अमरनाथ गुफा के दर्शन क्यों करने चाहिए?

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By: Sonu Sharma

विश्वप्रसिद्ध अमरनाथ गुफा हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थस्‍थल है, यह भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है । इसे ‘अमरेश्वर’ भी कहा जाता था, यहहिमालय पर्वत श्रेणियों में स्थित है । यहाँ प्रति वर्ष विश्व भर से हजारों श्रद्धालु भगवान् शिव के दर्शन करने आते हैं । यह श्रीनगर से लगभग 141 किमी. कीदूरी पर है और यह गुफा समुद्र तल से लगभग 3,978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है ।

कहा जाता है कि भगवान शिव ने अपनी पत्नी पारवती को इसी गुफा में अमरत्व का रहस्य बताया था और यह भी मान्यता है कि शिव जी साक्षात श्रीअमरनाथ गुफा में विराजमान रहते हैं, इसीलिए अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है । जब शिव जी पार्वती जी को अमरकथा सुनाने ले जा रहे थे, तब रास्ते में पहलगाम में उन्होंने अपनी नंदी बैल का परित्याग किया, उसके पश्चात चंदनबाड़ी में चंद्रमा को मुक्त किया, शेषनाग नामक झील सर्पों का त्याग किया, यहाँ तक की  महागुणस पर्वत पर अपने पुत्र गणेशजी को भी छोड़ दिया और उसके बाद पंचतरणी पहुंच कर उन्होंने पांचों तत्वों का परित्याग किया और अमरनाथ गुफा में पार्वती को अमरकथा सुनाई ।



अमरनाथ शिवलिंग की अद्भुत बात यह है कि शिवलिंग की ऊंचाई चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ घटती-बढ़ती रहती है । देखा गया है कि पूर्णिमा के दिन शिवलिंग अपने पूरे आकार में होता है और अमावस्या के दिन यह आकार में छोटा दिखाई देता है ।

पुराणों के अनुसार अमरनाथ बाबा के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है और व्यक्ति को 23 पवित्र तीर्थों के पुण्य के बराबर पुण्य मिलता है । अमरनाथ में स्थित पार्वती पीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है । कहा जाता है कि इस गुफा में भगवान शिव पहले-पहल श्रावण की पूर्णिमा को आए थे और इसी कारण से इस दिन यदि अमरनाथ की यात्रा की जाए तो इसका विशेष महत्व माना जाता है ।