नवरात्रि के नौवे दिन माँ सिद्धिदात्री विद्या और ज्ञान से विद्यार्थियों...

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लेखिका : रजनीशा शर्मा

नवरात्रि के नौवे दिन में अंतिम स्वरूप सर्वसिद्धि दाता माँ सिद्धिदात्री का है | माँ सिद्धिदात्री चतुर्भुजी देवी है जो अपने हाथो में शंख , चक्र , गदा एवं कमल पुष्प धारण करती है | माँ कमल पर आरूढ़ रहती है और सिंह की सवारी करती है | बह्मवैवर्त और देवी पुराणों में माँ के सभी स्वरूपों का विस्तृत वर्णन मिलता है | माँ सिद्धिदात्री सभी अष्ट सिद्धियों की स्वामिनी है | भगवान शिव को भी माँ सिद्धिदात्री से ही सिद्धियों की प्राप्ति हुई है | भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ही प्रकट  हुआ है | माँ सिद्धिदात्री माँ सरस्वती का ही स्वरूप है | अतः माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ज्ञान एवं सिद्धि की प्राप्ति होती है | विद्यार्थियों को माँ सिद्धिदात्री का पूजन अवश्य करना चाहिए |

                                     इस दिन साधक का मन माँ सिद्धिदात्री की कृपा से निर्वाण चक्र में स्थित होता है |यह चक्र कपाल में स्थित होता है | माँ की कृपा से इस चक्र की शक्तिया जाग्रत होती है |माँ सिद्धिदात्री के नाम से ही स्पष्ट है सभी कमनाओ की पूर्ति करने वाली | ऐसी कोई कामना नहीं जो माँ की कृपा से पूर्ण ना हो|

पूजन विधि-

नवरात्रि के नवे दिन नौ कन्याओं को भोजन अवश्य करना चाहिए | माँ सिद्धिदात्री को सभी प्रकार के अन्न का भोग लगता है | अतः इस दिन नैवेद्य का भोग लगाए और सुंदर भोजन बनाकर कन्याओं का पूजन करे |

इस प्रकार जो भी व्यक्ति माँ के नौ स्वरूपों का पूजन करता  है वह इहलोक और परलोक में सुख पाता है |

 

ध्यान मंत्र -

                 सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यरसुरैरमरैरपि सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ||