जानिए नाखुनो पर अर्द्धचंद्र का क्या अर्थ है ?

जानिए नाखुनो पर अर्द्धचंद्र का क्या अर्थ है ?

लेखिका : रजनीशा शर्मा

जानिए नाखुनो पर अर्द्धचंद्र का क्या अर्थ है ?

सामुद्रिक शास्त्र में नाखुनो पर बनने वाले अर्द्धचन्र्द्र का विस्तार से विश्लेषण किया गया है , प्रायः व्यक्ति के सभी अंगुलियों में अर्द्धचंद्र कम ही देखे गए है परन्तु यदि ऐसा हो तो व्यक्ति का सम्पूर्ण भाग्योदय माना जाता है , आइये जानते है नाखुनो पर बने अर्द्धचंद्र का क्या अर्थ है एवं इसके माध्यम से आप किस प्रकार जान सकते है की आप किस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेंगे -

तर्जनी - तर्जनी अंगुली वृहस्पति गृह से शासित अंगुली है , इस पर बना अर्द्धचंद्र व्यक्ति के बुद्धिमान एवं उसके गंभीर स्वभाव का सूचक है , तर्जनी अंगुली के नाख़ून पर अगर अर्द्ध चंद्र बना हो तो व्यक्ति अध्ययन एवं अध्यापन के क्षेत्र में सफलता अवश्य प्राप्त करता है , लेखन , डायरेक्शन , एवं ऐसे सभी कार्य जिन मे गहन अध्ययन एवं चिंतन की आवश्यकता हो ऐसे सभी कार्यो में व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है । मध्यमा - मध्यमा अंगुली शनि गृह शासित अंगुली है , इस पर बना अर्द्धचंद्र व्यक्ति के भाग्य उदय का सूचक है , इस पर बना अर्द्धचंद्र व्यक्ति को बिजनेस , कानून , एवं सरकारी क्षेत्र में सफलता दिलाता है ।

अनामिका - अनामिका अंगुली सूर्य की अंगुली कही जाती है , यदि इस अंगुली के नाख़ून पर अर्द्धचंद्र बना हो तो व्यक्ति समाज में मान सम्मान एवं पद प्रतिष्ठा प्राप्त करता है , एवं व्यक्ति राजनीति , मेडिकल एवं सरकारी विभागों में शीर्ष स्थान प्राप्त करता है ।

कनिष्ठा - यह बुद्ध गृह शासित अंगुली है , इस अंगुली के नाख़ून पर यदि अर्द्धचंद्र हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है, उसका बौद्धिक विकास शीर्ष स्तर पर होता है , एवं व्यक्ति मिडिया , संगीत , एवं विज्ञानं के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है ।

अंगूठा - अंगूठे पर प्रायः सभी व्यक्तियों के अर्द्ध चंद्र होता है , यदि न हो व्यक्ति मानसिक रोगी होता है , क्योकी अंगूठा शुक्र गृह शासित होता है ये मनोरंजन के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते है व्यक्ति कला के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करता है ।