बजरंग बाण: पाठ करने के नियम, महत्वपूर्ण तथ्य और लाभ

बजरंग बाण: पाठ करने के नियम, महत्वपूर्ण तथ्य और लाभ

हनुमान जी की कृपा पाने हेतु सभी भक्तजन भिन्न- भिन्न प्रकार से हनुमान जी की पूजा करते है जिनमें नियमित रूप से हनमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करना हनुमान जी को अति प्रिय है| हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के पाठ हमेशा बोलकर करने चाहिए जबकि मंत्र द्वारा आराधना में मंत्र को मन ही मन उच्चारण करना चाहिए| हनुमान जी के बजरंग बाण की महिमा अपार है| ऐसी मान्यता है कि जो भक्त नियमित रूप से बजरंग बाण का पाठ करते है उनके लिए यह अचूक बाण का कार्य करता है| किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए बजरंग बाण का प्रयोग करने से कार्य अवश्य ही सिद्ध होता है|

बजरंग बाण
" दोहा "
"निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।"
"तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥"

"चौपाई"
जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।।
जैसे कूदि सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाई लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।।
बाग़ उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।।
अक्षयकुमार को मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर में भई।।
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होय दुख हरहु निपाता।।
जै गिरिधर जै जै सुखसागर। सुर समूह समरथ भटनागर।।
ॐ हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहिंं मारु बज्र की कीले।।
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो।।
ऊँकार हुंकार प्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ऊँ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा।।
सत्य होहु हरि शपथ पाय के। रामदूत धरु मारु जाय के।।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हौं दास तुम्हारा।।
वन उपवन, मग गिरिगृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
पांय परों कर ज़ोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
जय अंजनिकुमार बलवन्ता। शंकरसुवन वीर हनुमन्ता।।
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर।।
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की।।
जनकसुता हरिदास कहावौ। ताकी शपथ विलम्ब न लावो।।
जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा।।
चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पांय परों कर ज़ोरि मनाई।।
ॐ चं चं चं चं चपत चलंता। ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता।।
ऊँ हँ हँ हांक देत कपि चंचल। ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल।।
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै।।
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
यह बजरंग बाण जो जापै। ताते भूत प्रेत सब काँपै।।
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा।।

"दोहा"
" प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान। "
" तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान।। "

हनुमान जी

इस प्रकार से करें बजरंग बाण का पाठ

बजरंग बाण का पाठ करने के लिए सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें । इसके बाद श्री राम और सीता जी का ध्यान करें । अब हनुमान जी का ध्यान करते हुए उनसे अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए कहें । इसके बाद बजरंग बाण के पाठ का संकल्प लें । बजरंग बाण का पाठ करने के बाद भगवान श्रीराम का कीर्तन करें और फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें । बजरंग बाण का पाठ करने के लिए निम्न नियमों का पालन करें  बजरंग बाण के पाठ के दौरान सभी शब्दों का सही उच्चारण अवश्य करें । धूप, दीप और पुष्पों से हनुमानजी का पूजन करने के बाद जितनी बार संकल्प करें, उतनी बार जप करें । फिर कुश के आसन पर बैठकर बजरंग बाण का पाठ करने से पहले संकल्प लें । पाठ के दौरान हनुमानजी को प्रसाद के रूप में चूरमा, लड्डू और अन्य मौसमी फलों का भोग लगाया जा सकता है । बजरंग बाण का पाठ शुरू करने के लिए सबसे पहले उठकर स्नान करें, ध्यान करें और नाश्ते से पहले हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करें ।

इन स्थितियों में ना करें बजरंग बाण का पाठ

बजरंग बली को शुभ फलदायी देवता माना जाता है। आप मनोकामना पूर्ण करने के लिए बजरंग बाण का तो ज़रूर कर सकते हैं लेकिन कुछ ऐसी भी स्थितियाँ होती हैं जिसके अंतर्गत आपको इसका पाठ नहीं करना चाहिए।

  • किसी को नीचे दिखाने की मनोकामना के साथ कभी ना करें बजरंग बाण का पाठ।
  • किसी भी अनैतिक कार्य को सिद्ध करने या विवाद की स्थिति में विजय पाने के लिए इसका पाठ ना करें।
  • दैनिक जीवन में आने वाली सामान्य बाधा से मुक्ति पाने की स्थिति में।
  • बिना प्रयास के ही किसी कार्य को सिद्ध करने के लिए बजरंग बाण का पाठ ना करें।
  • धन, ऐश्वर्य या किसी भी भौतिक इच्छा की पूर्ति के लिए इसका पाठ ना करें।
  • किसी को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से बजरंग बाण का पाठ कदापि ना करें।

हमारे हिन्दू धर्मशास्त्र में विशेष रूप से बजरंग बाण को ख़ासा चमत्कारी और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला माना जाता है । लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि आप किसी भी निरर्थक कार्य के लिए बजरंग बाण का पाठ कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं । बजरंग बाण का पाठ विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन करना लाभदायक साबित हो सकता है ।  

बजरंग बाण का पाठ कर आप निश्चित रूप से अपनी समस्या का समाधान तो कर सकते हैं लेकिन यदि इसके साथ ही बजरंग बाण को सिद्ध करने की विधि का प्रयोग किया जाए तो इससे तत्काल ही लाभ प्राप्त किया जा सकता है । इसके लिए आप निम्न विधि का प्रयोग कर सकते हैं|  विधि बजरंग बाण सिद्धि के लिए मंगलवार की मध्यरात्रि को सबसे पहले पूर्व दिशा में एक चौकी स्थापित कर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछा दें और एक कागज पर “ ऊं हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” मंत्र लिख कर उसे यथावत उस चौकी पर रख दें । 

इसके बाद चौकी के दायीं तरफ घी का दिया जला कर रख दें और कुश के आसन पर बैठकर बजरंग बाण का करीब पांच बार पाठ करें । इसके बाद कागज पर लिखे मंत्र को उठाकर घर में बने मंदिर में रख दें और रोज उसकी पूजा करें । माना जाता है कि ऐसा करने से जल्द ही आपकी कामना पूरी हो सकती है ।

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