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June 22, 2026 Blog

Aja Ekadashi 2026 : व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, नियम और पौराणिक कथा

BY : Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

खोया हुआ गौरव और सुख वापस दिलाता है अजा एकादशी का पावन व्रत (The sacred fast of Aja Ekadashi restores lost glory and happiness.)

अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) का महत्व और इसके पालन से होने वाले लाभों को जानने के लिए, आइए इस पावन व्रत के बारे में विस्तार से जानें। जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जब हम दुखों से घिर जाते हैं। व्यापार में नुकसान, परिवार में कलह, या पुरानी भूलों का पछतावा हमें अंदर ही अंदर कचोटता रहता है। ऐसे मुश्किल समय में, सनातन धर्म के व्रत और उपवास हमारे जीवन में नई रोशनी लेकर आते हैं। अजा एकादशी भी एक ऐसा ही महत्वपूर्ण व्रत है जो हमें अपने जीवन को सुखी और समृद्ध बनाने में मदद करता है।

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अजा एकादशी क्या है? (What is Aja Ekadashi?)

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) कहा जाता है। यह व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाता है और इसका बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है और मान्यता है कि जो जातक इस दिन पूर्ण निष्ठा के साथ व्रत रखता है, उसके सभी पाप और आर्थिक तंगियां दूर हो जाती हैं।

अजा एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and time)

साल में अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) का व्रत 7 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन का पंचांग और पारण का समय बहुत महत्वपूर्ण है। अजा एकादशी व्रत तारीख: 7 सितंबर 2026, दिन सोमवार। एकादशी तिथि का प्रारंभ: 6 सितंबर 2026 को सायंकाल 06:10 बजे से। एकादशी तिथि की समाप्ति: 7 सितंबर 2026 को रात 08:00 बजे तक। पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त: 7 सितंबर को सुबह 06:06 AM से सुबह 09:22 AM तक। व्रत पारण (खोलने) का शुभ समय: 8 सितंबर 2026 को सुबह 06:06 AM से सुबह 08:35 AM के बीच।

अजा एकादशी व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व (Importance)

अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) का व्रत रखने से हमें कई लाभ होते हैं। यह व्रत हमें पापों से मुक्ति दिलाता है, दरिद्रता का नाश करता है, मानसिक शांति प्रदान करता है, और अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य प्रदान करता है। इस व्रत के दौरान हमें अपने इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए और उपवास करना चाहिए। इससे हमारे भीतर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और हमें जीवन में सकारात्मक दिशा मिलती है।

श्री हरि विष्णु की चरणबद्ध पूजा विधि (Pooja ritual)

अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) की पूजा पूरी पवित्रता और शांत मन से करनी चाहिए। पूजा विधि इस प्रकार है:

  1. स्नान और सात्विक संकल्प: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की सफाई करें और पवित्र स्नान करें। इसके बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के चित्र या मूर्ति के सामने हाथ में जल और पीले फूल लेकर अजा एकादशी व्रत का संकल्प लें।

  1. भगवान विष्णु का अभिषेक और श्रृंगार: एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान विष्णु को गंगाजल और कच्चे दूध से प्रतीकात्मक स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें पीले चंदन, कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं। पीले रंग के फूल और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।

  1. धूप-दीप और महाभोग: भगवान के सामने गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और सुगंधित धूप जलाएं। श्री हरि को पीले फलों, मखाने की खीर या मिश्री का भोग लगाएं। ध्यान रहे कि विष्णु जी की पूजा में तुलसी का पत्ता रखना अनिवार्य है, इसके बिना वे भोग स्वीकार नहीं करते।

  1. कथा श्रवण और महाआरती: पूजा स्थल पर बैठकर अजा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। अंत में विष्णु जी और माता लक्ष्मी की आरती गाएं और पूरे परिवार के सुखी जीवन की प्रार्थना करें।

अजा एकादशी व्रत के जरूरी नियम (Rules)

aja ekadashi 2026

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एकादशी के नियमों की शुरुआत एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही हो जाती है:

  • दशमी के नियम: 6 सितंबर की सूर्यास्त के बाद तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन या भारी भोजन) का त्याग कर दें और चावल बिल्कुल न खाएं।
  • एकादशी के दिन वर्जित काम: इस दिन घर में झाड़ू लगाते समय ध्यान रखें कि चींटियों या छोटे जीवों को चोट न पहुंचे। इस दिन बाल काटना, नाखून काटना और दातुन करना मना होता है।
  • चावल का निषेध: एकादशी के दिन घर में किसी भी सदस्य को चावल नहीं खाना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन चावल खाने से मनुष्य रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है।
  • रात्रि जागरण: एकादशी की रात को सोने के बजाय भगवान विष्णु के भजनों का कीर्तन करना महापुण्यदायी माना जाता है।

इस पावन व्रत को करने के अद्भुत लाभ (Benefits)

पूरी निष्ठा से अजा एकादशी का उपवास रखने पर व्रती को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

  • पापों से मुक्ति: मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए सभी कायिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हो जाते हैं।
  • दरिद्रता का नाश: माता लक्ष्मी की कृपा से घर की आर्थिक तंगी दूर होती है और व्यापार व नौकरी में नए रास्ते खुलते हैं।
  • मानसिक शांति: मन से अज्ञात भय, चिंता और डिप्रेशन दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • अश्वमेध यज्ञ का फल: कठिन तपस्या और बड़े यज्ञों के समान ही पुण्य इस एक दिन के व्रत से मिल जाता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's and Dont's)

व्रत की मर्यादा बनाए रखने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

क्या करें:

  • भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी जरूर करें, ताकि घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास हो।
  • द्वादशी के दिन (8 सितंबर को) किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार सीधा (अनाज), फल या वस्त्र का दान अवश्य करें।
  • तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं और परिक्रमा करें (लेकिन इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें, पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें)।

क्या न करें:

  • परनिंदा से बचें: इस दिन किसी की बुराई न करें, झूठ न बोलें और अपनी वाणी से किसी का दिल न दुखाएं।
  • चावल और अन्न का सेवन मना: व्रत रखने वाले जातक को अन्न का पूरी तरह त्याग करना चाहिए। केवल फल, दूध या पानी का ही सेवन करें।
  • क्रोध न करें: एकादशी का व्रत मन को शांत रखने का पर्व है, इसलिए घर में किसी भी प्रकार का विवाद न होने दें।

अजा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा (Story)

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्री कृष्ण ने इस कथा को सुनाया था। प्राचीन काल में राजा हरिश्चंद्र नाम के एक अत्यंत सत्यवादी और चक्रवर्ती राजा राज करते थे। उन्होंने अपने जीवन में सत्य की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण राजपाट, धन-दौलत, यहाँ तक कि अपनी पत्नी और पुत्र को भी बेच दिया। स्वयं राजा हरिश्चंद्र एक श्मशान के चांडाल के सेवक बन गए, जहाँ वे मृत शरीरों के कफन का कर वसूलते थे। इतने कष्टों के बाद भी राजा ने कभी असत्य का मार्ग नहीं चुना। वर्षों तक इस कठिन परिस्थिति में रहने के बाद एक दिन राजा बेहद दुखी मन से बैठे थे। तभी वहां से महर्षि गौतम गुजरे। राजा ने महर्षि को प्रणाम किया और अपने दुखों से मुक्ति का उपाय पूछा। महर्षि गौतम ने कहा, “हे राजन! आज से ठीक सात दिन बाद भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी आने वाली है। तुम उस दिन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु का व्रत रखना और रात्रि जागरण करना। इस व्रत के प्रभाव से तुम्हारे सारे कष्ट अवश्य दूर हो जाएंगे।" राजा हरिश्चंद्र ने महर्षि के कहे अनुसार अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) का बेहद कठिन व्रत किया और रात्रि में प्रभु का कीर्तन किया। इस व्रत के पूर्ण होते ही आकाश से देवताओं ने पुष्प वर्षा की। राजा के सामने साक्षात भगवान विष्णु प्रकट हुए। प्रभु की कृपा से राजा का मृत पुत्र जीवित हो गया, उन्हें उनकी पत्नी वापस मिल गई और उनका खोया हुआ पूरा राज्य और सम्मान उन्हें दोबारा प्राप्त हो गया। अंत में वे सपरिवार बैकुंठ लोक को गए।

निष्कर्ष (Conclusion)

7 सितंबर को आने वाली अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) हमें यह सिखाती है कि जीवन की रात चाहे कितनी भी काली और लंबी क्यों न हो, सत्य और ईश्वर पर अडिग भरोसा रखने वालों के जीवन में सुख का सवेरा जरूर होता है। यह व्रत हमारे दुखों को हरने और मन को पवित्र करने का एक अनमोल उपहार है। आइए, इस साल पूरे नियम और श्रद्धा के साथ श्री हरि की आराधना करें, अपने कर्मों को शुद्ध बनाएं और भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. साल में अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) का व्रत कब है?
    साल में अजा एकादशी 2026(Aja Ekadashi 2026) का पावन व्रत 7 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा।

  1. अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?
    व्रत का पारण अगले दिन यानी 8 सितंबर, मंगलवार को सुबह 06:06 AM से सुबह 08:35 AM के बीच करना चाहिए। पारण में सबसे पहले भगवान को भोग लगाया हुआ सात्विक भोजन या फल ग्रहण करना चाहिए।

  1. क्या एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ सकते हैं?
    नहीं, एकादशी और तिथि के नियमों के अनुसार इस दिन तुलसी दल तोड़ना पूरी तरह वर्जित होता है। पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले (दशमी तिथि को) ही तोड़कर रख लेने चाहिए।

4. एकादशी के दिन चावल खाने की मनाही क्यों है?
    एकादशी के दिन चावल खाना इसलिए मना है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे मनुष्य का मन चंचल हो जाता है और वह सात्विक साधना से      भटक जाता है। पौराणिक कथाओं में चावल को रेंगने वाले जीवों की योनि से जोड़ा गया है, जो इसके खाने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है।

5. क्या अजा एकादशी 2026 (Aja Ekadashi 2026) का व्रत रखने से कर्ज से मुक्ति मिलती है?हां, अजा एकादशी का व्रत रखने से आर्थिक संकटों और        कर्ज के जाल से मुक्ति मिल
    सकती है। यह व्रत बेहद फलदायी माना जाता है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे न केवल आर्थिक      लाभ होता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है।

Author: Neha Jain – Cultural & Festival Content Writer

Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.