जीवन में कभी-कभी ऐसा समय आता है जब हमें लगता है कि चारों ओर से परेशानियों ने हमें घेर लिया है। ऐसे समय में बस एक ही नाम याद आता है - विघ्नहर्ता श्री गणेश। गणेश जी का एक नाम 'गजानन' भी है, जो न केवल बुद्धि के देवता हैं, बल्कि हमारे जीवन के बड़े से बड़े अवरोधों को पल भर में दूर करने की शक्ति रखते हैं। साल के अगस्त महीने में आने वाली गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026) एक ऐसा ही पावन अवसर है, जब आप बप्पा को प्रसन्न कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि का द्वार खोल सकते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। सावन मास की संकष्टी को गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026)के नाम से जाना जाता है। 'संकष्टी' का अर्थ होता है 'संकटों को हरने वाली'। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान गणेश की उपासना करने से इंसान के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का अंत हो जाता है।
यह भी पढ़ें - Ganesh Chaturthi 2025: कब है गणेश चतुर्थी, जानिए मूर्ति स्थापना का शुभ समय एवं पूजा विधि
साल में गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026) का व्रत अगस्त के पहले रविवार को पड़ रहा है, जो इसे और भी विशेष बनाता है।
गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026) का आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। शास्त्रों के अनुसार, 'गजा' का अर्थ है हाथी और 'आनन' का मुख। भगवान गणेश का यह स्वरूप हमें शांत रहकर बड़ी समस्याओं का समाधान निकालने की सीख देता है।
बाधाओं का नाश: यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जिनके काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं।अगर आप पहली बार यह व्रत कर रहे हैं, तो नीचे दी गई सरल विधि का पालन करें:

यह भी पढ़ें - 108 Names Of Lord Ganesha: गणेश जी के 108 नाम जपने से पूरी होती है सब मनोकामनाएं
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार लोभासुर नामक असुर ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। सभी देवता भयभीत होकर भगवान गणेश की शरण में गए। तब भगवान गणेश ने 'गजानन' अवतार लिया। लोभासुर को जब पता चला कि स्वयं विघ्नहर्ता युद्ध के लिए आए हैं, तो वह भयभीत होकर उनके चरणों में गिर पड़ा और अपनी गलतियों की क्षमा मांगी। भगवान गजानन ने उसे क्षमा किया और देवताओं को भयमुक्त किया। तभी से यह दिन जीवन के सभी संकटों से मुक्ति पाने के लिए मनाया जाता है।
गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026) केवल एक उपवास नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन को शुद्ध करने और ईश्वर से जुड़ने का एक माध्यम है। यदि आप पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ 2 अगस्त को यह व्रत रखते हैं, तो यकीन मानिए, बप्पा आपके जीवन की हर बाधा को वैसे ही दूर कर देंगे जैसे उगता सूरज अंधकार को मिटा देता है।
गणपति बप्पा मोरया!
1. गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026) में कब है?
यह व्रत 2 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा।
2. क्या संकष्टी चतुर्थी व्रत में नमक खा सकते हैं?
जी हाँ, आप शाम की पूजा और चंद्र दर्शन के बाद सेंधा नमक (Rock Salt) का उपयोग कर सकते हैं।
3. गणेश जी को कितनी दूर्वा चढ़ानी चाहिए?
गणेश जी को हमेशा जोड़ों में दूर्वा चढ़ानी चाहिए, विशेष रूप से 21 दूर्वा चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
4. 2 अगस्त 2026 को चंद्रोदय का समय क्या है?
दिल्ली में चंद्रोदय का समय रात 09:38 बजे है। स्थानीय पंचांग के अनुसार इसमें कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.