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February 25, 2026 Blog

Vastu Shastra For Home: यहाँ पढ़े घर का वास्तु दोष के कारण और उसके निवारण के उपाय

BY : Raghav Kapoor – Vastu Consultant & Architectural Advisor

Vastu Shastra For Home: वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की ऊर्जा को संतुलित करने की एक पारंपरिक पद्धति है। माना जाता है कि जब घर या कार्यालय का निर्माण और व्यवस्था वास्तु सिद्धांतों के अनुसार होती है, तो जीवन में सुख, समृद्धि, अच्छी सेहत और सकारात्मक अवसर बढ़ते हैं। वहीं, यदि स्थान वास्तु (Vastu) के अनुरूप न हो और हम वहां लंबे समय तक रहें या काम करें, तो मानसिक तनाव, आर्थिक रुकावटें और अनावश्यक परेशानियाँ बढ़ सकती हैं।

इस ब्लॉग में हम घरों में पाए जाने वाले कुछ सामान्य वास्तु दोषों और उनके आसान उपायों (Vastu Dosh Upay) पर चर्चा करेंगे, जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।


वास्तु दोष क्या होता है  (What Is Vastu Dosh)

वास्तु दोष का सीधा संबंध घर या कार्यस्थल में ऊर्जा के असंतुलन से माना जाता है। जब कमरों की दिशा, फर्नीचर की व्यवस्था, रोशनी, हवा या रंगों का तालमेल सही नहीं होता, तो वातावरण में असहजता महसूस होने लगती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा असंतुलन नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकता है और व्यक्ति की प्रगति में बाधा डाल सकता है। यदि बार-बार आर्थिक परेशानियाँ, मानसिक तनाव या नींद से जुड़ी समस्याएँ सामने आ रही हों, तो इसे भी कई लोग वास्तु असंतुलन से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहता है।

वास्तु दोष के संभावित संकेत (Possible signs of Vastu Dosh) 

वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) संतुलित और सकारात्मक ऊर्जा वाले वातावरण पर जोर देता है। नीचे दिए गए कुछ संकेत इस ओर इशारा कर सकते हैं कि घर में ऊर्जा का प्रवाह सही नहीं है।

1. पारिवारिक मतभेद

यदि घर में अक्सर तनावपूर्ण माहौल बना रहता है, छोटी-छोटी बातों पर बहस हो जाती है या परिवार के सदस्यों के बीच दूरी बढ़ने लगे, तो यह असामंजस्य का संकेत हो सकता है।

2. सकारात्मक ऊर्जा में कमी
  • घर में बिना किसी स्पष्ट कारण के बेचैनी या घुटन महसूस होना।
  • कमरे का तापमान अचानक असामान्य लगना, जबकि मौसम सामान्य हो।
  • उचित रोशनी और वेंटिलेशन के बावजूद वातावरण भारी या बोझिल लगना।

ये स्थितियाँ इस बात का संकेत हो सकती हैं कि घर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित नहीं है।

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3. स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ
  • बार-बार बिना स्पष्ट कारण के बीमार पड़ना या एलर्जी की शिकायत रहना।
  • अनिद्रा या गहरी नींद न आना।
  • सिरदर्द, जोड़ों में दर्द या पाचन से जुड़ी दिक्कतें लगातार बनी रहना।

इन लक्षणों को कई लोग वास्तु असंतुलन (Vastu For Home) से जोड़ते हैं, हालांकि चिकित्सकीय सलाह लेना हमेशा आवश्यक है।

इन कारणों से लग सकता है वास्तु दोष  (Vastu Dosh can occur due to these reasons) 

वास्तुशास्त्र (Vastu Shastra for home) के अनुसार घर में छोटी-छोटी लापरवाहियां भी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं। इसलिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

  • झाड़ू का सही स्थान और सम्मान
    झाड़ू को साफ-सुथरी जगह पर रखना चाहिए। उसके ऊपर भारी सामान रखना या उसे पटककर फेंक देना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की लक्ष्मी रूठ सकती हैं और आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

  • टूटी-फूटी वस्तुओं का उपयोग
    घर में टूटे बर्तन, दरार वाला पलंग या खराब फर्नीचर रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता। ऐसी वस्तुएं नकारात्मकता का संकेत मानी जाती हैं। कहा जाता है कि इससे अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं और धन संचय में बाधा आ सकती है।

  • सूर्योदय के बाद तक सोते रहना
    धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्योदय से पहले उठना शुभ माना गया है। देर तक सोते रहना आलस्य और ऊर्जा की कमी का कारण बन सकता है, जिसे वास्तु में अशुभ माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर दिन की शुरुआत करने से सकारात्मकता बनी रहती है।

  • मंदिर में सूखे फूल न रखें
    पूजा स्थान को हमेशा स्वच्छ और पवित्र रखना चाहिए। देवी-देवताओं को अर्पित किए गए फूल या मालाएं सूख जाने के बाद अगले दिन हटा देना उचित माना जाता है। सूखे फूलों को मंदिर में रखना अशुभ प्रभाव दे सकता है और घर के वातावरण की शुद्धता को प्रभावित कर सकता है।

इन सरल सावधानियों को अपनाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

वास्तुदोष से राहत पाने के उपाय (Remedies to get relief from Vastu Dosh) 

यदि घर में लगातार परेशानियाँ बनी रहती हैं और काम बनते-बनते रुक जाते हैं, तो कई लोग इसे वास्तु असंतुलन से जोड़कर देखते हैं। ऐसी स्थिति में घर के मुख्य द्वार के पास एक ओर केले का पौधा और दूसरी ओर तुलसी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है तथा प्रगति के मार्ग खुलने लगते हैं।

धन-समृद्धि बढ़ाने का उपाय

विशेष पर्व जैसे शिवरात्रि, दीपावली या होली की रात तांबे के तीन सिक्कों की विधिपूर्वक पूजा करना शुभ माना गया है। पूजा के बाद इन सिक्कों को तिजोरी या जहां धन और आभूषण रखे जाते हैं, वहां सुरक्षित रख दें। विश्वास है कि इससे अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण होता है और घर में धन का संचय बढ़ने लगता है। यह सरल उपाय आर्थिक स्थिरता लाने में सहायक माना जाता है।

सुख-शांति और समृद्धि के लिए

घर के पूजा स्थान में स्फटिक का शिवलिंग स्थापित कर नियमित पूजा करना लाभकारी बताया गया है। साथ ही, मंदिर स्थान को हमेशा स्वच्छ और व्यवस्थित रखना चाहिए। कहा जाता है कि साफ-सुथरा पूजा स्थल सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। स्फटिक का शिवलिंग घर में शांति, सौहार्द और समृद्धि को बढ़ावा देने वाला माना जाता है। (Vastu for home) 

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तरक्की और ईश्वर की कृपा के लिए

घर के मंदिर में प्रतिदिन दीपक जलाना और सुबह-शाम पूजा के समय शंख बजाना शुभ माना गया है। ऐसा करने से वातावरण में पवित्रता और सकारात्मकता बनी रहती है। मान्यता है कि नियमित पूजा और शंखनाद से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे जीवन में उन्नति के अवसर बढ़ते हैं और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने की संभावना रहती है।


वास्तु दोष के अन्य कारण और निवारण उपाय (Other Causes and Remedies for Vastu Dosh)

घर के भीतर या बाहर कई प्रकार के वास्तु असंतुलन हो सकते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे दोष जीवन में बाधाएं, तनाव या आर्थिक परेशानियां ला सकते हैं। यदि आपका घर कोने पर बना है, तिराहे या चौराहे पर स्थित है, दक्षिणमुखी है या अंदरूनी संरचना में कोई वास्तु संबंधी कमी महसूस होती है, तो कुछ सरल उपाय अपनाकर सकारात्मक वातावरण बनाया जा सकता है। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।
1. यदि घर दक्षिणमुखी है

दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार होने पर घर के बाहर थोड़ी दूरी पर नीम का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार के ऊपर पंचमुखी हनुमानजी का चित्र या पंचधातु का पिरामिड लगाया जा सकता है। कुछ लोग दरवाजे पर ऐसे गणेशजी की प्रतिमा भी स्थापित करते हैं, जिनका मुख एक अंदर और एक बाहर की ओर हो। इससे सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीकात्मक भाव बना रहता है।

2. एक सीध में कई दरवाजे

यदि मुख्य द्वार के बाद घर के अंदर के दरवाजे भी सीधे एक लाइन में हों, तो बीच वाले दरवाजे पर परदा या विंड चाइम लगाया जा सकता है। इससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित माना जाता है। बड़े हॉल में सजावटी पार्टिशन या सुंदर पेंटिंग भी लगाई जा सकती है।

3. रसोई सही दिशा में न हो

यदि रसोई आग्नेय कोण में नहीं है, तो रसोई के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में गणेशजी की तस्वीर या यज्ञ करते ऋषियों का चित्र लगाया जा सकता है। इससे वातावरण में पवित्रता और संतुलन का भाव बना रहता है।

4. कर्पूर का उपाय

घर के जिस स्थान पर नकारात्मकता महसूस हो, वहां कपूर की दो टिकियां रखी जा सकती हैं। जब वे समाप्त हो जाएं, तो नई टिकियां रख दें। यह उपाय वातावरण को सुगंधित और शुद्ध बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

5. बाथरूम और टॉयलेट साथ हो तो

यदि स्नानघर और शौचालय (Toilet Position as per Vastu) एक साथ हों, तो उनकी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। वहां नीले रंग के बर्तन रखना शुभ माना जाता है। एक कटोरे में सेंधा नमक भरकर कोने में रखने से नकारात्मक ऊर्जा कम होने की मान्यता है। यदि शौचालय ईशान दिशा में हो, तो बाहर की दीवार पर सकारात्मक और शक्तिशाली चित्र लगाया जा सकता है।

6. शयन कक्ष की दिशा

शयनकक्ष आदर्श रूप से दक्षिण-पश्चिम या उत्तर दिशा में होना चाहिए। यदि यह अग्निकोण में हो, तो पूर्व दीवार पर शांत समुद्र का चित्र लगाया जा सकता है। सोते समय सिर पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर रखने की सलाह दी जाती है।

7. ईशान दिशा का ध्यान

घर की उत्तर-पूर्व दिशा को साफ और हल्का रखें। यहां पीतल के पात्र में जल भरकर रखना या तुलसी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। जल को प्रतिदिन बदलना आवश्यक है।

8. धार्मिक पाठ

समय-समय पर सुंदरकांड या रामचरितमानस का पाठ करवाने से घर का वातावरण आध्यात्मिक और सकारात्मक बना रहता है। इससे मानसिक शांति का अनुभव होता है।

9. घर को सुंदर और संतुलित रखें

घर को स्वास्तिक चिन्ह, रंगोली या पौधों से सजाएं। हल्के और सौम्य रंग जैसे पीला, गुलाबी या हल्का नीला उपयोग करें। दक्षिण दिशा में भारी सामान रखना संतुलन के लिए उचित माना जाता है। जरूरत पड़ने पर फर्नीचर की स्थिति बदलकर भी ऊर्जा संतुलन बेहतर किया जा सकता है।

इन उपायों (Vastu Dosh Upay) का उद्देश्य घर में स्वच्छता, संतुलन और सकारात्मकता बनाए रखना है। जब वातावरण शांत और व्यवस्थित होता है, तो परिवार में सुख-शांति और प्रगति का मार्ग स्वतः प्रशस्त होता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

अंततः, वास्तु दोष (Vastu Dosh) का मूल संबंध हमारे रहने के स्थान में संतुलन और ऊर्जा के प्रवाह से जुड़ा माना जाता है। जब घर का वातावरण अव्यवस्थित या असामंजस्यपूर्ण होता है, तो उसका प्रभाव मानसिक शांति, पारिवारिक संबंधों और दैनिक जीवन पर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने घर को स्वच्छ, व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखें।

साथ ही, किसी भी समस्या को केवल वास्तु दोष (Vastu Dosh) से जोड़ने के बजाय व्यावहारिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना भी आवश्यक है। यदि सही मार्गदर्शन और समझ के साथ छोटे-छोटे सुधार किए जाएं, तो घर में सुख-शांति और संतुलन स्थापित किया जा सकता है। सकारात्मक सोच, आपसी प्रेम और सामंजस्य ही किसी भी घर को वास्तव में खुशहाल बनाते हैं।

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Author: Raghav Kapoor – Vastu Consultant & Architectural Advisor

Raghav Kapoor, with 10+ years of expertise, blends traditional Vastu Shastra and modern architecture to create harmonious living and working spaces that enhance prosperity, balance, and overall well-being.