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मां मनसा देवी (mansadevi aarti)

मां मनसा देवी

Starzspeak :

मां मनसा देवी: स्वरूप एवं धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में मां मनसा देवी जी को भगवान शिव की मानस पुत्री, महर्षि कश्यप की कन्या और नागराज वासुकी की बहन के रूप में पूजा जाता है। 'मनसा' शब्द का अर्थ है मन की इच्छा; इसलिए मां मनसा देवी भक्तों की मनसा यानी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी मानी जाती हैं। इन्हें नागों की अधिष्ठात्री देवी और विषहरी (विष को हरने वाली) भी कहा जाता है।

मां मनसा देवी का स्वरूप अत्यंत करुणामयी और वात्सल्य से परिपूर्ण है। वे कमल के पुष्प पर विराजमान रहती हैं और नाग उनका आभूषण एवं छत्र बनते हैं। हरिद्वार में बिलवा पर्वत पर स्थित मां मनसा देवी का मंदिर प्रसिद्ध सिद्धपीठों में से एक है। मां मनसा देवी की श्रद्धापूर्वक पूजा और आरती करने से सर्प भय दूर होता है, विष बाधा से मुक्ति मिलती है, संतान सुख प्राप्त होता है और जीवन की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

aarti-detail

॥ मां मनसा देवी जी की आरती ॥

जय मनसा माता, मैया जय मनसा माता ।

भक्त जनों की मैया, सुख-संपत्ति दाता ॥

जय मनसा माता...॥

शिव की मानस पुत्री, कश्यप की जाया ।

वासुकी की बहन तुम, त्रिभुवन यश छाया ॥

जय मनसा माता...॥

विषहरी नागेश्वरी, नाम तेरा पावन ।

दर्शन पाए तेरो, हरषे मन भावन ॥

जय मनसा माता...॥

कमल पर तुम विराजत, शीश छत्र सोहै ।

रत्न जड़ित आभूषण, मन अपार मोहै ॥

जय मनसा माता...॥

सर्प भय नशावनी, दुख संकट हारिणी ।

मनवांछित फल देनी, रिद्धि-सिद्धि कारिणी ॥

जय मनसा माता...॥

अपुत्रन को पुत्र देत, निर्धन को धाना ।

जो जन शरण तुम्हारी, पाया सुख नामा ॥

जय मनसा माता...॥

जो जन मनसा माता की, आरती नित गावै ।

कहत दास भक्त तेरे, सो वैकुण्ठ जावै ॥

जय मनसा माता, मैया जय मनसा माता ।

भक्त जनों की मैया, सुख-संपत्ति दाता ॥