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March 6, 2026 Blog

Shree Ganga Stotram : श्री गंगा स्तोत्र के पाठ से मिलती है पापो से मुक्ति

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श्री गंगा स्तोत्रम का महत्व : श्री गंगा स्तोत्रम की रचना महान संत और दार्शनिक आदि शंकराचार्य द्वारा की गई मानी जाती है। हिंदू धर्म में गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि देवी स्वरूप मानी जाती हैं, जिन्हें माँ के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गंगा के दर्शन, उनका नाम स्मरण करने या उनके जल के स्पर्श मात्र से मनुष्य के पापों का नाश होता है और जीवन में पवित्रता आती है।

वैदिक काल से ही गंगा को अत्यंत पवित्र नदी का स्थान प्राप्त है। ऋग्वेद में गंगा का उल्लेख सीमित रूप से मिलता है, जबकि यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में गंगा को एक पवित्र और जीवनदायिनी नदी के रूप में सम्मानित किया गया है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार विशेष पर्वों और पवित्र अवसरों पर गंगा स्नान करने से पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। माना जाता है कि गंगा माता अपने भक्तों को दिव्य आशीर्वाद प्रदान करती हैं। पृथ्वी पर गंगा का उद्गम उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में स्थित गौमुख (गंगोत्री) हिमनद से माना जाता है।


श्री गंगा स्तोत्रम का महत्व (Importance Of Ganga Stotram)

श्री गंगा स्तोत्रम (Shree Ganga Stotram) माँ गंगा की महिमा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत भक्तिमय स्तोत्र है। भारतीय संस्कृति में गंगा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सदियों से अविरल बहती हुई गंगा ने भारत की संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। इसके तटों पर ही अनेक संतों और ऋषियों ने तप, साधना और आध्यात्मिक ज्ञान की खोज की है।

गंगा को मोक्ष प्रदान करने वाली और पतितों को पवित्र करने वाली माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि गंगा के सान्निध्य में आने से मनुष्य के मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं और जीवन में शांति तथा पवित्रता का अनुभव होता है। गंगा के प्रति श्रद्धा और आस्था ने ही उन्हें भारतीय जनमानस के हृदय में विशेष स्थान दिलाया है।

भक्ति भाव से श्री गंगा स्तोत्रम का पाठ (Shree Ganga Stotram) करने से मन शांत होता है, नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति की बुद्धि निर्मल होती है। धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन के दुख और कष्ट कम होते हैं तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

ll श्री गंगा स्तोत्र पाठ ll

ll  Shree Ganga Stotram Lyrics ll


देवी सुरेश्वरि भगवती गंगे त्रिभुवनतारिणी द्रव्य तरंगे।

शंकर मौलीविहारिणि विमले मम मति मार्गं तव पद कमले॥ ॥

भागीरथिसुखदायिनी मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः।

नाहं जाने तव महिमानन पाहि कृपामयी मामज्ञानम् ॥ 2॥


हरिपपाद्यतरंगिणी गंगे हिमविधुमुक्तधावलतरंगे।

दूरीकुरु मम दुष्कृतिभरं कुरु कृपया भवसागरपरम् ॥ 3 ॥


तव जलममलं येन निपीतं परमपदं खलु तेन गृहीतम्।

मातर्गंगे त्वयि यो भक्तः किल तं दृष्टुं न यमः शकतः ॥ 4 ॥


पतितोद्धारिणी जाह्न्वी गंगे खंडित गिरिवरमंडित भंगे।

भीष्मजननि हे मुनिवरकण्ये पतितनिवारिणि त्रिभुवन धन्ये ॥ 5 ॥


कल्पलतामिव फलदं लोके प्राणमति यस्त्वां न पतति शोके।

पारावारविहारिणि गंगे विमुखयुवति कृततरलापंगे ॥ 6 ॥


तव चेन्मातः स्रोतः सनातः पुनरपि जठरे सोपि न जातः।

नरकनिवारिणि जाह्न्वी गंगे कलुषविनाशिनि महिमोत्तुंगे ॥ 7 ॥


पुनरसदंगे पुण्यतरंगे जय जय जाह्न्वी करुणापांगे।

इन्द्रमुकुटमणिराजितचरणे सुखदे शुभदे भृत्यश्रण्ये॥ 8॥


रोगं शोकं तापं पापं हर मे भगवती कुमतिकलापम्।

त्रिभुवनसारे वसुधाहरे त्वमसि गतिर्मं खलु संसारे ॥ 9 ॥


अलकनन्दे परमानन्दे कुरु करुणामयि कातरवन्दये।

तव तत्निक्ते यस्य निवासः खलु वैकुंठे तस्य निवासः ॥ दस ॥


वरमिह नियरे कमठो मीनः किं वा तीरे शरतः क्षणः।

यश्वापचो मलिनो दीनस्तव न हि दूरे नृपतिकुलीनः ॥ ॥


भूर्वि पुण्ये धन्ये देवी द्रव्यमयि मुनिवरकण्ये।

गंगास्तवमिम्मलं नित्यं पथति नरो यः स जयति सत्यम् ॥ 12 ॥


येषां हृदये गंगा भक्तिस्तेषां भवति सदा सुखमुक्तिः।

कन्ता पञ्जितिका मधुरभिः परमानंदकलितललिताभिः ॥ 13 ॥


गंगास्तोत्रमिदं भवसारं कृष्णफलदं विमलं सारम्।

शंकरसेवक शंकर रचितं पतिति सुखीः त्व ॥ 14॥

॥ इति गंगास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥


श्री गंगा स्तोत्रम् के लाभ (Benefits Of Shree Ganga Stotram)

श्री गंगा स्तोत्रम् का श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका नियमित जाप करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और मानसिक व आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। इसके कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार माने जाते हैं—

  1. पापों से मुक्ति: गंगा स्तोत्र का पाठ (Shree Ganga Stotram Lyrics) करने से व्यक्ति के नकारात्मक कर्मों और पापों का प्रभाव कम होता है और मन की शुद्धि होती है।
  2. आध्यात्मिक उन्नति: इसका नियमित जाप करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक चेतना बढ़ती है और ईश्वर के प्रति श्रद्धा मजबूत होती है।
  3. नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: गंगा स्तोत्र का पाठ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करता है।
  4. मानसिक शांति: इसके पाठ से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और विचारों में स्पष्टता आती है।
  5. स्वास्थ्य और कल्याण: श्रद्धापूर्वक जप करने से मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
  6. प्रकृति और परमात्मा से जुड़ाव: गंगा स्तोत्र के माध्यम से व्यक्ति प्रकृति की पवित्रता और दिव्य शक्ति से गहरा संबंध महसूस करता है।
  7. समृद्धि का आशीर्वाद: धार्मिक विश्वास है कि गंगा माता की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और शुभता का आगमन होता है।

स्तोत्र का जाप कैसे करें? (How to chant the Shree Ganga stotram?)

श्री गंगा स्तोत्रम् का पाठ (Shree Ganga Stotram Lyrics) करने से पहले कुछ सरल पारंपरिक बातों का ध्यान रखने से जप अधिक प्रभावी और शांतिपूर्ण अनुभव बन सकता है।

  1. शारीरिक और मानसिक शुद्धि:
    जप शुरू करने से पहले स्नान कर लें या कम से कम हाथ-मुंह धो लें। यह बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  2. शांत स्थान का चयन:
    ऐसी जगह चुनें जहाँ शांति हो और कोई व्यवधान न हो, ताकि आप पूरे मन से स्तोत्र के पाठ पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
  3. स्वच्छ और आरामदायक वस्त्र:
    साफ और हल्के कपड़े पहनें ताकि आप आराम से बैठकर भक्ति भाव के साथ जप कर सकें।
  4. श्रद्धा और भक्ति का भाव:
    जप करते समय मन में मां गंगा के प्रति श्रद्धा रखें और अपने उद्देश्य को स्पष्ट करें, जैसे मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति या जीवन में सकारात्मकता की कामना।
  5. प्रारंभ में प्रार्थना:
    जप शुरू करने से पहले मां गंगा को नमन करते हुए एक छोटी-सी प्रार्थना करें और उनसे अपने जीवन में शांति, सुख और आशीर्वाद की कामना करें।

भक्ति और एकाग्रता के साथ किया गया गंगा स्तोत्र का पाठ मन को पवित्र करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।