पूजा क्यों करवानी चाहिए | अगर आपकी कुंडली मे ये दोष है तो करे ये उपाय

अक्सर आपने देखा होगा कि लोग पूजा करते नहीं करवाते हैं। मतलब, सामान्य पूजा अर्चना आप खुद से ही कर सकते हैं। लेकिन, बड़ी पूजा स्वयं से नहीं करनी चाहिए बल्कि, करवानी चाहिए।

दरअसल, सामान्य पूजा तो हम नियमित रूप से करते हैं जिससे हम भगवान को याद करते हैं कि हम कुशल रहें और हमारा मन शांत रहे।

लेकिन, कई बड़ी पूजा होती हैं जिसका हमें बड़ा प्रति-फल मिलता है। अगर उस पूजा के दौरान कोई भी गलती हो जाती है तो वह पूजा मान्य नहीं रहती। इसलिए, पूजा में किसी भी प्रकार की गलती से बचने के लिए (जो हमें फल देने से वंचित कर दे) हम किसी पंडित अथवा महाराज का सहारा लेते हैं।

इस दौरान आपको पंडित या पूजा को दान करने का भी फायदा मिलता है।


  • पूजा करने के फायदे

कई लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उमड़ता है की पूजा करने के कौन से फायदे होते हैं। दरअसल, पूजा करने से हमें बहुत से फायदे मिलते हैं जो हमारी सुख और शांति से जुड़े होते हैं। आइये पूजा करने के कुछ ख़ास फायदे के बारे में जानते हैं।

मन शांत रहता है

जब आप पूजा कर रहे होते हैं तब आपके विचार में बुरे ख़याल नहीं उमड़ते हैं। इस तरह से धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाती है और आपका मन शुद्ध और शांत रहता है।

एकाग्रता में वृद्धि होती है

पूजा ध्यान केन्द्रित करने का सबसे बड़ा साधन है। पूजा करते समय आप ॐ का जाप करें इससे आपके एकाग्रता में वृद्धि मिलेगी।

सुख मिलता है

जब आप सच्चे मन से पूजा करते हैं तो आपका मन पूरी तरह से पूजा में तल्लीन हो जाता है और आपको परमार्थ का सुख अनुभव होता है।

कष्ट कटते हैं

पूजा करने से कष्ट का निवारण होता है। इसके लिए कई प्रकार की विशेष अर्चना करनी पड़ती है।


  • कालसर्प दोष शान्तिके लिए अपनाएं ये उपाय

‘कालसर्प दोष’ एक ऐसा दोष है जो व्यक्ति के जीवन को संघर्षमय बना देता है। व्यक्ति जीवन भर संघर्ष करता रहता है लेकिन, उसे कोई फल नहीं मिलता है।

इस दोष को आप कुछ उपाय की मदद से दूर कर सकते हैं।

  1. नागपंचमी में आप नाग देव का अभिषेक और पूजा विधि विधान से करें।
  2. श्रावण मास में भगवान शिव का दूध और बेल पत्र के साथ लगातार 3 दिनों तक अभिषेक करें।
  3. रोज महामृत्युंजयमन्त्र की 5 माला का जाप सुबह एवं शाम को करें।
  4. 108 राहू यंत्र को किसी बहती नदी में प्रवाहित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

  • मंगल शान्ति- मांगलिक दोष निवारण के लिए करें ये उपाय

मंगल या मांगलिक दोष जिस व्यक्ति के भी कुंडली में अपना स्थान बनाता है उसके जीवन में कई तरह की विपदाओं का भार शुरू हो जाता है। हम आपको कुछ उपाय बताएँगे जिनकी मदद से आप आसानी से मांगलिक दोष से मुक्ति पा सकेंगे।

  1. मांगलिक दोष से पीड़ित व्यक्ति की शादी 28 वर्ष के बाद किसी दूसरे मांगलिक दोष से पीड़ित के साथ कराने से दोनों का मांगलिक दोष नष्ट हो जाता है।
  2. मंगलवार के दिन हनुमान जी का व्रत और पाठ से मंगल दोष को दूर करना आसान है।
  3. मांगलिक दोष से पीड़ित व्यक्ति अगर शादी के पहले किसी पेड़ या कलश से विवाह करता है तो भी यह दोष नष्ट हो जाता है।


  • शनि दोष निवारण पूजा कैसे करें

जन्म पत्रिका में शनि दोष के प्रवेश के बाद जीवन तितर-बितर हो जाता है।इस दोष को दूर करने के लिए आपको हर शनिवार शनि दोष निवारण पूजा करनी चाहिए।



शनि दोष निवारण पूजा: इस पूजा को शुरू करने से पहले आप नहा लें। अब शनि देव की प्रतिमा को काली तिल के बीज, सरसों का तेल, लोहे की कोई भी सामग्री, काला वस्त्र और काली उड़द चढ़ा-कर शनि देव को मनाने के लिए एक मंत्र का जाप करना चाहिए। “ऊँसूर्यपुत्रोदीर्घदेहीविशालाक्षा शिवप्रिया मंदाचाराप्रसन्नात्मापीड़ांहरतु में शनि” इस मन्त्र का पूजा के अंत में ताप जाप करें और शनी देव से कष्ट हरने की विनती करें।


  • वास्तु पूजन विधि- वास्तु शान्ति पूजा कैसे करें

वास्तु दोष को कुंडली में एक गंदा स्थान दिया गया है। इस दोष से पीड़ित व्यक्ति के घर में कलह, क्लेश, दारिद्र्य रहती है और धन की कमी बनी रहती है। आइये इसका पूजा विधि जानते हैं

वास्तु पूजन विधि

किसी ज्योत्सी से जाकर इस विधि के लिए सभी जरूरी सामग्री इकट्ठा कर लें और इस पूजा के लिए एक अच्छा दिन तय कर लें। पूजा वाले दिन घर साफ़ सुथरा रखें और फूल, माला आदि से घर के सजावट करें।  इस दिन जोड़े को व्रत रखना चाहिए।

वास्तुचक्र का निर्माण कर कलश और बाकी सामग्री रखें। अब इस मन्त्र का उचारण करते हुए “वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान्त्स्वावेशोअनमीवोरूभवान्। यत्त्वेमहे प्रति तन्नोजुषस्वशंनोभवद्विपदेशंचतुष्पदे।।” वास्तु देवता से यह विनती करें की वो घर से कलह, क्लेश,दारिद्र्यता और धन की कमी दूर करें।