जब पृथ्वी पर अत्याचार, अन्याय और अधर्म की सीमाएं टूटने लगती हैं, तब भक्तों के दुखों को हरने के लिए स्वयं ईश्वर लीला धारण करके धरती पर आते हैं। द्वापर युग में जब कंस के अत्याचारों से पूरी मथुरा नगरी और ब्रजभूमि कराह रही थी, तब बाल-कृष्ण ने अपने पराक्रम से उस अन्यायी राजा का अंत करके धर्म की पुनः स्थापना की थी। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को कंस वध 2026 (Kansa Vadh 2026) उत्सव के रूप में मनाया जाता है। विशेषकर मथुरा और ब्रज क्षेत्र में यह दिन अत्यंत हर्षोल्लास और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन केवल एक ऐतिहासिक या पौराणिक घटना की याद नहीं दिलाता, बल्कि हर इंसान को यह विश्वास दिलाता है कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो जाए, अंत में जीत हमेशा सत्य और धर्म की ही होती है। यदि आप भी वर्ष में कंस वध 2026 (Kansa Vadh 2026) पर्व की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि की खोज कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका साबित होगा।
यह भी पढ़ें - श्री कृष्ण का लोकप्रिय भजन Shri Krishna Govind Hare Murari Lyrics
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को कंस वध 2026 (Kansa Vadh 2026) का पावन पर्व मनाया जाता है। इसी पावन तिथि को भगवान श्री कृष्ण और बलराम ने मथुरा के राजा कंस का वध करके अपने माता-पिता देवकी व वसुदेव को उसके कारागार से मुक्त कराया था। मथुरा में इस दिन एक भव्य मेला लगता है और कंस के विशाल पुतले का दहन किया जाता है। ब्रज क्षेत्र में चतुर्वेदी समाज द्वारा इस उत्सव का विशेष आयोजन किया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के विजय स्वरूप की पूजा की जाती है और उन्हें विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।
वर्ष में कंस वध 2026 (Kansa Vadh 2026) का यह पावन पर्व 20 नवंबर, शुक्रवार को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से कंस वध 2026 (Kansa Vadh 2026) का पर्व अत्यंत प्रेरणादायी माना गया है। कंस केवल एक अत्याचार करने वाला राजा नहीं था, बल्कि वह अहंकार, क्रूरता और असत्य का प्रतीक था। भगवान श्री कृष्ण द्वारा कंस का अंत यह संदेश देता है कि जब व्यक्ति के भीतर अहंकार और अन्याय सीमा पार कर जाता है, तो उसका विनाश निश्चित हो जाता है।
इस दिन भगवान कृष्ण की बाल-लीलाओं और उनके विजय स्वरूप का ध्यान करने से साधक के भीतर का भय दूर होता है। जीवन में चल रही बाधाओं, शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है।
कंस वध 2026 (Kansa Vadh 2026) के दिन भगवान श्री कृष्ण और बलराम जी की विजय स्वरूप में पूजा की जाती है:

यह भी पढ़ें - Krishna Janmashtami 2025: इस साल कब है जन्माष्टमी, जानिए पूजाविधि, मुहूर्त एवं महत्त्व
इस पावन पर्व पर पूजा और उपवास के नियमों का पालन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार मथुरा का राजा कंस अत्यंत क्रूर और अत्याचारी शासक था। उसने अपने पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर स्वयं राजसिंहासन हथिया लिया था। जब कंस अपनी बहन देवकी का विवाह वसुदेव से करा रहा था, तब आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस का काल बनेगी। भयभीत होकर कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी पहली सात संतानों का वध कर दिया।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण ने आठवीं संतान के रूप में जन्म लिया और चमत्कारी रूप से वे गोकुल पहुँच गए। जब कंस को पता चला कि उसका काल गोकुल में पल रहा है, तो उसने कई दानवों को बाल-कृष्ण को मारने भेजा, लेकिन श्री कृष्ण ने पूतना, तृणावर्त और बकासुर जैसे सभी राक्षसों का वध कर दिया।
अंत में कंस ने श्री कृष्ण और बलराम को मारने के लिए धनुष यज्ञ के बहाने मथुरा आमंत्रित किया। श्री कृष्ण और बलराम मथुरा पहुँचे और उन्होंने कंस द्वारा भेजे गए कुवलयापीड़ हाथी और चाणूर-मुष्टिक जैसे पहलवानों का वध कर दिया। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने कंस को उसके बालों से पकड़ा और उसे पटककर उसका वध कर दिया। इस प्रकार कंस के अत्याचारों का अंत हुआ और उग्रसेन को पुनः मथुरा का राजा बनाया गया।
कंस वध 2026 (Kansa Vadh 2026) का यह पावन पर्व हमें यह सनातन संदेश देता है कि अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न प्रतीत हो, सत्य की ज्योति के सामने वह कभी टिक नहीं सकता। जब हम अपने जीवन में भगवान श्री कृष्ण के बताए धर्म और नीति के मार्ग पर चलते हैं, तो हमारे भीतर छिपी हुई हर असुरी शक्ति पराजित हो जाती है। वर्ष का कंस वध 2026 (Kansa Vadh 2026) पर्व आपके और आपके परिवार के जीवन से समस्त दुखों, भय और नकारात्मकता का अंत करे और खुशहाली व समृद्धि लाए। जय श्री कृष्णा
यह भी पढ़ें - 1000 Names of Lord Krishna In Hindi और जानें उनका अर्थ एवं महिमा
1. कंस वध 2026 (Kansa Vadh 2026) में कब है?
कंस वध का पावन पर्व 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
2. कंस वध का सबसे बड़ा उत्सव कहाँ मनाया जाता है?
कंस वध का सबसे भव्य और पारंपरिक उत्सव मथुरा (उत्तर प्रदेश) में मनाया जाता है।
3. कंस वध किस तिथि को हुआ था?
भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को कंस का वध किया था।
4. कंस वध के दिन किस देवी-देवता की पूजा की जाती है?
इस दिन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम जी की पूजा की जाती है।
5. कंस वध के दिन क्या भोग चढ़ाना चाहिए?
भगवान कृष्ण को माखन-मिसरी, पेड़े, पंचामृत और तुलसी पत्र का भोग चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.