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October 22, 2026 Blog

Uttarayan 2027: जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

जब कड़ाके की ठंड के बीच नीले आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें अठखेलियां करने लगें और हवाओं में तिल-गुड़ की सोंधी खुशबू घुल जाए, तो समझ जाइए कि प्रकृति का सबसे बड़ा बदलाव आ चुका है। सनातन परंपरा में उत्तरायण 2027 (Uttarayan 2027) केवल सूर्य की चाल का बदलना भर नहीं है, बल्कि यह अंधकार से प्रकाश की ओर, निराशा से उम्मीद की ओर और मृत्यु से अमरता की ओर बढ़ने का एक पावन पर्व है। जब भगवान सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तर दिशा की ओर यात्रा प्रारंभ करते हैं, तो पूरी पृथ्वी एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता से भर उठती है। आइए जानते हैं कि वर्ष 2027 में उत्तरायण का यह पावन पर्व किस दिन मनाया जाएगा, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और इसका धार्मिक महत्व क्या है।

यदि आप भी सूर्यदेव और शनिदेव का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो उत्तरायण 2027 की तिथि (Uttarayan 2027 Date) का यह अवसर आपके लिए बेहद शुभ और कल्याणकारी सिद्ध होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, सूर्य देव पूजा विधि (Surya Dev Puja Vidhi) और पौराणिक कथा।

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उत्तरायण क्या है (What is Uttarayan?)

सूर्यदेव की गति के आधार पर वर्ष को दो अयनों में बांटा गया है: उत्तरायण और दक्षिणायन। जब सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उनकी गति उत्तर दिशा की ओर हो जाती है। इसी खगोलीय और धार्मिक घटना को उत्तरायण का पर्व (Uttarayan Festival) कहा जाता है। इसे देवताओं का दिन भी माना जाता है। उत्तरायण के शुरू होते ही दक्षिणायन का समय समाप्त हो जाता है और खरमास भी समाप्त हो जाता है। गुजरात, महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों में इसे बड़े ही उल्लास के साथ उत्तरायण पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन से दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं और सभी शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है।

उत्तरायण 2027: तिथि और शुभ मुहूर्त (Uttarayan 2027 Date and Shubh Muhurat)

वर्ष 2027 में उत्तरायण की शुरुआत 15 जनवरी को हो रही है। इस पावन अवसर पर पुण्य काल और महा पुण्य काल के समय किए गए स्नान और दान का अनंत फल मिलता है। उत्तरायण शुभ मुहूर्त (Uttarayan Shubh Muhurat) की जानकारी नीचे दी गई है:

  • उत्तरायण तिथि (Uttarayan 2027 Date): 15 जनवरी 2027, शुक्रवार

  • मकर संक्रांति काल: 14 जनवरी 2027 को मध्यरात्रि के बाद

  • उत्तरायण पुण्य काल मुहूर्त (Uttarayan Punya Kaal): 15 जनवरी 2027 को प्रातः 07:15 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक

  • उत्तरायण महा पुण्य काल मुहूर्त (Uttarayan Maha Punya Kaal): 15 जनवरी 2027 को प्रातः 07:15 बजे से प्रातः 09:00 बजे तक

(नोट: सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश के आधार पर 15 जनवरी 2027 को ही उदयातिथि में उत्तरायण का स्नान, दान और सूर्य पूजन करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।)

उत्तरायण का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Significance of Uttarayan)

शास्त्रों में उत्तरायण का महत्व (Significance of Uttarayan) अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि उत्तरायण के छह महीने देवताओं के एक दिन के बराबर होते हैं। इस समय सूर्यदेव अपनी दिव्य किरणों से पृथ्वी पर स्वास्थ्य, ऊर्जा और चैतन्यता का संचार करते हैं।

महाभारत काल में कुरुक्षेत्र के मैदान पर बाणों की शैया पर लेटे भीष्म पितामह ने भी अपने शरीर का त्याग करने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने की ही प्रतीक्षा की थी। मान्यता है कि उत्तरायण काल में प्राण त्यागने वाली आत्मा सीधे बैकुंठ लोक को जाती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे जितना अंधकार क्यों न हो, यदि हम सत्य और प्रकाश की ओर बढ़ें तो सफलता निश्चित है।

उत्तरायण की सम्पूर्ण पूजा और स्नान विधि (Uttarayan Puja and Snan Vidhi)

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उत्तरायण के दिन प्रत्यक्ष देवता सूर्यदेव का आशीर्वाद पाने के लिए पूरे नियम से पूजन करना चाहिए। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण पूजा विधि:

  1. पवित्र स्नान: उत्तरायण के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें। यदि घर पर स्नान कर रहे हों, तो पानी में थोड़ा गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान करें।

  2. सूर्यदेव को अर्घ्य: तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें लाल चंदन, अक्षत, रोली, लाल फूल और थोड़े से काले तिल डालें। उगते हुए सूर्य को देखते हुए अर्घ्य दें।

  3. मंत्र का जाप: अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र (Surya Mantra) 'ॐ सूर्य देवाय नमः' या गायत्री मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

  4. दीपक और आरती: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें, श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें तथा उन्हें तिल-गुड़ के मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।

  5. दान का संकल्प: पूजा के बाद तिल, गुड़, उड़द दाल, चावल, कपड़े और कंबल का स्पर्श करके किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें।

उत्तरायण के नियम (Uttarayan Rules)

  • उत्तरायण के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठना आवश्यक माना जाता है।

  • इस दिन बिना स्नान और सूर्य अर्घ्य के किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन न करें।

  • भोजन में सात्विकता बनाए रखें और तिल व गुड़ का सेवन अवश्य करें।

  • मन को शांत रखें और वाणी पर संयम रखें।

इस पावन अवसर से मिलने वाले लाभ (Benefits of Uttarayan)

  • आरोग्य और दीर्घायु: उत्तरायण के सूर्य का प्रकाश शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और बीमारियों से मुक्ति दिलाता है।

  • शनि और सूर्य दोष से मुक्ति: इस दिन तिल और जल का दान करने से कुंडली के सूर्य व शनि दोष दूर होते हैं।

  • पुण्य और समृद्धि: उत्तरायण के पुण्य काल में किया गया दान कभी क्षय नहीं होता, इससे घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है।

  • मानसिक शांति और मोक्ष: आध्यात्मिक साधना करने वालों को इस समय में शीघ्र फल मिलता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts)

क्या करें:

  • प्रातःकाल सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।

  • गरीबों, असहायों और पक्षियों को दाना व जल दें तथा गाय को हरा चारा खिलाएं।

  • घर की छत पर पतंग उड़ाकर उल्लास और उमंग के साथ इस पर्व को मनाएं।

क्या न करें:

  • उत्तरायण के दिन मांसाहार, शराब, लहसुन या प्याज का सेवन पूरी तरह वर्जित रखें।

  • घर के दरवाजे पर आए किसी भी भिक्षुक को खाली हाथ न लौटाएं।

  • किसी के प्रति मन में द्वेष, क्रोध या ईर्ष्या का भाव न लाएं।

  • इस दिन तुलसी के पत्तों को तोड़ने से बचें।

उत्तरायण से जुड़ी पौराणिक कथा (Uttarayan Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, जब सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर (मकर राशि) पहुंचे थे, तो उन्होंने देखा कि शनिदेव अत्यंत सादगी और भक्ति के साथ उनका इंतजार कर रहे हैं। सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के इस समर्पण से अत्यंत प्रसन्न हुए। उस समय शनिदेव के पास पिता के स्वागत के लिए केवल तिल ही उपलब्ध थे, इसलिए उन्होंने तिल और जल से ही अपने पिता सूर्यदेव की पूजा की।

सूर्यदेव ने शनिदेव के इस भक्तिभाव से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि जब भी मैं उत्तर दिशा की ओर गमन करते हुए मकर राशि में प्रवेश करूंगा, तो तुम्हारा घर धन-धान्य और समृद्धि से भर जाएगा। सूर्यदेव ने यह भी घोषणा की कि जो भी मनुष्य उत्तरायण के दिन मुझे तिल अर्पित करेगा और जरूरतमंदों को तिल का दान करेगा, उसके जीवन से सभी कष्ट और रोग दूर हो जाएंगे। तभी से उत्तरायण पर सूर्य पूजन और तिल दान की परंपरा चली आ रही है।

निष्कर्ष (Conclusion)

उत्तरायण का यह महान पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में कभी भी ठहरना नहीं चाहिए, बल्कि हमेशा प्रकाश, ज्ञान और उच्च आदर्शों की ओर बढ़ते रहना चाहिए। वर्ष 2027 में 15 जनवरी को मिलने वाला यह पावन अवसर आपके जीवन से निराशा के बादलों को हटाकर सफलता, अच्छे स्वास्थ्य और अपार खुशियों का नया सवेरा लेकर आए। आइए, इस दिन हम सब सूर्यदेव को प्रणाम करें, तिल-गुड़ की मिठास फैलाएं और उत्तरायण 2027 (Uttarayan 2027) पर अपनी आत्मा को भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाएं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: उत्तरायण 2027 (Uttarayan 2027) में कब है?

वर्ष 2027 में उत्तरायण का पावन पर्व 15 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

Q2: उत्तरायण और मकर संक्रांति में क्या अंतर है?

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर संक्रांति कहलाता है, जबकि इसी दिन से सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर होने के कारण इसे उत्तरायण कहा जाता है। दोनों एक ही दिन पड़ते हैं।

Q3: उत्तरायण को देवताओं का दिन क्यों कहा जाता है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य के उत्तरायण रहने के छह महीने देवताओं का एक दिन होता है और दक्षिणायन के छह महीने देवताओं की एक रात होती है।

Q4: उत्तरायण के दिन तिल और गुड़ क्यों खाया जाता है?

सर्दी के मौसम में तिल और गुड़ खाने से शरीर को उष्णता और ऊर्जा मिलती है। धार्मिक दृष्टिकोण से तिल सूर्य और शनिदेव को प्रिय है, जो रिश्तों में मिठास लाता है।

Q5: उत्तरायण के दिन कौन से मंत्र का जाप करना शुभ होता है?

इस दिन 'ॐ सूर्याय नमः', 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' और गायत्री मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.