सृष्टि के इतिहास में जब भी धर्म, सत्य और पवित्रता की बात होती है, तो सबसे पहला नाम सत्ययुग का आता है। यह वह कालखंड था जब धरती पर केवल धर्म का बोलबाला था, झूठ और पाप का नामोनिशान नहीं था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ही सत्ययुग का प्रारंभ हुआ था। इसी वजह से इस पावन तिथि को सत्ययुग दिवस 2026 (Satayuga Diwas 2026) अथवा कृतादि युग तिथि के नाम से जाना जाता है। देश के कई भागों में इसे अक्षय नवमी और आंवला नवमी भी कहा जाता है। यह दिन केवल एक पौराणिक तिथि नहीं है, बल्कि हमारे भीतर के सत्य, आचरण और धर्म को पुनः जगाने का अलौकिक अवसर है
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सत्ययुग दिवस 2026 (Satayuga Diwas 2026) के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार चारों युगों में सत्ययुग को प्रथम स्थान प्राप्त है। इसी तिथि से ब्रह्मा जी ने सत्ययुग का आरंभ किया था, इसलिए इसे युगादि तिथि भी माना जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही आंवले के वृक्ष की उपासना करने का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर किया गया कोई भी धार्मिक कार्य, दान या उपवास अक्षय फल प्रदान करता है, जिसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।
वर्ष में सत्ययुग दिवस 2026 (Satayuga Diwas 2026) का यह महापर्व 18 नवंबर, बुधवार को पूरे देश में अपार श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार तिथियों और पूजा के शुभ समय का विवरण इस प्रकार है:
धार्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण से सत्ययुग दिवस 2026 (Satayuga Diwas 2026) का महत्व अत्यंत विशाल है। सत्ययुग को 'कृतयुग' भी कहा जाता है, जहाँ सभी जीव धर्म के चार स्तंभों (सत्य, दया, तप और दान) का पालन करते थे। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से साधक के जीवन में सत्य और धर्म का समावेश होता है।
पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि इस तिथि पर आंवले के पेड़ की पूजा करने से और उसके नीचे भोजन बनाकर ग्रहण करने से जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि भले ही बाहर कलयुग का प्रभाव हो, लेकिन हम अपने विचारों और कर्मों में सत्ययुग जैसी पवित्रता ला सकते हैं।
सत्ययुग दिवस पर भगवान विष्णु और आंवला वृक्ष के पूजन का शास्त्रीय विधान है। आइए जानते हैं step-by-step पूजा विधि:

इस पावन पर्व पर कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है:
क्या करें:
क्या न करें:
पौराणिक कथा के अनुसार जब ब्रह्मा जी ने इस ब्रह्मांड की रचना की, तो उन्होंने सबसे पहले सत्ययुग की शुरुआत की। सत्ययुग में मनुष्य की आयु अत्यंत लंबी होती थी और सभी लोग सत्य व धर्म के मार्ग पर चलते थे। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ही ब्रह्मा जी ने इस युग के पहले दिन का निर्धारण किया था।
इसी दिन देवी लक्ष्मी ने पृथ्वी पर आंवले के वृक्ष के रूप में भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी। माता लक्ष्मी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु आंवला वृक्ष में प्रकट हुए थे। तब माता लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ के नीचे भगवान विष्णु और भगवान शिव को भोजन कराया था और स्वयं भी भोजन ग्रहण किया था। तभी से इस तिथि को सत्ययुग दिवस 2026 (Satayuga Diwas 2026) और अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाने लगा।
सत्ययुग दिवस 2026 (Satayuga Diwas 2026) केवल एक ऐतिहासिक या पौराणिक तिथि नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन को धर्म और सत्य के मार्ग पर ढालने का एक पावन संदेश है। जब हम निश्छल मन से भगवान श्री हरि विष्णु और प्रकृति का पूजन करते हैं, तो हमारे भीतर छिपी हुई कलयुगी बुराइयाँ समाप्त हो जाती हैं और सत्य का उजाला फैल जाता है। वर्ष 2026 का सत्ययुग दिवस आपके और आपके परिवार के जीवन में अक्षय पुण्य, सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। भगवान श्री हरि विष्णु की जय
1. सत्ययुग दिवस 2026 (Satayuga Diwas 2026) में कब है?
सत्ययुग दिवस 2026 (Satayuga Diwas 2026) का पावन पर्व 18 नवंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।
2. सत्ययुग दिवस को और किस नाम से जाना जाता है?
इसे अक्षय नवमी, आंवला नवमी, धात्री नवमी और युगादि तिथि के नाम से भी जाना जाता है।
3. सत्ययुग दिवस पर किस पेड़ की पूजा की जाती है?
इस दिन मुख्य रूप से आंवले के पेड़ (धात्री वृक्ष) की पूजा की जाती है।
4. सत्ययुग दिवस का क्या महत्व है?
मान्यता है कि इसी तिथि से सत्ययुग का आरंभ हुआ था, इसलिए इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करता है।
5. सत्ययुग दिवस पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
18 नवंबर 2026 को पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 06:46 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक रहेगा।
Neha Jain is a festival writer with 7+ years’ experience explaining Indian rituals, traditions, and their cultural meaning, making complex customs accessible and engaging for today’s modern readers.