हर माता-पिता का यह सपना होता है कि उनके आंगन में बच्चे की किलकारियां गूंजें और उनका वंश आगे बढ़े। लेकिन कई बार जीवन की परिस्थितियां और ग्रहों की दशा ऐसी बन जाती है कि लाख कोशिशों के बाद भी गोद सूनी रह जाती है। ऐसे में निराश होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सनातन धर्म में भक्ति और विश्वास ही हर समस्या का समाधान है। पौष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पौष पुत्रदा एकादशी 2027 (Pausha Putrada Ekadashi 2027) भगवान श्री हरि विष्णु का वह अलौकिक वरदान है जो सूनी गोद को खुशियों से भर देता है। आइए जानते हैं कि वर्ष 2027 में पौष पुत्रदा एकादशी कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और किस विधि से पूजा करने पर मनचाहा फल मिलता है।
यदि आप भी संतान सुख और भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो पौष पुत्रदा एकादशी 2027 की तिथि (Pausha Putrada Ekadashi 2027 Date) का यह अवसर आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, विष्णु पूजा विधि (Vishnu Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।
Guruvayur Ekadashi 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा
पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी का पर्व (Pausha Putrada Ekadashi Festival) के नाम से जाना जाता है। नाम से ही स्पष्ट है पुत्रदा यानी पुत्र या संतान देने वाली। यह पावन व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों और अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य तथा लंबी आयु की कामना करने वाले माता-पिता के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन सर्वव्यापी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन और निष्ठा के साथ इस व्रत का पालन करता है, भगवान जनार्दन उसके जीवन से निसंतानता का कष्ट सदा के लिए समाप्त कर देते हैं।
वर्ष 2027 में पौष पुत्रदा एकादशी का पावन व्रत 18 जनवरी को रखा जाएगा। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए सही मुहूर्त में पूजा-पाठ और पारण करना बहुत जरूरी होता है। पौष पुत्रदा एकादशी शुभ मुहूर्त (Pausha Putrada Ekadashi Shubh Muhurat) की जानकारी नीचे दी गई है:
एकादशी तिथि (Pausha Putrada Ekadashi 2027 Date): 18 जनवरी 2027, सोमवार
एकादशी तिथि प्रारम्भ: 17 जनवरी 2027 को देर रात / 18 जनवरी तड़के
एकादशी तिथि समाप्त: 18 जनवरी 2027 को देर रात
पारण (व्रत तोड़ने का) समय (Pausha Putrada Ekadashi Parana Time): 19 जनवरी 2027 को प्रातः 07:15 बजे से प्रातः 09:20 बजे तक
(नोट: उदयातिथि के अनुसार 18 जनवरी 2027 को ही एकादशी का व्रत रखना शास्त्रसम्मत और उत्तम माना गया है।)
पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। उन्होंने कहा था कि तीनों लोकों में इस एकादशी के समान संतान सुख देने वाला कोई अन्य व्रत नहीं है।
आध्यात्मिक दृष्टि से यह व्रत केवल भौतिक सुख ही नहीं देता, बल्कि आत्मा को शुद्ध करता है। ऐसा माना जाता है कि पूर्व जन्म के पापों या पितृ दोषों के कारण यदि संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, तो पौष पुत्रदा एकादशी व्रत (Pausha Putrada Ekadashi Vrat) रखने से वे सभी पाप कट जाते हैं। यह पावन अवसर दंपत्ति के जीवन में प्रेम, धैर्य और सकारात्मकता का संचार करता है।

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भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा को पूरे नियम और शुद्ध भाव के साथ करना चाहिए। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण पूजा विधि:
प्रातः स्नान और संकल्प: एकादशी के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठें, घर की सफाई करें और स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें और भगवान के सामने हाथ में जल व तिल लेकर व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल की तैयारी: घर के मंदिर में या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
दीप प्रज्वलन और श्रृंगार: देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। श्री हरि को पीले फूल, पीले वस्त्र, चंदन, अक्षत और तुलसी पत्र अर्पित करें।
पंचामृत और भोग: भगवान विष्णु को पंचामृत, ऋतुफल और माखन-मिश्री का भोग लगाएं। याद रखें कि विष्णु जी के भोग में तुलसी पत्र होना अनिवार्य है।
कथा और मंत्र जाप: पौष पुत्रदा एकादशी की पावन व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। इसके बाद विष्णु मंत्र (Vishnu Mantra) 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
आरती: अंत में कपूर और घी के दीपक से आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।
दशमी तिथि की शाम से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
एकादशी के दिन पूर्णतः निराहार रहें या केवल जल व फलाहार ही ग्रहण करें।
इस दिन पूरे समय मन में भगवान का ध्यान रखें और किसी की चुगली या निंदा न करें।
रात्रि के समय भगवान के नाम का भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
योग्य संतान की प्राप्ति: जिन दंपत्तियों को संतान सुख नहीं मिल पा रहा है, उन्हें इस व्रत के प्रभाव से सुंदर और गुणवान संतान की प्राप्ति होती है।
संतान की रक्षा और उन्नति: पहले से मौजूद बच्चों के जीवन से रोग, बाधाएं और संकट दूर होते हैं तथा वे तरक्की करते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति: पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और कुल का नाम रोशन होता है।
पापों का विनाश: व्यक्ति के जन्म जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं और अंत काल में मोक्ष मिलता है।
क्या करें:
भगवान विष्णु को पीले रंग की चीजें जैसे पीले फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं।
जरूरतमंदों और गरीबों को अन्न, गर्म वस्त्र, तिल और फल का दान करें।
गाय को हरा चारा या गुड़-रोटी खिलाएं।
क्या न करें:
एकादशी के दिन घर में चावल पकाना और खाना पूरी तरह मना है।
इस दिन तुलसी के पत्तों को न तोड़ें, पूजा के लिए एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
घर में झाड़ू लगाते समय ध्यान रखें कि चींटी या किसी जीव की हत्या न हो।
मांसाहार, शराब, लहसुन या प्याज का सेवन बिल्कुल न करें।
पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रावती नगरी में राजा सुकेतुमान और उनकी रानी शैव्या राज करते थे। उनके पास धन, दौलत और समृद्धि की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और रानी हमेशा उदास रहते थे। राजा सोचते थे कि उनके बाद उनके पितरों को पिंड दान कौन देगा और उनका वंश कैसे आगे बढ़ेगा।
इसी चिंता में एक दिन राजा सुकेतुमान बिना किसी को बताए जंगल की ओर निकल गए। घूमते-घूमते वे एक सरोवर के पास पहुंचे, जहां कुछ मुनि आश्रम बनाकर वेद पाठ कर रहे थे। राजा ने मुनियों को प्रणाम किया और अपनी व्यथा सुनाई।
मुनियों ने राजा से कहा कि आज पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे पुत्रदा एकादशी कहते हैं। यदि तुम अपनी पत्नी के साथ विधि-विधान से यह व्रत रखोगे, तो तुम्हें अवश्य ही योग्य संतान की प्राप्ति होगी। मुनियों के कहे अनुसार राजा तुरंत अपने राज्य लौटे और रानी शैव्या के साथ नियमपूर्वक यह व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं और उन्होंने एक अत्यंत तेजस्वी और धर्मपरायण पुत्र को जन्म दिया।
पौष पुत्रदा एकादशी का यह पावन व्रत हमें सिखाता है कि जब हम दुनिया से निराश हो जाते हैं, तब भी भगवान श्री हरि विष्णु का द्वार हमारे लिए हमेशा खुला रहता है। वर्ष 2027 में 18 जनवरी को मिलने वाले इस पावन अवसर को बिल्कुल न गंवाएं। यदि आप भी संतान की कामना रखते हैं या अपने बच्चों का कल्याण चाहते हैं, तो पूरे भक्तिभाव से पौष पुत्रदा एकादशी 2027 (Pausha Putrada Ekadashi 2027) का व्रत रखें। भगवान जनार्दन आपकी झोली खुशियों से भर देंगे।
Q1: पौष पुत्रदा एकादशी 2027 (Pausha Putrada Ekadashi 2027) में कब है?
पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 18 जनवरी 2027, सोमवार को रखा जाएगा।
Q2: क्या यह व्रत पति-पत्नी दोनों को साथ रखना चाहिए?
जी हां, संतान प्राप्ति की मनोकामना के लिए पति और पत्नी दोनों को मिलकर यह व्रत रखना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।
Q3: एकादशी पर चावल खाना क्यों वर्जित है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल खाने से महर्षि मेधा के अंगों का सेवन करने जैसा पाप लगता है और व्यक्ति रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है।
Q4: पौष पुत्रदा एकादशी के व्रत का पारण कब करना चाहिए?
व्रत का पारण एकादशी के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि (19 जनवरी 2027) को सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में करना चाहिए।
Q5: यदि कोई बीमार व्यक्ति यह व्रत रखना चाहे तो क्या करे?
यदि शारीरिक असमर्थता हो तो व्यक्ति फलाहार, जल, दूध या फल खाकर भी यह व्रत रख सकता है, भगवान भाव के भूखे होते हैं।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.