द्रौपदी स्वयंवर में क्यों, कर्ण नहीं ले सके भाग?

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लेखक: सोनू शर्मा

कुंती पुत्र कर्ण को कौन नहीं जानता, कर्ण एक महान योद्धा तथा परम ज्ञानी थे। वह सूर्य और कुंती के पुत्र थे, उनकी माता ने लोक अपवाद से बचने के लिए अपने पुत्र को टोकरी में रखकर नदी में प्रवाहित कर दिया था । वह टोकरी बहती हुई हस्तिनापुर में राजा धृतराष्ट्र के सारथी अधिरथ को मिली। अधिरथ में अपना सौभाग्य मानकर कर्ण का लालन पालन किया।

द्रौपदी के स्वयंवर में भाग लेने के लिए कर्ण भी गए थे, वह दुर्योधन के परम मित्र थे। दुर्योधन ने उन्हें अंग देश का राज्य प्रदान किया था। जब कर्ण ने  मछली की आँख भेदने के लिए धनुष उठाया तो उन्हें स्वयंवर में हिस्सा नहीं लेने दिया गया। इसका कारण था की वह अधिरत के घर में पले थे इसीलिए उन्हें सूत पुत्र कहा गया ।

स्वयंवर में सिर्फ राजघरानों के राजकुमार ही हिस्सा ले सकते थे, कर्ण राजपरिवार से सम्बन्ध रखते थे लेकिन यह बात किसी को पता नहीं थी । कर्ण को एक श्राप के कारण अपना पूरा जीवन कष्टों में व्यतीत करना पड़ा, कर्ण एक क्षत्रिय थे फिर भी वह सूत पुत्र की कहलाए ।

कर्ण बहुत ही वफादार थे, उन्होंने दुर्योधन से अपनी मित्रता पूरी ईमानदारी से निभाई, उन्होंने दुर्योधन के लिए अपनी जान भी दाव पर लगा दी । ऐसी मान्यता है की कर्ण कवच व कुण्डल पहन कर जन्मे थे । कर्ण की पहली पत्नी का नाम रूषाली था, जो की उनके पिता की पसंद थी और उनकी दूसरी पत्नी का नाम सुप्रिया था।