बाद व्रत का पारण करें।
मोक्ष की प्राप्ति: जीवन के अंत में आत्मा को सांसारिक आवागमन से मुक्ति मिलती है और श्री हरि के चरणों में स्थान प्राप्त होता है।
पितरों को सद्गति: कष्ट झेल रहे पूर्वजों को तुरंत यातनाओं से मुक्ति मिलती है और वे देवलोक चले जाते हैं।
समस्त पापों का नाश: जन्म-जन्मांतर के जाने-अनजाने में हुए पाप मिट जाते हैं।
मानसिक शांति और समृद्धि: जीवन में चल रही आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक परेशानियां दूर होती हैं।
क्या करें:
भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।
श्रीमद्भगवद्गीता का दान करें और गरीबों को वस्त्र या भोजन भेंट करें।
रात्रि में जागरण करके प्रभु के भजनों और कीर्तन का आनंद लें।
क्या न करें:
एकादशी के दिन चावल का सेवन भूलकर भी न करें।
घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का प्रयोग बिल्कुल न करें।
इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें, एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
किसी भी बुजुर्ग, असहाय या जीव-जंतु का अनादर न करें।
पौराणिक वैष्णव मोक्षदा एकादशी कथा (Vaishnava Mokshada Ekadashi Vrat Katha) के अनुसार, प्राचीन काल में चंपक नगर में वैखानस नाम का एक अत्यंत धार्मिक और प्रजापालक राजा राज्य करता था। एक रात राजा ने स्वप्न में देखा कि उनके पिता नरक की भीषण यातनाएं भोग रहे हैं और कष्ट में चिल्ला रहे हैं। अपने पिता की ऐसी दयनीय दशा देखकर राजा व्याकुल हो उठे।
अगले ही दिन राजा पर्वत मुनि के आश्रम पहुँचे और अश्रुपूरित नेत्रों से अपने पिता के कष्टों का निवारण पूछा। पर्वत मुनि ने अपने दिव्य ज्ञान से देखकर बताया कि राजा के पिता ने अपने पूर्व जन्म में एक भारी पाप किया था, जिसके फलस्वरुप वे नरक में कष्ट भोग रहे हैं।
मुनि ने राजा को मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का विधि-विधान से व्रत करने और उसका संपूर्ण फल अपने पिता को दान करने की सलाह दी। राजा ने पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया और इसका पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से राजा के पिता के सभी पाप तुरंत भस्म हो गए और वे दिव्य देह धारण करके सीधे वैकुंठ धाम चले गए।
वैष्णव मोक्षदा एकादशी का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य केवल सांसारिक सुख पाना नहीं, बल्कि अपनी आत्मा को शुद्ध करके ईश्वर के चरणों में स्थान पाना है। यह व्रत न केवल हमारे पापों को हरता है, बल्कि हमारे पूर्वजों को भी मुक्ति दिलाता है। यदि आप भी अपने जीवन में शांति, सुख और मरणोपरांत मोक्ष की कामना करते हैं, तो वैष्णव मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaishnava Mokshada Ekadashi 2026) पर पूरे विश्वास के साथ व्रत रखें और श्री हरि के चरणों में अपना जीवन समर्पित करें।
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Q1: वैष्णव मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaishnava Mokshada Ekadashi 2026) में कब है?
वैष्णव मोक्षदा एकादशी का व्रत 20 दिसंबर 2026, रविवार के दिन रखा जाएगा।
Q2: वैष्णव एकादशी और सामान्य एकादशी में क्या अंतर है?
गृहस्थ लोग अमूमन पहली एकादशी (स्मार्त एकादशी) का व्रत रखते हैं, जबकि वैष्णव साधु-संत और संन्यासी दूजी यानी पूर्ण शुद्धा एकादशी (वैष्णव एकादशी) का व्रत रखते हैं।
Q3: वैष्णव मोक्षदा एकादशी 2026 (Vaishnava Mokshada Ekadashi 2026)का पारण कब करना चाहिए?
व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि (21 दिसंबर 2026) को सुबह 07:10 बजे से सुबह 09:15 बजे के बीच किया जाना चाहिए।
Q4: क्या इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना चाहिए?
जी हां, मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, इसलिए इस दिन गीता पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Q5: वैष्णव मोक्षदा एकादशी की पूजा में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
इस दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "हरे कृष्ण" महामंत्र का जप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.