यशोदा लाला जी की आरती
Starzspeak :
भगवान बाल कृष्ण (यशोदा लाला): स्वरूप एवं धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप यानी 'यशोदा लाला' की उपासना वात्सल्य रस से परिपूर्ण मानी जाती है। माता यशोदा के आंगन में घुटनों के बल चलने वाले, माखन चोरी करने वाले और अपनी नटखट लीलाओं से गोकुलवासियों का मन मोहने वाले बाल गोपाल की पूजा करने से घर में सुख, शांति और आनंद का वास होता है।
शास्त्रों के अनुसार, भगवान बाल कृष्ण का दर्शन और पूजन संतान सुख देने वाला होता है। जिन घरों में लड्डू गोपाल या बाल कृष्ण की नियमित सेवा, माखन-मिश्री का भोग और आरती की जाती है, वहाँ कभी धन-धान्य और आरोग्य की कमी नहीं होती। यशोदा लाला की आरती गाने से हृदय में निष्काम प्रेम और भक्ति का संचार होता है।
॥ श्री यशोदा लाला (बाल कृष्ण) जी की आरती ॥
आरती बाल कृष्ण की कीजै,
अपनो जन्म सफल कर लीजै ॥
श्री यशोदा का परम दुलारा,
बाबा नंद का प्राण प्यारा ।
जाके रूप से त्रिभुवन मोहा,
ता छवि को नयनन भरि लीजै ॥
आरती बाल कृष्ण की कीजै...॥
शीश मुकुट मोरपंख सोहै,
कानन कुंडल मन को मोहै ।
गल वैजयंती माला भ्राजै,
चरणन नूपुर मधुर बजावै ।
या छवि पर तन-मन वारि दीजै ॥
आरती बाल कृष्ण की कीजै...॥
माखन चोर कहावत स्वामी,
गोपीजन के अंतरयामी ।
घुटुरुन चलत यशोदा आंगन,
ठुमुक-ठुमुक पग धरत बाल मन ।
ताहि देखि अति आनंद लीजै ॥
आरती बाल कृष्ण की कीजै...॥
कालीय नाग नाथ जिन लीन्हा,
दावानल को पान करि लीन्हा ।
गोवर्धन कर छत्र धराया,
इंद्र का गर्व सर्व हर लिया ।
ऐसे प्रभु की शरण हि लीजै ॥
आरती बाल कृष्ण की कीजै...॥
श्री राधापति गिरधरधारी,
भक्तन हितकारी बनवारी ।
'सूरदास' प्रभु तिहरे चरणन की,
नित्य निरंतर सेवा दीजै ॥
आरती बाल कृष्ण की कीजै,
अपनो जन्म सफल कर लीजै ॥
