Desktop Special Offer Mobile Special Offer

परशुराम आरती (Parashurama Aarti)

परशुराम आरती

Starzspeak :

भगवान श्री परशुराम जी: स्वरूप एवं महत्व

सनातन धर्म में भगवान श्री परशुराम जी को भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (अक्षय तृतीया) को प्रदोष काल में महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर भगवान परशुराम जी का प्राकट्य हुआ था। भगवान शिव की कठिन तपस्या करके उन्होंने अमोघ अस्त्र 'परशु' (फरसा) प्राप्त किया था, जिसके कारण वे 'परशुराम' कहलाए।

भगवान परशुराम जी अष्टचिरंजीवियों में से एक हैं, अर्थात् वे अजर-अमर हैं और आज भी महेंद्रगिरि पर्वत पर तपस्यारत माने जाते हैं। वे शास्त्र और शस्त्र दोनों के परम ज्ञाता हैं—एक ओर वे वेद-वेदांगों के प्रकांड विद्वान हैं, तो दूसरी ओर अधर्म, अत्याचार और पापी राजाओं का संहार करने वाले न्याय और शौर्य के प्रतीक हैं। अक्षय तृतीया एवं परशुराम जयंती के अवसर पर इनकी पूजा और आरती करने से भय मुक्ति, पराक्रम, आत्मबल और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

aarti-detail

॥ श्री परशुराम जी की आरती ॥

ॐ जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी ।

सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी ॥

ॐ जय परशुधारी...॥

जमदग्नी सुत नर-सिंह, मां रेणुका जाया ।

मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया ॥

ॐ जय परशुधारी...॥

कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला ।

चरण खड़ाऊँ शोभे, तिलक त्रिपुण्ड भाला ॥

ॐ जय परशुधारी...॥

ताम्र श्याम घन केशा, शीश जटा बांधी ।

सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी ॥

ॐ जय परशुधारी...॥

मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण नैना ।

दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दिन रैना ॥

ॐ जय परशुधारी...॥

कर शोभित बर परशु, निगमागम ज्ञाता ।

कंध चाप-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता ॥

ॐ जय परशुधारी...॥

माता पिता तुम स्वामी, मीत सखा मेरे ।

मेरी बिरद संभारो, द्वार पड़ा मैं तेरे ॥

ॐ जय परशुधारी...॥

अजर-अमर श्री परशुराम की, आरती जो गावे ।

'पूर्णेन्दु' शिव साखि, सुख सम्पति पावे ॥

ॐ जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी ।

सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी ॥