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May 22, 2026 Blog

Bahula Chaturthi 2026: बहुला चतुर्थी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और गाय माता के इस पावन व्रत की कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

बहुला चतुर्थी 2026: माँ की ममता और गौ-सेवा का महापर्व (Bahula Chaturthi 2026: A great festival of motherly love and cow service)

जब हम माँ का नाम लेते हैं, तो हमें प्रेम और सुरक्षा का एहसास होता है। हमारी संस्कृति में माँ का दर्जा सिर्फ जन्म देने वाली माँ तक ही नहीं है, हमने गौ को भी माता माना है। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, जिसे हम बहुला चतुर्थी 2026  (Bahula Chaturthi 2026) कहते हैं, इसी पावन रिश्ते और ममता के सम्मान का दिन है।

हम अपनी व्यस्त जिंदगी में उन मूक जीवों को भूल जाते हैं जो निस्वार्थ भाव से हमारी सेवा करते हैं। बहुला चतुर्थी 2026  (Bahula Chaturthi 2026) का यह दिन हमें याद दिलाता है कि भक्ति केवल मंदिर की मूर्तियों में नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं की सेवा में भी है। साल 2026 में अगस्त के आखिरी दिन आने वाला यह व्रत आपके घर में सुख, शांति और संतान की उन्नति लेकर आने वाला है।

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बहुला चतुर्थी क्या है?

बहुला चतुर्थी 2026, जिसे 'बोल चौथ' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। यह त्योहार विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और उनके प्रिय गौ-वंश की पूजा की जाती है। यह व्रत माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी आयु और खुशहाली के लिए रखा जाता है। यह पर्व मनुष्य और पशुओं के बीच के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।

बहुला चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and Time)

साल में बहुला चतुर्थी 2026  (Bahula Chaturthi 2026) का व्रत अगस्त के महीने के अंतिम दिन पड़ रहा है। इसकी गणना इस प्रकार है:

व्रत की तिथि: 31 अगस्त 2026, सोमवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2026, रात 11:20 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2026, रात 09:45 बजे तक
पूजा का शुभ समय (सायंकाल): शाम 06:35 से रात 08:10 तक

विशेष संयोग: इस बार बहुला चतुर्थी 2026  (Bahula Chaturthi 2026) सोमवार के दिन है। सोमवार स्वयं भगवान शिव का दिन है और श्री कृष्ण (विष्णु अवतार) की इस पूजा का सोमवार को होना सौभाग्य में वृद्धि करने वाला माना जा रहा है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Religious and spiritual significance)

बहुला चतुर्थी का महत्व केवल एक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, इसके आध्यात्मिक मायने बहुत गहरे हैं:

संतान की रक्षा: ऐसी मान्यता है कि जो माताएं इस दिन व्रत रखती हैं, उनके बच्चों पर आने वाले सभी संकट टल जाते हैं।
श्री कृष्ण की कृपा: भगवान कृष्ण को 'गोपाल' कहा जाता है। गायों की सेवा करने से कान्हा अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
कृतज्ञता का भाव: यह व्रत हमें सिखाता है कि जो पशु हमें दूध और पोषण देते हैं, उनके प्रति हमारा भी कुछ कर्तव्य है।

विस्तृत पूजा विधि (Pooja rituals)

बहुला चतुर्थी 2026  (Bahula Chaturthi 2026) की पूजा बहुत ही भावुक और सरल होती है। आप इसे इस प्रकार संपन्न कर सकते हैं:
प्रातः काल स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
गौ-सेवा: यदि आपके घर के आसपास गाय और बछड़ा है, तो उन्हें साफ करें। यदि नहीं है, तो आप मिट्टी या धातु की गाय-बछड़े की मूर्ति का पूजन कर सकते हैं।
श्रृंगार: गाय माता को तिलक लगाएं, उनके गले में माला पहनाएं और उनके खुरों की पूजा करें।
श्री कृष्ण पूजन: भगवान कृष्ण की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल और चंदन अर्पित करें।
नैवेद्य: इस दिन गाय को घास और गुड़ का भोग लगाया जाता है। भगवान को दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं।
अर्घ्य: शाम के समय चंद्रमा को जल और दूध से अर्घ्य दें।
कथा श्रवण: परिवार के साथ बैठकर बहुला गाय की कहानी सुनें।

व्रत के नियम (Rules of fasting)

बहुला चतुर्थी 2026  (Bahula Chaturthi 2026) के दिन दूध और दूध से बनी चीजों के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि आज के दिन दूध पर केवल बछड़े का अधिकार है।
इस दिन जमीन से खोदकर निकाली गई सब्जियां (जैसे आलू, मूली) नहीं खानी चाहिए।
व्रत रखने वाली महिलाओं को पूरा दिन सात्विक रहना चाहिए और क्रोध से बचना चाहिए।
शाम की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन ग्रहण करें।

क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)

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क्या करें:

  • गाय माता के चरणों की मिट्टी का तिलक अपने माथे पर लगाएं।
  • कान्हा के भजनों का कीर्तन करें।
  • संतान के स्वास्थ्य और बुद्धि के लिए प्रार्थना करें।
  • गौशाला में जाकर चारा दान करें।

क्या न करें:

  • भूलकर भी गाय या किसी अन्य पशु को डंडा न मारें और न ही परेशान करें।
  • घर में प्याज, लहसुन या मांसाहारी भोजन न लाएं।
  • किसी भी जरूरतमंद को द्वार से खाली हाथ न भेजें।
  • इस दिन चाकू या कैंची जैसी नुकीली चीजों का प्रयोग करने से बचना चाहिए।

बहुला चतुर्थी की पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) भगवान कृष्ण ने एक बार अपनी प्रिय 'बहुला' नामक गाय की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। जब बहुला जंगल में घास चर रही थी, तब कृष्ण ने एक शेर का रूप धारण किया और उसके सामने आ गए। बहुला डर गई, लेकिन उसने शेर से प्रार्थना की— “हे वनराज! मेरा छोटा बछड़ा घर पर भूखा है, मुझे जाने दें। मैं उसे दूध पिलाकर वापस आ जाऊंगी।"

शेर ने उसकी बात मान ली। बहुला घर गई, अपने बछड़े को प्यार किया और अपना वचन निभाते हुए वापस शेर के पास आ गई। उसकी सत्यनिष्ठा और ममता को देखकर भगवान कृष्ण अपने असली रूप में आ गए और उन्होंने बहुला को आशीर्वाद दिया कि जो भी भादों की चतुर्थी को तुम्हारा पूजन करेगा, उसे धन, धान्य और संतान सुख प्राप्त होगा।

लाभ

  • जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत शुभ है।
  • घर में दरिद्रता का नाश होता है और बरकत आती है।
  • व्यक्ति के भीतर दया और करुणा जैसे गुणों का विकास होता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) हमें सिखाती है कि धर्म केवल किताबों में नहीं, बल्कि आचरण में होता है। एक गाय का अपने वचन के लिए वापस आना और एक माँ का अपनी संतान के लिए प्रार्थना करना—यही इस पर्व की आत्मा है। 31 अगस्त को जब आप पूजा करें, तो यह संकल्प लें कि आप केवल आज ही नहीं, बल्कि हमेशा मूक पशुओं के प्रति दया भाव रखेंगे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) में कब मनाई जाएगी?
यह व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जाएगा।


2. क्या इस व्रत में दूध पी सकते हैं?
शास्त्रों के अनुसार, बहुला चतुर्थी 2026 (Bahula Chaturthi 2026) पर गाय के दूध का सेवन वर्जित माना गया है, क्योंकि इस दिन दूध पर बछड़े का पहला हक माना जाता है।


3. इस व्रत को 'बोल चौथ' क्यों कहते हैं?
बहुला गाय द्वारा अपनी सच्चाई (बोल) को निभाने के कारण कई क्षेत्रों में इसे 'बोल चौथ' कहा जाता है।


4. अगर गाय न मिले तो पूजा कैसे करें?
यदि साक्षात गाय उपलब्ध न हो, तो आप मिट्टी या चांदी की गाय-बछड़े की प्रतिमा का पूजन कर सकते हैं, फल वही प्राप्त होता है।


5. क्या पुरुष भी यह व्रत रख सकते हैं?
जी हाँ, संतान की उन्नति और सुख-समृद्धि के लिए पुरुष भी यह व्रत रख सकते हैं।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.