बगलामुखी आरती
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मां बगलामुखी: स्वरूप एवं धार्मिक महत्व
सनातन धर्म और तंत्र साधना में मां बगलामुखी जी दशमहाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। इन्हें 'पीताम्बरा देवी' या 'ब्रह्मास्त्र विद्या' के नाम से भी जाना जाता है। 'बगला' शब्द संस्कृत के 'वल्गा' से बना है, जिसका अर्थ होता है लगाम या वशीकरण। मां बगलामुखी शत्रुओं की बुद्धि, वाणी और कर्मों का स्तंभन (रोकने) करने वाली सर्वशक्तिमान देवी हैं।
मां का स्वरूप पीले रंग से सुशोभित है—वे पीले वस्त्र, पीले आभूषण और पीले रंग के फूलों की माला धारण करती हैं। इनके एक हाथ में शत्रु की जिह्वा और दूसरे हाथ में गदा होती है। मां बगलामुखी की उपासना, जप और आरती करने से कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय, शत्रुओं पर सफलता, वाद-विवाद में जीत, भय-मुक्ति और वाक-सिद्धि (वाणी का प्रभाव) की प्राप्ति होती है।
॥ मां बगलामुखी जी की आरती ॥
जय बगलामुखी माता, मैया जय बगलामुखी माता ।
पीताम्बर धारिणी देवी, त्रिभुवन सुखदाता ॥
जय बगलामुखी माता...॥
सौम्य रूप अति सुंदर, पीत वर्ण सोहै ।
रत्नजड़ित मुकुट शीश, मन मोहे ॥
जय बगलामुखी माता...॥
एक हाथ जिह्वा गहै, दूजे गदा विराजे ।
दुष्ट दलन स्तंभन करी, गर्जन गगन गाजे ॥
जय बगलामुखी माता...॥
स्तंभन विद्या की देवी, सब संकट हारिणी ।
भक्तन हित अवतारी, रिद्धि-सिद्धि कारिणी ॥
जय बगलामुखी माता...॥
शत्रु भय नशावनी, वाक-सिद्धि देनी ।
दया करो जगदम्बा, सब दुख हर लेनी ॥
जय बगलामुखी माता...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, गुण तेरे गावैं ।
नारद शारद मुनिजन, चरणन शीश नवावैं ॥
जय बगलामुखी माता...॥
जो जन आरती तुम्हारी, प्रेम सहित गावै ।
कहत दास भक्त तेरे, इच्छित फल पावै ॥
जय बगलामुखी माता, मैया जय बगलामुखी माता ।
पीताम्बर धारिणी देवी, त्रिभुवन सुखदाता ॥
