जब हम माँ का नाम लेते हैं, तो हमें प्रेम और सुरक्षा का एहसास होता है। हमारी संस्कृति में माँ का दर्जा सिर्फ जन्म देने वाली माँ तक ही नहीं है, हमने गौ को भी माता माना है। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, जिसे हम बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) कहते हैं, इसी पावन रिश्ते और ममता के सम्मान का दिन है।
हम अपनी व्यस्त जिंदगी में उन मूक जीवों को भूल जाते हैं जो निस्वार्थ भाव से हमारी सेवा करते हैं। बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) का यह दिन हमें याद दिलाता है कि भक्ति केवल मंदिर की मूर्तियों में नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं की सेवा में भी है। साल 2026 में अगस्त के आखिरी दिन आने वाला यह व्रत आपके घर में सुख, शांति और संतान की उन्नति लेकर आने वाला है।
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बहुला चतुर्थी 2026, जिसे 'बोल चौथ' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। यह त्योहार विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और उनके प्रिय गौ-वंश की पूजा की जाती है। यह व्रत माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी आयु और खुशहाली के लिए रखा जाता है। यह पर्व मनुष्य और पशुओं के बीच के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।
साल में बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) का व्रत अगस्त के महीने के अंतिम दिन पड़ रहा है। इसकी गणना इस प्रकार है:
व्रत की तिथि: 31 अगस्त 2026, सोमवारविशेष संयोग: इस बार बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) सोमवार के दिन है। सोमवार स्वयं भगवान शिव का दिन है और श्री कृष्ण (विष्णु अवतार) की इस पूजा का सोमवार को होना सौभाग्य में वृद्धि करने वाला माना जा रहा है।
बहुला चतुर्थी का महत्व केवल एक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, इसके आध्यात्मिक मायने बहुत गहरे हैं:
संतान की रक्षा: ऐसी मान्यता है कि जो माताएं इस दिन व्रत रखती हैं, उनके बच्चों पर आने वाले सभी संकट टल जाते हैं।
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क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार, बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) भगवान कृष्ण ने एक बार अपनी प्रिय 'बहुला' नामक गाय की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। जब बहुला जंगल में घास चर रही थी, तब कृष्ण ने एक शेर का रूप धारण किया और उसके सामने आ गए। बहुला डर गई, लेकिन उसने शेर से प्रार्थना की— “हे वनराज! मेरा छोटा बछड़ा घर पर भूखा है, मुझे जाने दें। मैं उसे दूध पिलाकर वापस आ जाऊंगी।"
शेर ने उसकी बात मान ली। बहुला घर गई, अपने बछड़े को प्यार किया और अपना वचन निभाते हुए वापस शेर के पास आ गई। उसकी सत्यनिष्ठा और ममता को देखकर भगवान कृष्ण अपने असली रूप में आ गए और उन्होंने बहुला को आशीर्वाद दिया कि जो भी भादों की चतुर्थी को तुम्हारा पूजन करेगा, उसे धन, धान्य और संतान सुख प्राप्त होगा।
लाभ
बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) हमें सिखाती है कि धर्म केवल किताबों में नहीं, बल्कि आचरण में होता है। एक गाय का अपने वचन के लिए वापस आना और एक माँ का अपनी संतान के लिए प्रार्थना करना—यही इस पर्व की आत्मा है। 31 अगस्त को जब आप पूजा करें, तो यह संकल्प लें कि आप केवल आज ही नहीं, बल्कि हमेशा मूक पशुओं के प्रति दया भाव रखेंगे।
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1. बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) में कब मनाई जाएगी?
यह व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जाएगा।
2. क्या इस व्रत में दूध पी सकते हैं?
शास्त्रों के अनुसार, बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) पर गाय के दूध का सेवन वर्जित माना गया है, क्योंकि इस दिन दूध पर बछड़े का पहला हक माना जाता है।
3. इस व्रत को 'बोल चौथ' क्यों कहते हैं?
बहुला गाय द्वारा अपनी सच्चाई (बोल) को निभाने के कारण कई क्षेत्रों में इसे 'बोल चौथ' कहा जाता है।
4. अगर गाय न मिले तो पूजा कैसे करें?
यदि साक्षात गाय उपलब्ध न हो, तो आप मिट्टी या चांदी की गाय-बछड़े की प्रतिमा का पूजन कर सकते हैं, फल वही प्राप्त होता है।
5. क्या पुरुष भी यह व्रत रख सकते हैं?
जी हाँ, संतान की उन्नति और सुख-समृद्धि के लिए पुरुष भी यह व्रत रख सकते हैं।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.