जानिए एक ऐसे मंदिर के बारे में जहाँ पर होती है मेंढक की पूजा!

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लेखिका: शिक्षा सिंह 

भारत में अनेक धर्मो को मान ने वाले लोग रहते हैं। अनेकता में एकता ही हमारे देश को बाकि देशो से अलग करता हैं।  यहाँ हर धर्म जाति के लोग अपनी अपनी मान्यताओं के हिसाब से अपने अपने इष्ट की पूजा करते हैं। लेकिन क्या आप लोग जानते है की भारत में कई ऐसे मंदिर भी है जहाँ पर जानवरो को पूजा जाता हैं। हर मंदिर की अपनी अलग मान्यता होती है और उसके हिसाब से वहां पर उस जानवर की पूजा होती हैं।  आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसे मंदिर के बारे में जहाँ पर मेंढक की पूजा की जाती हैं। 

 

भारत में एक मंदिर ऐसा है जहाँ पर मेंढक की पूजा की जाती है और यह मंदिर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के ओयल कसबे में बना हुआ हैं। इस मंदिर की स्थापना 200 साल पहले की गयी थी और इस मंदिर को बनाने का मुख्य कारण बाढ़ और सूखे से आयी विपदा से बचाने के लिए किया गया था।

 

 यह मंदिर जहा स्थित है वहां पर ओयल शैव संप्रदाय का मुख्य केंद्र था और यहाँ के शासक भगवन शिव की आराधना करते थे। इस कसबे के बीचो बीचो मंडूक यन्त्र के ऊपर एक प्राचीन शिव मंदिर भी स्थापित है।  

 

इस क्षेत्र पर ग्यारवही शताब्दी से लेकर उन्नीसवी शताब्दी तक चाहमान शासको ने प्रशासन किया। चाहमान शासक के राजा बक्श सिंह ने ही इस मंदिर को बनवाया था ।  इस मंदिर के बीचो बीचो एक बहुत बड़ा मेढक बनाया गया है और उस मेंढक की लोग पूजा करते हैं। 

 

यह मंदिर तंत्रवाद पर आधारित है और इस मंदिर की परिकल्पना एक महान तांत्रिक ने की थी। मेंढक मंदिर के नाम से जाना जाता है यह मंदिर, यहाँ पर दीपावली और शिवरात्रि पर काफी बड़ी संख्या में लोग आते है और पूजा करते हैं। इस मंदिर की मान्यता काफी दूर दूर तक फैली हुई हैं।