Desktop Special Offer Mobile Special Offer

बृहस्पति आरती (Brihaspati Aarti)

बृहस्पति आरती

Starzspeak :

गुरुवार व्रत एवं श्री बृहस्पति देव: महत्व व मान्यता

सनातन धर्म में गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन नवग्रहों के गुरु, ज्ञान और बुद्धि के प्रतीक भगवान बृहस्पति (गुरु देव) तथा श्री हरि विष्णु जी की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। भगवान बृहस्पति देव को ज्ञान, उच्च शिक्षा, धर्म, भाग्य, धन-धान्य और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है।

गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु और केल (केले) के वृक्ष की पूजा करने का विधान है। जिन जातकों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है या जिनके विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें गुरुवार का व्रत रखकर श्री बृहस्पति देव की कथा और आरती अवश्य करनी चाहिए। इनकी कृपा से व्यक्ति के जीवन में विद्या, धन, यश और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

aarti-detail

॥ श्री बृहस्पति देव की आरती ॥

जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा ।

छिन-छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥

जय बृहस्पति देवा...॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी ।

जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥

जय बृहस्पति देवा...॥

चरण गहे की लाज रखो, कृपा करो स्वामी ।

दीनानाथ दयालु, तुम अंतर्यामी ॥

जय बृहस्पति देवा...॥

ज्ञान विशारद बुद्धिदाता, प्रभु शुभ गुण धामी ।

झाँकी सुंदर सोहत, उपमा कोनामी ॥

जय बृहस्पति देवा...॥

दीनदयाल दया निधि, भक्तन हितकारी ।

पाप दोष सब हर्ता, भव भय हारी ॥

जय बृहस्पति देवा...॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।

विषय विकार मिटाओ, संतन प्रतिपालो ॥

जय बृहस्पति देवा...॥

जो जन प्रभु जी की आरती, प्रेम सहित गावै ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावै ॥

जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा ।

छिन-छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥