June 5, 2024 Blog

Shani Jayanti 2024: शनि जयंती पर करें ये काम, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से मिलेगी मुक्ति

BY : STARZSPEAK

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। ज्योतिषशास्त्र में माना जाता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि (Shani Jayanti) की स्थिति मजबूत होती है उसे जीवन में खूब तरक्की मिलती है। वहीं, अगर कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर हो तो व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Shani Jayanti 2024: हिंदू मान्यताओं के अनुसार हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना जाता है, उसी तरह शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता भी कहा जाता है। ऐसे में 06 जून, गुरुवार को शनि जयंती मनाई जा रही है. इस तिथि पर आप कुछ खास उपायों से शनि के बुरे प्रभाव (Shani Dosh tips) से राहत पा सकते हैं, तो आइए जानते हैं वो उपाय. 

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SHANI JAYANTI 2024
कम होगा साढ़ेसाती के प्रभाव

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनि जयंती (Shani Jayanti) पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से साढ़ेसाती के प्रभाव को कम किया जा सकता है। पूजा के दौरान भगवान कृष्ण को मोर पंख और बांसुरी अर्पित करें। इसके साथ ही शनि जयंती पर हनुमान जी की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है। शनि जयंती के दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे शनिदेव की कृपा आप पर बनी रहती है।

बुरे परिणामों से मिलेगी मुक्ति

शनि जयंती के दिन शनि मंदिर जाकर शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं और सरसों का दीपक भी जलाएं। इसके साथ ही काले वस्त्र और तिल भी अर्पित करें। इस खास दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने और जल चढ़ाने से भी आप शनि (Shani Jayanti) के बुरे प्रभाव से राहत पा सकते हैं।

करें इन मंत्रों का जाप

शनि जयंती (Shani Jayanti) के अवसर पर आप शनि देव की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं। इससे कुंडली में शनि मजबूत होता है -

  • ओम प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:
  • वैदिक मंत्र - ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये।
  • एकाक्षरी मंत्र - ॐ शं शनैश्चाराय नमः।
  • महामृत्युंजय मंत्र - ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ। 

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