Rang Panchami 2026: जैसा कि नाम से समझ आता है, रंग पंचमी पाँच रंगों के उत्सव का प्रतीक है। ये रंग केवल खुशी के नहीं, बल्कि मानव शरीर और सृष्टि के पाँच मूल तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दिन लोग रंगों के माध्यम से प्रकृति और जीवन के इन तत्वों का उत्सव मनाते हैं।
होली का पर्व फाल्गुन पूर्णिमा से आरंभ होता है और कई स्थानों पर इसका समापन रंग पंचमी (Rang Panchami) के साथ होता है। इस दिन रंगों के साथ खेलते हुए लोग आनंद, ऊर्जा और सकारात्मकता का अनुभव करते हैं।
प्राचीन समय में होली का उत्सव कई दिनों तक मनाया जाता था और इसका समापन रंग पंचमी के दिन होता था। धीरे-धीरे परंपराओं में बदलाव आया, लेकिन रंग पंचमी (Rang Panchami) आज भी होली के उल्लास का अंतिम और खास पड़ाव मानी जाती है। यह चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है और कई स्थानों पर इसे होली का विस्तार भी माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा-अर्चना करने से देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, सकारात्मक भाव से की गई उपासना जीवन की बाधाओं और कुंडली के कुछ दोषों को शांत करने में सहायक मानी जाती है।
हिंदू परंपरा में रंग पंचमी को अत्यंत शुभ पर्व माना गया है। होलिका दहन (Holika Dahan) के माध्यम से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा के शुद्ध होने की भावना जुड़ी है। माना जाता है कि इस अग्नि से आस-पास का वातावरण पवित्र होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। रंग पंचमी उसी शुद्धता और आनंद को रंगों के रूप में साझा करने का अवसर देती है।

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दिन की शुरुआत प्रातः स्नान से करें। यह शरीर और मन दोनों की पवित्रता का प्रतीक है। साफ और हल्के या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें, जो सकारात्मक ऊर्जा और श्रद्धा को दर्शाते हैं। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण या राधा-कृष्ण की प्रतिमा के सामने बैठकर संकल्प लें कि यह पूजा आत्मिक उन्नति, प्रेम और सद्भाव के लिए समर्पित है।
2. वेदी की स्थापना और पूजनपूजा स्थल को साफ कर फूलों, चंदन, हल्दी और वस्त्रों से सजाएं। दीपक और अगरबत्ती जलाकर वातावरण को पवित्र बनाएं। राधा-कृष्ण की मूर्ति या चित्र पर हल्का गुलाल अर्पित करें, जो प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
3. अर्पण की प्रक्रियाभगवान को ताजे फूल, गुलाल और प्राकृतिक रंग अर्पित करें। तुलसी दल, पान के पत्ते और माखन-मिश्री या पेड़ा जैसे प्रसाद अर्पित किए जा सकते हैं। सुगंधित जल या गुलाब जल भी भक्ति भाव से चढ़ाया जाता है।
4. मंत्र-जाप और भजनपूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या हरे कृष्ण मंत्र का जप करें। भजन-कीर्तन और राधा-कृष्ण के स्तुति गीत गाकर वातावरण को भक्तिमय बनाएं। विष्णु सहस्रनाम या राधा-कृष्ण स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।
5. कथा श्रवणइस दिन राधा-कृष्ण की होली लीला का वर्णन सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। यह कथा प्रेम, समर्पण और आत्मा के परमात्मा से मिलन के भाव को समझने में सहायता करती है।
6. आरती और प्रसादकपूर या घी के दीपक से आरती करें और प्रभु से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। मक्खन, मिठाई, फल और दूध से बने व्यंजन नैवेद्य के रूप में अर्पित करें। बाद में प्रसाद सभी में बांटें।
7. समापनपूजा के बाद एक-दूसरे को गुलाल या चंदन का तिलक लगाएं, जो प्रेम और एकता का प्रतीक है। अंत में भगवान का आभार व्यक्त करें और जीवन में आनंद, सद्भाव और आध्यात्मिक प्रकाश की कामना करें।
इन विधियों का श्रद्धा से पालन करने पर रंग पंचमी (Rang Panchami 2026) केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का विशेष अवसर बन जाती है।
रंग पंचमी का पर्व (Rang Panchami Festival) खासतौर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कुछ अन्य हिस्सों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह होली के पाँच दिवसीय उत्सव के समापन का प्रतीक है और होलिका दहन के लगभग पाँच दिन बाद आता है। भले ही कई लोग इसे होली का ही हिस्सा मानते हैं, लेकिन इसका उत्सव मनाने का अंदाज़ और भाव अलग होता है।
इंदौर की रंग पंचमी
मध्य प्रदेश के इंदौर में रंग पंचमी (Rang Panchami) का नज़ारा बेहद खास होता है। यहां पारंपरिक “गेर” निकाली जाती है, जिसमें रंगों से भरे टैंकर, सजे-धजे ऊंट और सांस्कृतिक झलकियां शामिल होती हैं। पूरा शहर रंगों में सराबोर दिखाई देता है। ढोल-नगाड़ों और संगीत के साथ लोग सड़कों पर निकलते हैं और हर धर्म व समुदाय के लोग इस जुलूस में भाग लेते हैं।
महाराष्ट्र की रंग पंचमी
महाराष्ट्र में धुलंडी से लेकर पंचमी तक रंगों का उत्साह बना रहता है। इस दिन खासतौर पर गुलाल का प्रयोग किया जाता है। पारंपरिक व्यंजनों का भी विशेष महत्व है, जिनमें पूरन पोली प्रमुख है। कुछ स्थानों पर दही हांडी जैसे आयोजन भी होते हैं, जहां युवा मिलकर ऊंचाई पर बंधी मटकी फोड़ते हैं और महिलाएं उन पर रंग डालकर उत्साह बढ़ाती हैं।
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राजस्थान और अन्य स्थान
राजस्थान के जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोकनृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रंगों की छटा माहौल को और भी खास बना देती है। कई स्थानों पर भगवान कृष्ण और राधा की पूजा कर उनके प्रेम का उत्सव मनाया जाता है।
बिहार, वृंदावन, मथुरा और दिल्ली के मंदिरों में भी रंग पंचमी (rang Panchami) का उल्लास देखने लायक होता है। रंग खेलना, भजन-कीर्तन, मिठाइयों का आदान-प्रदान और पारिवारिक मिलन इस पर्व की खास पहचान हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह त्योहार अपनी-अपनी परंपराओं के साथ मनाया जाता है, जो इसे और भी रंगीन और यादगार बना देता है।
रंग पंचमी के दिन कुछ सरल उपाय अपनाकर आप इस पर्व को और भी शुभ बना सकते हैं। स्नान या रोजमर्रा के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर हाथ-पैर धोना पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
धन और समृद्धि की कामना के लिए देवी लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। उन्हें ताजे फूल अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर घर में सुख-शांति की प्रार्थना करें। देवी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने सुगंधित अगरबत्ती जलाना भी शुभ माना जाता है।
क्योंकि सफेद रंग लक्ष्मी जी को प्रिय माना जाता है, इसलिए आप उन्हें सफेद मिठाई का भोग लगा सकते हैं। श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा घर में सकारात्मकता और समृद्धि का वातावरण बनाए रखने में सहायक होती है।
कृष्ण भक्ति की परंपरा में यह विश्वास भी जुड़ा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ आनंद और प्रेम का रंगीन उत्सव मनाया था। यही भावना रंग पंचमी को प्रेम, भक्ति और उल्लास से भर देती है।
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Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.