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May 18, 2026 Blog

Gajanana Sankashti 2026: गजानन संकष्टी 2026 व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

गजानन संकष्टी 2026: आपके हर संकट को हर लेंगे बप्पा, जानें अगस्त की इस चतुर्थी का महत्व और मुहूर्त (Gajanana Sankashti 2026: Bappa will overcome all your troubles, know the significance and auspicious time of this Chaturthi of August)

जीवन में कभी-कभी ऐसा समय आता है जब हमें लगता है कि चारों ओर से परेशानियों ने हमें घेर लिया है। ऐसे समय में बस एक ही नाम याद आता है - विघ्नहर्ता श्री गणेश। गणेश जी का एक नाम 'गजानन' भी है, जो न केवल बुद्धि के देवता हैं, बल्कि हमारे जीवन के बड़े से बड़े अवरोधों को पल भर में दूर करने की शक्ति रखते हैं। साल के अगस्त महीने में आने वाली गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026) एक ऐसा ही पावन अवसर है, जब आप बप्पा को प्रसन्न कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि का द्वार खोल सकते हैं।

गजानन संकष्टी क्या है? (What is Gajanana Sankashti 2026)

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। सावन मास की संकष्टी को गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026)के नाम से जाना जाता है। 'संकष्टी' का अर्थ होता है 'संकटों को हरने वाली'। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान गणेश की उपासना करने से इंसान के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का अंत हो जाता है।

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गजानन संकष्टी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Date & Muhurat)


साल में गजानन संकष्टी 2026  (Gajanana Sankashti 2026) का व्रत अगस्त के पहले रविवार को पड़ रहा है, जो इसे और भी विशेष बनाता है।

व्रत की तिथि: 2 अगस्त 2026, रविवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 1 अगस्त 2026, रात 11:07 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 2 अगस्त 2026, रात 11:15 बजे तक
चंद्रोदय का समय: रात 09:38 बजे (नई दिल्ली के अनुसार)

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Religious and spiritual significance)

गजानन संकष्टी 2026  (Gajanana Sankashti 2026) का आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। शास्त्रों के अनुसार, 'गजा' का अर्थ है हाथी और 'आनन' का मुख। भगवान गणेश का यह स्वरूप हमें शांत रहकर बड़ी समस्याओं का समाधान निकालने की सीख देता है।

बाधाओं का नाश: यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जिनके काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं।
बुद्धि और ज्ञान: बप्पा की कृपा से साधक को उत्तम बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता प्राप्त होती है।
ग्रह दोष से मुक्ति: माना जाता है कि जिनका बुध या केतु ग्रह कमजोर है, उनके लिए यह व्रत रामबाण है।

विस्तृत पूजा विधि (elaborate puja ritual)

अगर आप पहली बार यह व्रत कर रहे हैं, तो नीचे दी गई सरल विधि का पालन करें:

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ लाल या पीले वस्त्र पहनें।
  • संकल्प: भगवान गणेश के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें - “हे गजानन, मैं अपने संकटों के निवारण हेतु आज आपका व्रत रख रहा/रही हूँ।"
  • स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • अभिषेक: बप्पा को जल और गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं क्योंकि गणेश जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है।
  • अर्पण: बप्पा को 21 दूर्वा (घास) की गांठें चढ़ाएं। इसके साथ ही लाल फूल और अक्षत अर्पित करें।
  • भोग: मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
  • दीपक और आरती: धूप-दीप जलाकर 'गणेश चालीसा' का पाठ करें और अंत में आरती गाएं।
  • चंद्र दर्शन: रात को चंद्रमा निकलने पर उन्हें दूध और जल से अर्घ्य दें और फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें।

व्रत के नियम (rules of fasting)

ganesh vrat 2026

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  • इस व्रत में पूरे दिन निराहार रहना सबसे उत्तम है, लेकिन यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो फलाहार (दूध, फल) ले सकते हैं।
  • व्रत के दौरान अपशब्दों का प्रयोग न करें और सात्विक विचार रखें।
  • ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
  • अन्न का सेवन रात में चंद्र दर्शन के बाद ही करें (सेंधा नमक का प्रयोग कर सकते हैं)।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)

क्या करें:

  • गणेश जी को दूर्वा की 21 गांठें जरूर चढ़ाएं, यह बप्पा को बहुत प्रिय है।
  • दिन भर 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का मानसिक रूप से जाप करते रहें।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को फल या अनाज का दान दें।
  • चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देते समय चांदी के लोटे या तांबे के पात्र का उपयोग करें।
  • घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाएं ताकि घर में सकारात्मकता आए।

क्या न करें:

  • गणेश पूजन में कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करें, यह वर्जित माना जाता है।
  • व्रत के दौरान किसी भी व्यक्ति का अपमान न करें और न ही झूठ बोलें।
  • तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।
  • चंद्रोदय से पहले कुछ भी भारी भोजन न करें।
  • गणेश जी की पीठ के दर्शन न करें, हमेशा उनके सम्मुख बैठकर पूजा करें।

गजानन संकष्टी व्रत के लाभ (Benefits of Gajanana Sankashti Vrat)

  • संतान सुख और उनकी उन्नति के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी है।
  • घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति का वास होता है।
  • व्यापार और करियर में आ रही बड़ी रुकावटें दूर होती हैं।
  • बड़ी बीमारियों और अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है।

पौराणिक कथा (Story)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार लोभासुर नामक असुर ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। सभी देवता भयभीत होकर भगवान गणेश की शरण में गए। तब भगवान गणेश ने 'गजानन' अवतार लिया। लोभासुर को जब पता चला कि स्वयं विघ्नहर्ता युद्ध के लिए आए हैं, तो वह भयभीत होकर उनके चरणों में गिर पड़ा और अपनी गलतियों की क्षमा मांगी। भगवान गजानन ने उसे क्षमा किया और देवताओं को भयमुक्त किया। तभी से यह दिन जीवन के सभी संकटों से मुक्ति पाने के लिए मनाया जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026) केवल एक उपवास नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन को शुद्ध करने और ईश्वर से जुड़ने का एक माध्यम है। यदि आप पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ 2 अगस्त को यह व्रत रखते हैं, तो यकीन मानिए, बप्पा आपके जीवन की हर बाधा को वैसे ही दूर कर देंगे जैसे उगता सूरज अंधकार को मिटा देता है।

गणपति बप्पा मोरया!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. गजानन संकष्टी 2026 (Gajanana Sankashti 2026) में कब है?
यह व्रत 2 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा।

2. क्या संकष्टी चतुर्थी व्रत में नमक खा सकते हैं?
जी हाँ, आप शाम की पूजा और चंद्र दर्शन के बाद सेंधा नमक (Rock Salt) का उपयोग कर सकते हैं।

3. गणेश जी को कितनी दूर्वा चढ़ानी चाहिए?
गणेश जी को हमेशा जोड़ों में दूर्वा चढ़ानी चाहिए, विशेष रूप से 21 दूर्वा चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

4. 2 अगस्त 2026 को चंद्रोदय का समय क्या है?
दिल्ली में चंद्रोदय का समय रात 09:38 बजे है। स्थानीय पंचांग के अनुसार इसमें कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

5. क्या महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?
हाँ, यह व्रत महिलाएं और पुरुष दोनों अपनी मनोकामना पूर्ति और घर की सुख-शांति के लिए रख सकते हैं।
Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.