Kaal Bhairav Ashtakam: श्री कालभैरव अष्टक भगवान कालभैरव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है। इसकी रचना महान दार्शनिक और संत आदि शंकराचार्य द्वारा की गई मानी जाती है। इस स्तोत्र में भगवान कालभैरव के तेजस्वी, उग्र और दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है तथा उनकी महिमा का गुणगान किया गया है।
भगवान कालभैरव को भगवान शिव का ही एक शक्तिशाली रूप माना जाता है। उनका स्वरूप भले ही प्रचंड और भयानक दिखाई देता हो, लेकिन वे अपने भक्तों के प्रति अत्यंत दयालु और करुणामय होते हैं। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी आराधना करता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान कालभैरव करते हैं और उसे भय तथा बाधाओं से मुक्त करते हैं।
श्री कालभैरव अष्टक का (Kaal Bhairav Ashtakam) पाठ करने से भक्तों के मन में साहस, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है। यही कारण है कि यह स्तोत्र भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और भगवान कालभैरव की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धापूर्वक गाया या पढ़ा जाता है।
देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् ।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ १॥
हिंदी अनुवाद : जिनके पवित्र चरणों की सेवा स्वयं देवराज इंद्र करते हैं, जो अपने मस्तक पर चंद्रमा और सर्प को आभूषण के रूप में धारण करते हैं, और जो दिगंबर स्वरूप में विराजमान हैं—ऐसे प्रभु की महिमा अद्भुत मानी जाती है। देवर्षि नारद सहित अनेक योगी और संत भी श्रद्धा के साथ उनकी स्तुति और वंदना करते हैं। काशी के अधिपति और भक्तों के रक्षक भगवान कालभैरव के उस दिव्य स्वरूप का मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण करता हूं।
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् ।
कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ २॥
हिंदी अनुवाद : जो करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी और प्रकाशमान हैं, जो अपने भक्तों को जीवन के दुखों और संसार रूपी भवसागर से पार लगाने वाले हैं, ऐसे भगवान की महिमा अनंत है। उनका कंठ नीला है, तीन नेत्रों से वे समस्त संसार पर दृष्टि रखते हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
वे समय के भी स्वामी माने जाते हैं और उनका त्रिशूल तीनों लोकों की शक्ति का प्रतीक है। ऐसे अविनाशी और दिव्य स्वरूप वाले काशी के अधिपति भगवान कालभैरव का मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण और वंदन करता हूँ।
शूलटंकपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ३॥
हिंदी अनुवाद: जो अपने हाथों में त्रिशूल, पाश, कुल्हाड़ी और दंड धारण किए हुए हैं, जिनकी शक्ति से सृष्टि का संचालन होता है और जिनका स्वरूप सांवला तथा तेजस्वी है, ऐसे प्रभु आदिदेव के रूप में पूजित हैं। वे सांसारिक दुखों और रोगों से परे माने जाते हैं और उनका अद्भुत तांडव उनके दिव्य और उर्जावान स्वरूप को दर्शाता है। ऐसे काशी के अधिपति भगवान कालभैरव का मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण करता हूँ। 
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् ।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥ ४॥
हिंदी अनुवाद : जो अपने भक्तों को मुक्ति का मार्ग दिखाने वाले हैं, जिनका स्वरूप मंगलमय और आनंद प्रदान करने वाला है, वे भगवान कालभैरव अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखते हैं। उनका प्रेम और संरक्षण तीनों लोकों में प्रसिद्ध माना जाता है। उनकी कमर में बंधी घंटियों की मधुर ध्वनि उनके दिव्य और अद्भुत स्वरूप को और भी विशेष बनाती है। ऐसे काशी के अधिपति भगवान कालभैरव का मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण और वंदन करता हूँ।
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशनं कर्मपाशमोचकं सुशर्मधायकं विभुम् ।
स्वर्णवर्णशेषपाशशोभितांगमण्डलं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ५॥
हिंदी अनुवाद : जो धर्म की रक्षा करने वाले और अधर्म के मार्ग का अंत करने वाले हैं, वे भगवान अपने भक्तों को कर्मों के बंधन से मुक्त करने की शक्ति रखते हैं। उनका दिव्य स्वरूप स्वर्ण आभा वाले सर्प से सुशोभित माना जाता है, जो उनकी अद्भुत शक्ति और तेज का प्रतीक है। ऐसे काशी के अधिपति भगवान कालभैरव का मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण और भजन करता हूँ।
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम् ।
मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ६॥
हिंदी अनुवाद : जिनके चरण रत्नों की आभा से सुशोभित हैं और जिन्हें भक्त अपना इष्ट देव मानकर श्रद्धा से पूजते हैं, वे अत्यंत पवित्र और दिव्य स्वरूप वाले भगवान हैं। उनकी कृपा से भक्तों के मन से मृत्यु का भय दूर हो जाता है और उन्हें साहस तथा सुरक्षा का अनुभव होता है। ऐसे काशी के अधिपति भगवान कालभैरव का मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण और वंदन करता हूँ।
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं दृष्टिपात्तनष्टपापजालमुग्रशासनम् ।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ७॥
हिंदी अनुवाद : जिनकी दिव्य हंसी की ध्वनि से कमल से उत्पन्न ब्रह्मा की सृष्टि भी क्षण भर के लिए स्थिर हो जाती है, जिनकी कृपा दृष्टि मात्र से ही पापों का नाश हो जाता है। वे अपने भक्तों को अष्ट सिद्धियों का वरदान देने वाले माने जाते हैं और मुंडों की माला धारण किए उनके तेजस्वी और प्रभावशाली स्वरूप का वर्णन किया जाता है। ऐसे काशी के अधिपति भगवान कालभैरव का मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण और भजन करता हूँ।
भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम् ।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ८॥
हिंदी अनुवाद : जो भूत-प्रेत और अदृश्य शक्तियों के भी स्वामी माने जाते हैं तथा अपने भक्तों को यश और सम्मान प्रदान करने वाले हैं, वे भगवान कालभैरव धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उनका स्वरूप समस्त संसार के स्वामी और रक्षक के रूप में पूजनीय है। ऐसे काशी के अधिपति भगवान कालभैरव का मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण और वंदन करता हूँ।
॥ फल श्रुति॥
कालभैरवाष्टकं पठंति ये मनोहरं ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम् ।
शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं प्रयान्ति कालभैरवांघ्रिसन्निधिं नरा ध्रुवम् ॥
हिंदी अनुवाद : जो भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ कालभैरव अष्टकम का पाठ (Kaal Bhairav Ashtakam) करते हैं, उन्हें ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस स्तोत्र का नियमित स्मरण करने से व्यक्ति को पुण्य फल मिलता है और उसके जीवन से अनेक कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं।
भक्तों का विश्वास है कि भगवान कालभैरव की कृपा से मन में उत्पन्न होने वाले शोक, मोह, लोभ, क्रोध और अन्य नकारात्मक भावों का नाश होता है। साथ ही व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मिक बल प्राप्त होता है। अंततः ऐसे श्रद्धालु भगवान कालभैरव के चरणों में स्थान पाते हैं और उनके जीवन में भक्ति तथा आध्यात्मिक सुख का मार्ग प्रशस्त होता है।
॥इति कालभैरवाष्टकम् संपूर्णम् ॥
काल भैरव अष्टक का पाठ श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से भक्तों को कई आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। यह स्तोत्र व्यक्ति को धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है तथा जीवन में सही दिशा अपनाने का संदेश भी देता है।
मान्यता है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से व्यक्ति के पापों और नकारात्मक कर्मों का प्रभाव कम होने लगता है और मन में शुद्धता तथा सकारात्मकता का संचार होता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी काल भैरव अष्टक का पाठ लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि इसके जप से राहु, केतु और शनि से जुड़े अशुभ प्रभावों को कम करने में सहायता मिल सकती है।
भक्तों का विश्वास है कि इस स्तोत्र का नियमित स्मरण जीवन की कई बाधाओं और परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है तथा व्यक्ति को मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर या किसी प्रकार के भय का अनुभव होता है, तो भगवान कालभैरव की आराधना और काल भैरव अष्टक का पाठ उसे मानसिक साहस और सुरक्षा का अनुभव कराने में मदद कर सकता है।
काल भैरव अष्टक (Kaal Bhairav Ashtakam) भगवान कालभैरव की महिमा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र स्तोत्र माना जाता है। इसका श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करने से मन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही यह स्तोत्र व्यक्ति को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।
मान्यता है कि भगवान कालभैरव की आराधना करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और भक्त को भय तथा नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। इसलिए काल भैरव अष्टक केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति, आस्था और भगवान के प्रति समर्पण का एक सुंदर माध्यम भी है।
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Dr. Sandeep Ahuja, an Ayurvedic doctor with 14 years’ experience, blends holistic health, astrology, and Ayurveda, sharing wellness practices that restore mind-body balance and spiritual harmony.