गौ माता आरती
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गौ माता: महत्व एवं धार्मिक मान्यता
सनातन धर्म में गौ माता (गाय) को केवल एक पशु नहीं, बल्कि 'विश्वस्य मातरः' यानी सम्पूर्ण विश्व की माता और पूजनीय देवी का स्थान दिया गया है। पौराणिक ग्रंथों और वेदों के अनुसार गौ माता के शरीर में ३३ कोटि (प्रकार के) देवी-देवताओं का वास होता है। उनके पृष्ठभाग में ब्रह्मा, गले में विष्णु और मुख में भगवान शिव का निवास माना जाता है।
गौ सेवा से केवल एक जीव की सेवा नहीं होती, बल्कि समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रतिदिन पहली रोटी गौ माता को देने और उनकी नियमित पूजा व आरती करने से घर के समस्त वास्तु दोष, पितृ दोष और ग्रह दोष (विशेष रूप से बृहस्पति और गुरु दोष) शांत होते हैं। गौ माता की सेवा से घर में सुख, समृद्धि, रिद्धि-सिद्धि और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
॥ श्री गौ माता की आरती ॥
आरती कीजै गौ माता की,
त्रिभुवन तारिणि सुखदाता की ॥
भगवती सुरभि सुरतरु छाया,
सब देवन मिलि पूज्य बनाया ।
सब सुख दायिनी जग जननी की,
आरती कीजै गौ माता की ॥
कामधेनु तुम सब फल देनी,
सुख-सम्पत्ति जन-जन को देनी ।
महिमा अमित अनन्त विधाता की,
आरती कीजै गौ माता की ॥
जाके पद रज मस्तक धारै,
सो भवसागर पार उतारै ।
सब दुख हारिणि भव भयरूप की,
आरती कीजै गौ माता की ॥
क्षीर-धार अति पावन धारा,
जासों तृप्त होय संसारा ।
अमृत पाय जीव सुख पावै,
आरती कीजै गौ माता की ॥
जो नर प्रेम सहित गुण गावै,
सो निज पद सुख संपत्ति पावै ।
रक्षक सदा रहैं श्रीपति की,
आरती कीजै गौ माता की ॥
आरती कीजै गौ माता की,
त्रिभुवन तारिणि सुखदाता की ॥
