दुर्गा पूजा की भव्यता के बाद जब पूरे ब्रह्मांड की रक्षा करने वाली मां जगद्धात्री का आगमन होता है, तो भक्ति का भाव एक बार फिर से जीवंत हो उठता है। जगद्धात्री नाम का अर्थ ही है पूरे जगत को धारण करने वाली और उसका पालन-पोषण करने वाली माता। पश्चिम बंगाल, ओडिशा और देश के कई प्रमुख हिस्सों में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को जगद्धात्री पूजा 2026 (Jagaddhatri Puja 2026) का महापर्व बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। मां जगद्धात्री देवी दुर्गा का ही एक शांत, अत्यंत करुणामयी और प्रखर स्वरूप हैं। जब साधक सच्चे मन से माता के आगे नतमस्तक होता है, तो जीवन की हर कठिनाई तिनके की तरह उड़ जाती है। यदि आप भी वर्ष 2026 में जगद्धात्री पूजा 2026 (Jagaddhatri Puja 2026) की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजन विधि की जानकारी तलाश रहे हैं, तो यह लेख आपके भक्ति मार्ग को आलोकित करेगा।
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को जगद्धात्री पूजा 2026 (Jagaddhatri Puja 2026) का पावन पर्व मनाया जाता है। इसे कई स्थानों पर धात्री पूजा के नाम से भी जाना जाता है। मां जगद्धात्री सिंह पर सवार हैं और उनके चार हाथ हैं जिनमें वे चक्र, शंख, तीर और धनुष धारण करती हैं। वे प्रकृति, सत्ता और ब्रह्म ज्ञान का साक्षात स्वरूप मानी जाती हैं। पश्चिम बंगाल के चंदननगर और कृष्णनगर में इस पर्व की अलौकिक छटा देखने को मिलती है। मान्यता है कि जगद्धात्री माता अपने भक्तों की रक्षा ठीक उसी तरह करती हैं जैसे एक माँ अपने नन्हे शिशु का हर संकट से बचाव करती है।
वर्ष में जगद्धात्री पूजा 2026 (Jagaddhatri Puja 2026) का यह महापुनीत पर्व 18 नवंबर, बुधवार को अत्यंत शुभ संयोग में मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण इस प्रकार है:
धार्मिक और तंत्र शास्त्रों में मां जगद्धात्री की उपासना का स्थान अत्यंत ऊंचा बताया गया है। केनोपनिषद में उल्लेख मिलता है कि जब देवताओं को अपने पराक्रम का अहंकार हो गया था, तब मां जगद्धात्री ने उमा हैमवती के रूप में प्रकट होकर उनका अहंकार तोड़ा था।
वे त्रिगुणात्मक शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी पूजा करने से व्यक्ति में आत्मविश्वास, सत्ता, ज्ञान और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। जो साधक आर्थिक तंगी, मानसिक अशांति या शत्रुओं के भय से परेशान हैं, उनके लिए जगद्धात्री पूजा 2026 (Jagaddhatri Puja 2026) का व्रत और पूजन परम कल्याणकारी माना गया है।
मां जगद्धात्री की पूजा पूर्ण सात्विकता और शास्त्रीय विधान के साथ की जाती है। आइए जानते हैं step-by-step पूजा विधि:

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मां जगद्धात्री की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन अवश्य करें:
क्या करें:
क्या न करें:
केनोपनिषद के अनुसार, जब भगवान विष्णु, शिव और अन्य देवताओं ने मिलकर महिषासुर का वध कर दिया, तो देवताओं के मन में यह अहंकार उत्पन्न हो गया कि यह विजय केवल उनके अपने बल और पराक्रम के कारण हुई है। वे भूल गए कि उनकी वास्तविक शक्ति जगदम्बा की ही देन थी।
देवताओं के इस भ्रम और अहंकार को दूर करने के लिए भगवती मां जगद्धात्री एक यक्ष (अत्यंत तेजस्वी प्रकाश रूप) के रूप में प्रकट हुईं। देवताओं ने उस यक्ष की परीक्षा लेने के लिए अग्निदेव को भेजा। यक्ष ने उनके सामने एक छोटा सा तिनका रखा और कहा कि अपनी शक्ति से इसे जलाकर दिखाएं। अग्निदेव अपनी पूरी शक्ति लगाने के बाद भी उस तिनके को नहीं जला पाए।
इसके बाद वायुदेव आए, लेकिन वे भी अपनी समस्त शक्ति से उस तिनके को हिला तक नहीं पाए। तब सभी देवताओं का अहंकार टूट गया। उसी समय मां जगद्धात्री अपने दिव्य चतुर्भुज रूप में प्रकट हुईं। उन्होंने देवताओं को बताया कि इस पूरे ब्रह्मांड में जो भी शक्ति है, वह सब उन्हीं की लीला है। देवताओं ने माता के चरणों में झुककर क्षमा मांगी और उनकी स्तुति की। तभी से कार्तिक नवमी को मां जगद्धात्री की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।
मां जगद्धात्री की आराधना केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर छुपे अहंकार को मिटाकर ईश्वर की सर्वोपरि शक्ति के आगे खुद को समर्पित करने का पावन मार्ग है। जब एक माँ की तरह जगद्धात्री देवी अपने भक्त का हाथ थाम लेती हैं, तो संसार का कोई भी संकट उसे डिगा नहीं सकता। वर्ष 2026 की जगद्धात्री पूजा आपके जीवन में अपार शांति, सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मां का अलौकिक आशीर्वाद लेकर आए। जय मां जगद्धात्री
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1. जगद्धात्री पूजा 2026 (Jagaddhatri Puja 2026) में कब है?
जगद्धात्री पूजा 2026 (Jagaddhatri Puja 2026) का मुख्य महापर्व 18 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा।
2. मां जगद्धात्री किस देवी का स्वरूप हैं?
मां जगद्धात्री देवी दुर्गा का ही एक स्वरूप हैं, जो पूरे संसार का पालन-पोषण और रक्षा करती हैं।
3. जगद्धात्री पूजा मुख्य रूप से कहाँ मनाई जाती है?
यह पूजा मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (विशेषकर चंदननगर और कृष्णनगर), ओडिशा और झारखंड में अत्यंत धूमधाम से मनाई जाती है।
4. मां जगद्धात्री की सवारी क्या है?
मां जगद्धात्री सिंह (शेर) पर सवार होती हैं और उनके चार हाथ होते हैं।
5. जगद्धात्री पूजा 2026 (Jagaddhatri Puja 2026) का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?
18 नवंबर 2026 को नवमी तिथि की मुख्य पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:46 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक रहेगा।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.