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August 17, 2026 Blog

Akshay Navami 2026: जानिए तिथि, आंवला नवमी शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जब प्रकृति और भक्ति एक साथ आकर हमारे जीवन को अलौकिक ऊर्जा से भर देती हैं, तो वह दृश्य कितना अद्भुत होता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाने वाला अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) का पावन पर्व प्रकृति के प्रति हमारी इसी अनन्य श्रद्धा का साक्षात रूप है। इसे देश के कई हिस्सों में आंवला नवमी या धात्री नवमी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस पावन दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने और उसके नीचे बैठकर भोजन पकाने तथा ग्रहण करने से जीवन के समस्त पापों का नाश हो जाता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

अक्षय नवमी क्या है? (Introduction)

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) या आंवला नवमी का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी तिथि से सत्य युग का प्रारंभ हुआ था, इसलिए इसे कृतादि युग तिथि भी कहा जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि आंवले के पेड़ में भगवान श्री हरि विष्णु, माता लक्ष्मी और देवाधिदेव महादेव का निवास होता है।

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अक्षय नवमी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

वर्ष में अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) का यह पावन पर्व 18 नवंबर, बुधवार को पूरे देश में अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण नीचे दिया गया है:

  • अक्षय नवमी पर्व तिथि: 18 नवंबर 2026, बुधवार
  • कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि प्रारंभ: 17 नवंबर 2026 को रात 11:20 बजे से
  • कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि समाप्त: 18 नवंबर 2026 को रात 09:45 बजे तक
  • आंवला वृक्ष पूजन का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:46 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक
  • पूजन की कुल अवधि: 05 घंटे 19 मिनट

अक्षय नवमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विशाल है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस दिन किए गए किसी भी धार्मिक कार्य, दान या साधना का फल कभी समाप्त नहीं होता। पद्म पुराण के अनुसार कार्तिक नवमी के दिन भगवान विष्णु आंवले के वृक्ष में स्वयं निवास करते हैं।

इस दिन आंवले के पौधे का रोपण करना, उसकी परिक्रमा करना और उसके नीचे बैठकर श्री हरि विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा करना परम कल्याणकारी माना गया है। आयुर्वेद में भी आंवले को अमृत समान माना गया है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और दीर्घायु प्रदान करता है। अतः यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक स्वास्थ्य का भी सुंदर संगम है।

अक्षय नवमी की संपूर्ण पूजा विधि (Pooja rituals)

अक्षय नवमी पर आंवले के वृक्ष के पूजन का विशेष शास्त्रीय विधान है:

  1. प्रातः स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) के व्रत व पूजन का संकल्प लें।
  2. आंवले के वृक्ष की सफाई: किसी पास के आंवले के पेड़ के पास जाएं और उसके आसपास के स्थान को अच्छी तरह साफ करके जल छिड़कें।
  3. वृक्ष का पूजन और अर्पण: आंवले के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध, जल और हल्दी अर्पित करें। फिर पेड़ के तने पर रोली, चंदन, कुमकुम और अक्षत लगाएं।
  4. श्रृंगार और कलावा: पेड़ को मौली (कलावा) बांधें और सूती धागे या कलावे से पेड़ की आठ बार या 108 बार परिक्रमा करें।
  5. धूप-दीप और भोग: पेड़ के नीचे देसी घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें। भगवान विष्णु और आंवला माता को फल, मिठाई, तिल और आंवला अर्पित करें।
  6. वृक्ष के नीचे भोजन: पूजा संपन्न होने के बाद आंवले के पेड़ की छांव में भोजन बनाएं। यदि वहां खाना पकाना संभव न हो, तो घर से बना भोजन ले जाकर वहां भगवान को भोग लगाएं और परिवार के साथ बैठकर ग्रहण करें।

अक्षय नवमी व्रत और पूजन के जरूरी नियम (Rules)

Akshay Navami 2026 festival

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अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

  • पूजा के दौरान आंवले के पेड़ की परिक्रमा करते समय मन में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप निरंतर करते रहें।
  • इस दिन आंवले के पेड़ की पत्तियों को नुकसान न पहुँचाएं और न ही टहनियाँ तोड़ें।
  • जो साधक व्रत रख रहे हैं, वे पूरे दिन सात्विक रहें और शाम को पूजा के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • इस पावन दिन आंवले का सेवन किसी न किसी रूप में अवश्य करना चाहिए।

अक्षय नवमी पूजन के मुख्य लाभ (Benefits)

  • अक्षय पुण्य की प्राप्ति: इस दिन किए गए जप, तप और दान का फल कभी नष्ट नहीं होता।
  • पापों से मुक्ति: जाने-अनजाने में हुए जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं।
  • आरोग्य और दीर्घायु: आंवले की पूजा और सेवन से शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है।
  • पारिवारिक सुख-समृद्धि: माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा से घर में धन-धान्य का भंडार भरा रहता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन अवश्य ग्रहण करें, इसे अमृत तुल्य माना जाता है।
  • इस दिन अपनी क्षमता अनुसार गरीबों को अनाज, वस्त्र और आंवले का दान करें।
  • नया आंवले का पौधा लगाना इस दिन अत्यंत शुभ और फलदायी होता है।

क्या न करें:

  • अक्षय नवमी के दिन घर या आसपास किसी भी पेड़-पौधे को न काटें।
  • पूजा के स्थान पर या घर में किसी से वाद-विवाद या क्रोध न करें।
  • इस पावन दिन तामसिक भोजन, लहसुन या प्याज का सेवन पूरी तरह वर्जित रखें।

अक्षय नवमी की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार काशी नगर में एक वैश्य रहता था, जिसकी कोई संतान नहीं थी। उसकी पत्नी संतान न होने के कारण अत्यंत दुखी रहती थी। एक दिन किसी पड़ोसन ने उससे कहा कि यदि वह किसी बच्चे की बलि दे दे, तो उसे संतान की प्राप्ति हो जाएगी। अंधविश्वास में आकर वैश्य की पत्नी ने एक बच्चे की बलि दे दी। इस महापाप के कारण उसका शरीर कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गया और उसका जीवन नरक समान हो गया।

अपनी भूल पर पछतावा करते हुए उसने अपने पति से क्षमा मांगी। उसके पति ने कहा कि इस पाप का प्रायश्चित केवल भगवान विष्णु की भक्ति और गंगा स्नान से ही संभव है। वह महिला काशी जाकर गंगा में स्नान करने लगी और पश्चाताप करने लगी। तब गंगा माता ने प्रकट होकर उसे कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवले के वृक्ष की पूजा करने और निर्जला व्रत रखने का उपाय बताया।

महिला ने पूरे नियम और निष्ठा के साथ अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) का व्रत रखा और आंवले के पेड़ की पूजा करके क्षमा मांगी। उसकी निष्कपट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसका कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक कर दिया और उसे एक सुयोग्य पुत्र का वरदान दिया। तभी से अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) का व्रत रखने और आंवले के पूजन की परंपरा चली आ रही है।

निष्कर्ष (Conclusion)

अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति ही ईश्वर का वास्तविक रूप है और उसकी सेवा से बढ़कर कोई दूसरी भक्ति नहीं है। जब हम निश्छल भाव से भगवान विष्णु और आंवला माता के चरणों में अपना शीश झुकाते हैं, तो जीवन के सारे दुख, बीमारियाँ और पाप छंट जाते हैं। वर्ष की अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) आपके और आपके पूरे परिवार के जीवन में अक्षय पुण्य, अपार समृद्धि, सुख, शांति और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। भगवान श्री हरि विष्णु की जय आंवला माता की जय

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. अक्षय नवमी 2026 (Akshaya Navami 2026) में कब है?
अक्षय नवमी का पावन पर्व 18 नवंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।

2. अक्षय नवमी पर किस पेड़ की पूजा की जाती है?
अक्षय नवमी पर मुख्य रूप से आंवले के पेड़ (धात्री वृक्ष) की पूजा की जाती है।

3. अक्षय नवमी को आंवला नवमी क्यों कहा जाता है?
इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने और उसके नीचे बैठकर भोजन करने का विशेष विधान है, इसलिए इसे आंवला नवमी भी कहते हैं।

4. अक्षय नवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
18 नवंबर 2026 को आंवले के वृक्ष के पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 06:46 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक रहेगा।

5. क्या अक्षय नवमी पर आंवले का पेड़ लगाना शुभ होता है?
जी हां, अक्षय नवमी के दिन नया आंवले का पौधा रोपना अत्यंत पुण्यदायी और वंश वृद्धि करने वाला माना गया है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.