जानिए शास्त्रों के अनुसार सुबह उठते ही क्यों करने चाहिए ‘कर दर्शन’!

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लेखक: सोनू शर्मा

हिन्दू धर्म में हम दिनभर में जितने भी कार्य करते है उनका अपना अलग ही महत्व होता है । जिस प्रकार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना हमारे स्वास्थ व सुख समृद्धि के लिए अच्छा होता है इसी प्रकार सुबह उठकर सबसे पहले "कर दर्शन " का अपना विशेष महत्व है ।

हाथो की दोनों हथेलियों को मिलाकर सुबह के समय दर्शन किए जाते है, दोनों हाथो को मिलाने से हाथ में अर्ध चक्र का आकार बनता है उसके दर्शन करके यह मन्त्र बोला जाता है ।

कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती।

कर मूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते कर दर्शनम्॥

इसका अर्थ है कि मेरे हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी का, मध्य में सरस्वती का और मूल भाग में ब्रह्मा का निवास स्थान है।

ऐसी मान्यता है कि ऐसे करने से हमारा पूरा दिन अच्छा व्यतीत होता है और घर में सुख समृद्धि आती है । हमारी हथेलियों में ऊर्जा का स्त्रोत होता है । मन्त्र का उच्चारण करने के बाद हाथ जोड़ कर हाथो को धीरे - धीरे रगड़े तथा उन हाथों से पूरे शरीर का स्पर्श करना चाहिए जिससे हमारा शरीर सवस्थ रहता है ।

एक मान्यता के अनुसार हमारे सीधे हाथ में अग्नि तीर्थ, बाए हाथ में सोम तीर्थ तथा उंगलियों के पोरों में अन्य तीर्थो का वास माना जाता है, यदि हम सुबह कर दर्शन करते है तो सुबह हमारे सभी तीर्थो के दर्शन हो जाते है ।

इसी प्रकार जैन मान्यता में ऊँगली के २४ पोरों में २४ तीर्थंकरो का वास माना जाता है, कर दर्शन से सुबह सभी तीर्थंकरो के दर्शन हो जाते है ।